परिचय: लोकतंत्र की नींव – राज्य शासन
जब आप सुबह उठते हैं, नल खोलते हैं तो पानी आता है, बच्चे स्कूल जाते हैं, सड़कों पर लाइटें जलती हैं, और बीमार पड़ने पर अस्पतालों में इलाज मिलता है। ये सब सुविधाएँ जादू से नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित राज्य शासन का परिणाम होती हैं। लेकिन क्या आपने कभी गहराई से सोचा है कि आखिर राज्य शासन कैसे काम करता है? एक आम नागरिक से लेकर UPSC के इच्छुक उम्मीदवार तक के लिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है।
भारतीय संविधान के अनुसार, भारत “राज्यों का संघ” है। यहाँ शक्ति का विकेंद्रीकरण किया गया है ताकि जनता के करीब की समस्याओं का समाधान जनता के करीब ही हो सके। GS पेपर-II (राजव्यवस्था) में इस विषय की गहरी समझ होना अनिवार्य है, क्योंकि संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध और प्रशासनिक तंत्र प्रश्नों का एक बड़ा हिस्सा हैं। यह लेख शासन के इस जटिल तंत्र को सरल शब्दों में समझाने का एक सशक्त प्रयास है, जो आपकी प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों में मदद करेगा।
1. सरकार और राज्य सरकार की अवधारणा
1.1 सरकार क्या होती है?
सरकार एक ऐसी संस्था है जो किसी देश या राज्य की नीतियों का निर्धारण करती है, कानून बनाती है, उन्हें लागू करती है और प्रशासनिक तंत्र को संचालित करती है। सरकार के तीन अंग होते हैं:
- विधायिका (Legislature): कानून बनाने का कार्य।
- कार्यपालिका (Executive): कानूनों को लागू करना।
- न्यायपालिका (Judiciary): कानूनों की व्याख्या और विवादों का निपटारा।
1.2 राज्य सरकार का मतलब
भारत में दोहरी सरकार प्रणाली है – केंद्र सरकार और राज्य सरकारें। जबकि केंद्र सरकार रक्षा, विदेश नीति, परमाणु ऊर्जा जैसे विषयों पर ध्यान देती है, राज्य सरकार उन विषयों को देखती है जो सीधे जनता के दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं। संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्य सूची (State List) में पुलिस, सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, स्थानीय स्वशासन जैसे 61 विषय शामिल हैं। भारतीय संघवाद में राज्य सरकार का दर्जा केंद्र के साथ सहकारी संबंध रखते हुए अपने क्षेत्र में स्वतंत्र होता है।
1.3 जनता द्वारा चुनी गई सरकार और लोकतांत्रिक शासन
भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य है। यहाँ सरकार का गठन जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से होता है। हर 5 वर्ष में विधानसभा चुनाव होते हैं, जिसमें 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का प्रत्येक नागरिक मतदान करता है। बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन सरकार बनाता है। इस प्रणाली को लोकतांत्रिक शासन कहा जाता है, जहाँ जनता ही सर्वोच्च होती है और सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है।
2. विधायक (MLA): जनता के सच्चे प्रतिनिधि
किसी भी लोकतंत्र में विधायक (Member of Legislative Assembly – MLA) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वह जनता और सरकार के बीच सेतु का काम करता है।
2.1 विधायक कौन होता है?
विधायक वह व्यक्ति होता है जो किसी विशिष्ट विधानसभा क्षेत्र (Constituency) से चुनाव जीतकर राज्य की विधानसभा में जनता का प्रतिनिधित्व करता है। वह कानून बनाने, बजट पारित करने और कार्यपालिका पर नियंत्रण रखने का कार्य करता है। प्रोटोकॉल में एक विधायक जिला कलेक्टर और मुख्य सचिव से भी ऊपर होता है।
2.2 विधायक कैसे चुनाव जीतता है?
विधानसभा चुनाव के दौरान, प्रत्येक क्षेत्र में विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं। जो उम्मीदवार सबसे अधिक वोट प्राप्त करता है, वह ‘बहुमत प्रणाली’ (First-Past-the-Post) के तहत जीतता है।
2.3 विधानसभा क्षेत्र और जनता का प्रतिनिधित्व
पूरे राज्य को कई छोटे-छोटे विधानसभा क्षेत्रों में बांटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र की जनसंख्या लगभग समान रखी जाती है। विधायक अपने क्षेत्र की समस्याओं (जैसे सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य) को सरकार के समक्ष उठाता है। जरूरी नहीं कि वह सीधे कलेक्टर को आदेश दे सके, लेकिन वह प्रशासन पर दबाव बनाने के प्रभावी साधन रखता है।
3. राजनीतिक दल (Political Party): शासन की रीढ़
3.1 पार्टी क्या होती है?
राजनीतिक दल समान विचारधारा वाले लोगों का एक समूह है जो चुनाव लड़ने और सरकार बनाने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिए, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस आदि।
3.2 बहुमत पार्टी और सरकार का गठन
चुनावों के बाद, जिस दल या गठबंधन के पास विधानसभा में बहुमत (सरल बहुमत अर्थात कुल सीटों का आधे से अधिक) होता है, वह सरकार बनाने का दावा पेश करता है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सरकार बनाने का दावा किया, जो वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य का एक उदाहरण है।
3.3 विपक्ष की भूमिका
जो दल या गठबंधन सरकार बनाने में असमर्थ रहता है, वह विपक्ष में बैठता है। विपक्ष की प्रमुख भूमिका सरकार को जवाबदेह बनाना है। वह प्रश्नकाल में प्रश्न पूछता है, कमियों को उजागर करता है और जनता के हितों की रक्षा करता है। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को “सार्थक विपक्ष” (Constructive Opposition) कहा जाता है।

4. सरकार का गठन: मुख्यमंत्री से मंत्रिपरिषद तक
एक बार चुनावी परिणाम स्पष्ट हो जाने के बाद, सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है। यह प्रक्रिया संवैधानिक रूप से राज्यपाल के नेतृत्व में पूरी की जाती है।
4.1 मुख्यमंत्री कैसे बनता है?
राज्यपाल बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाता है (अनुच्छेद 164)। मुख्यमंत्री राज्य सरकार का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है। वह विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होता है और राज्य के समस्त प्रशासन का संचालन करता है।
4.2 मंत्रिपरिषद (Council of Ministers)
मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है। मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों के इस समूह को मंत्रिपरिषद कहा जाता है。 मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। यही वह निकाय है जहाँ नीतिगत निर्णय लिए जाते हैं।
2024 में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गृह, वित्त और सामान्य प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे। इसी प्रकार, 2024 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गृह, ऊर्जा और कानून विभाग अपने पास रखा। यह दर्शाता है कि सत्तारूढ़ दल की रणनीति और संतुलन के आधार पर विभागों का बंटवारा कैसे होता है।
4.3 राज्यपाल की भूमिका (Basic Idea)
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है (अनुच्छेद 153 और 154)। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा 5 वर्षों के लिए की जाती है। जबकि संविधान निर्माता (जैसे डॉ. बी. आर. अम्बेडकर) राज्यपाल को औपचारिक प्रमुख मानते थे, वर्तमान समय में राज्यपाल कुछ विवादास्पद परिस्थितियों में केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में कार्य करते नजर आते हैं।
5. विधानसभा (Legislative Assembly): कानूनों का निर्माण
विधानसभा राज्य का विधायी सदन है। यह जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने गए प्रतिनिधियों (MLAs) का सदन है। अधिकांश राज्यों में एक सदन होता है, हालाँकि बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में दो सदन हैं (विधानसभा और विधानपरिषद)।
5.1 कानून बनाने की पूरी प्रक्रिया
किसी भी नए कानून का निर्माण विधेयक (Bill) के रूप में शुरू होता है। यह प्रक्रिया बहु-स्तरीय होती है:
- विधेयक का परिचय: विधेयक या तो कोई मंत्री (सरकारी विधेयक) या कोई सामान्य विधायक (निजी सदस्य विधेयक) पेश करता है。
- प्रथम वाचन: विधेयक का नाम और उद्देश्य पढ़ा जाता है। कोई बहस नहीं होती。
- प्रकाशन: विधेयक को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए राजपत्र में प्रकाशित किया जाता है।
- द्वितीय वाचन: इस चरण में विधेयक के सिद्धांतों पर पूरी बहस होती है। इसे चयन समिति को भेजा जा सकता है।
- समिति चरण: चयन समिति विधेयक के हर अनुच्छेद की जाँच करती है और सुझाव देती है।
- तृतीय वाचन: अंतिम रूप से विधेयक पर मतदान किया जाता है।
- राज्यपाल की सहमति: विधानसभा द्वारा पारित होने के बाद, विधेयक राज्यपाल के पास जाता है。 राज्यपाल या तो उस पर हस्ताक्षर कर कानून बना सकता है, या विचार के लिए वापस लौटा सकता है (जैसा कि तमिलनाडु के राज्यपाल ने ऑनलाइन जुआ विधेयक के मामले में किया)।

6. प्रश्नकाल: लोकतंत्र की जीवंत अभिव्यक्ति
विधानसभा की कार्यवाही का सबसे रोमांचक और महत्वपूर्ण समय प्रश्नकाल (Question Hour) होता है। यह आमतौर पर सत्र के प्रारंभ का पहला घंटा होता है (11 बजे से 12 बजे तक)।
6.1 विधायक सरकार से सवाल कैसे पूछते हैं?
इस समय के दौरान, विधायक संबंधित मंत्रियों से उनके विभागों के कामकाज से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं। ये प्रश्न पूर्व सूचना पर होते हैं। मंत्रियों को इन प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं, जिससे प्रशासन में पारदर्शिता आती है।
6.2 जनता की समस्याएँ उठाना और जवाबदेही
प्रश्नकाल प्रशासनिक तंत्र पर नियंत्रण रखने का सबसे प्रभावी साधन है। अगर किसी जिले में सड़कें टूटी हुई हैं या अस्पताल में दवाइयाँ नहीं हैं, तो विधायक प्रश्नकाल में इसे उठाकर मंत्री को जवाबदेह बना सकता है। इससे सरकारी अधिकारियों में काम करने का दबाव बनता है। प्रश्नकाल के बाद आने वाले शून्यकाल (Zero Hour) में बिना पूर्व सूचना के तत्कालिक मुद्दे उठाए जा सकते हैं।
7. सरकारी विभागों का दैनिक कार्य
राज्य सरकार का विशाल प्रशासनिक तंत्र विभिन्न विभागों में बंटा हुआ है, जिनका नेतृत्व कैबिनेट मंत्री करते हैं। यही तंत्र जनता तक सेवाएँ पहुँचाता है।
7.1 स्वास्थ्य विभाग
यह विभाग राज्य के सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs), एंबुलेंस सेवाओं, टीकाकरण अभियानों और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का संचालन करता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के आधार पर, राज्य सरकारें स्वास्थ्य नीतियों में बदलाव लाती रहती हैं।
7.2 शिक्षा विभाग
स्कूली शिक्षा (प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक), पाठ्यक्रम निर्धारण, शिक्षकों की भर्ती और स्कूली बुनियादी ढांचे का विकास इसी विभाग की जिम्मेदारी है।
7.3 सड़क और पानी जैसी सेवाएँ
लोक निर्माण विभाग (PWD) सड़कों और पुलों का निर्माण एवं रखरखाव करता है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) नलों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करता है। स्थानीय निकाय (नगर निगम, पंचायत) इन सेवाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने में सहायता करते हैं।
8. लोकतंत्र का चौथा स्तंभ: मीडिया की भूमिका
मीडिया को आधुनिक लोकतंत्र का चौथा स्तंभ (Fourth Pillar) कहा जाता है। इसकी भूमिका निर्णायक होती है:
- सरकार पर नजर रखना: मीडिया सरकार के कामकाज की लगातार पड़ताल करता है। वित्तीय घोटालों (जैसे 2G स्पेक्ट्रम मामला) को उजागर करके यह सत्ता को जवाबदेह बनाता है।
- जनता की समस्याओं को दिखाना: अखबारों और टीवी चैनलों के माध्यम से आम जनता की दिक्कतें (जैसे कि किसी दूरदराज के इलाके में शिक्षा का अभाव) सरकार के संज्ञान में लाई जाती हैं।
- जनमत तैयार करना: मीडिया सरकारी नीतियों के बारे में बहस छेड़कर जनमत तैयार करता है और सरकार पर दबाव बनाता है कि वह जनहित के निर्णय ले।
Author: MD Afjal Ansari is a UPSC aspirant with 4 years of experience as a Software Engineer. His optional subject is Public Administration.
9. कानून और निर्णय: सरकार समस्या का समाधान कैसे करती है?
जब कोई समस्या (जैसे बाढ़, अकाल, या सड़क दुर्घटना) आती है, तो सरकार निम्नलिखित तरीके से निर्णय लेती है:
- समस्या का उठना: मीडिया या विधायक समस्या को उठाता है।
- विभागीय कार्रवाई: संबंधित विभाग (जैसे, जिला प्रशासन) रिपोर्ट तैयार करता है।
- मंत्री स्तर पर निर्णय: विभाग का मंत्री मामले को कैबिनेट में रखता है।
- कैबिनेट निर्णय: मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) बैठक कर नीति या कोई कार्ययोजना तय करती है।
- कार्यान्वयन (Implementation): निर्णय निचले स्तर के अधिकारियों तक पहुँचता है, और वे इसे लागू करते हैं।
- लेखा परीक्षा (Audit): बाद में, CAG (नियंत्रक और महालेखा परीक्षक) यह जाँचता है कि पैसा सही इस्तेमाल हुआ या नहीं।
10. समकालीन परिदृश्य और चुनौतियाँ
10.1 वर्तमान राजनीतिक स्थिति (2024-2026)
- गठबंधन सरकारें (Coalition Governments): अधिकांश बड़े राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड) में गठबंधन की सरकारें हैं। 2025 के बिहार चुनाव में एनडीए गठबंधन सत्ता में लौटा। इसी तरह, तमिलनाडु में 2026 के चुनाव की तैयारियों के बीच एनडीए गठबंधन की सरकार बनने की चर्चा है।
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव: राज्यपालों की भूमिका को लेकर विवाद बढ़ा है। तमिलनाडु, पंजाब, केरल और पश्चिम बंगाल में राज्य सरकारों और राज्यपालों के बीच मतभेद देखने को मिले हैं।
10.2 प्रमुख चुनौतियाँ
- वित्तीय असमानता: कई राज्य अपने कर संसाधनों में कमी के कारण केंद्र पर निर्भर हैं।
- प्रशासनिक अक्षमता: सरकारी विभागों में लालफीताशाही (Red-tapism) और भ्रष्टाचार सेवा वितरण को धीमा करता है।
- स्थानीय निकायों का कमजोर होना: संविधान के 74वें संशोधन के बावजूद, राज्य सरकारें नगर निकायों को वित्तीय और कार्यात्मक रूप से सशक्त बनाने में अनिच्छुक हैं।
- अंतर-राज्यीय विवाद (Inter-state Disputes): नदी जल बंटवारे (जैसे रावी-ब्यास नदी जल विवाद) और सीमा विवादों का समाधान राजनीतिक रूप से संवेदनशील है।
- राज्यपाल पद का राजनीतिकरण: राज्यपालों द्वारा विधेयकों को पारित करने में देरी करना या सरकार गिराने की कोशिशें लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौती हैं。
11. राज्य सरकार की प्रमुख योजनाएँ (उदाहरण)
UPSC की दृष्टि से राज्यों की फ्लैगशिप योजनाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उदाहरण के लिए:
12. उज्ज्वल भविष्य (Way Forward): Mains उत्तर के लिए सुझाव
- e-Governance को बढ़ावा: सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करके भ्रष्टाचार कम किया जा सकता है。
- राज्यपालों की भूमिका पर स्पष्टता: सर्वोच्च न्यायालय के बोम्मई मामले के फैसले और एस.आर. बोम्मई बनाम संघ (1994) के मानदंडों के अनुसार ही राज्यपाल को कार्य करना चाहिए।
- स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना: 74वें संशोधन को प्रभावी ढंग से लागू कर नगर निकायों को अधिक शक्ति और धन देना चाहिए।
- विधानसभा की बैठकों की संख्या बढ़ाना: सत्र को लंबा करना ताकि कानूनी प्रक्रिया पर अधिक बहस हो सके।
- सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism): केंद्र और राज्यों के बीच नीति आयोग और वित्त आयोग जैसे मंचों के माध्यम से सहयोग बढ़ाना चाहिए।
13. निष्कर्ष
राज्य शासन कैसे काम करता है यह समझना UPSC के हर इच्छुक उम्मीदवार के लिए उतना ही आवश्यक है जितना कि एक आम नागरिक के लिए। यह प्रणाली विधायिका, कार्यपालिका, मीडिया और जनता के बीच एक जटिल लेकिन प्रभावी अंतःक्रिया का परिणाम है। जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद शासन का संचालन करते हैं, वहीं विपक्ष और मीडिया सरकार को जवाबदेह बनाए रखते हैं। चुनौतियों के बावजूद, भारतीय संघवाद लगातार विकसित हो रहा है। एक सशक्त लोकतंत्र के लिए आवश्यक है कि राज्य सरकारें जनता के प्रति अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और उत्तरदायी बनें, तभी “सबका साथ, सबका विकास” का सपना साकार होगा।
UPSC प्रीलिम्स पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs)
प्रश्न 1: “विधान सभा के प्रति मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी” किस अनुच्छेद में कही गई है?
- (a) अनुच्छेद 163
- (b) अनुच्छेद 164(2)
- (c) अनुच्छेद 167
- (d) अनुच्छेद 356
सही उत्तर: (b) अनुच्छेद 164(2)
व्याख्या: अनुच्छेद 164(2) स्पष्ट रूप से कहता है कि मंत्रिपरिषद राज्य की विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी。
प्रश्न 2: राज्य सरकारों के पास निम्नलिखित में से कौन सा विषय राज्य सूची में शामिल नहीं है?
- (a) पुलिस
- (b) सार्वजनिक स्वास्थ्य
- (c) रक्षा
- (d) कृषि
सही उत्तर: (c) रक्षा
व्याख्या: रक्षा संघ सूची (Union List) का विषय है, राज्य सूची का नहीं।
प्रश्न 3: किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल के पास विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखने की शक्ति है?
- (a) अनुच्छेद 200
- (b) अनुच्छेद 201
- (c) अनुच्छेद 202
- (d) अनुच्छेद 213
सही उत्तर: (a) अनुच्छेद 200
व्याख्या: अनुच्छेद 200 राज्यपाल को विधेयक को राष्ट्रपति के पास भेजने का अधिकार देता है यदि उसे लगता है कि यह असंवैधानिक है।
प्रश्न 4: मुख्यमंत्री के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- (a) राज्यपाल किसी को भी मुख्यमंत्री नियुक्ति कर सकता है。
- (b) मुख्यमंत्री का कार्यकाल राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करता है।
- (c) मुख्यमंत्री राज्य का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है।
- (d) मुख्यमंत्री को राज्यपाल हटा सकता है。
सही उत्तर: (c) मुख्यमंत्री राज्य का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है।
व्याख्या: मुख्यमंत्री वास्तविक कार्यकारी प्रमुख है, जबकि राज्यपाल नाममात्र का प्रमुख है।
प्रश्न 5: ‘प्रश्नकाल’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से क्या सही है?
- (a) यह विधानसभा सत्र के अंत का समय होता है。
- (b) इसमें बिना सूचना के प्रश्न पूछे जा सकते हैं。
- (c) यह सरकार को जवाबदेह बनाने का साधन है。
- (d) यह केवल लोकसभा में होता है।
सही उत्तर: (c) यह सरकार को जवाबदेह बनाने का साधन है।
व्याख्या: प्रश्नकाल विधायकों को मंत्रियों से सवाल पूछने का मौका देता है, जिससे जवाबदेही बनती है。
UPSC मेन्स पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs)
प्रश्न (मेन्स 2023): “विधायी कार्यों के संचालन में व्यवस्था एवं निष्पक्षता बनाए रखने में और सर्वोत्तम लोकतांत्रिक परम्पराओं को सुगम बनाने में राज्य विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारियों की भूमिका की विवेचना कीजिए।”
मॉडल उत्तर:
- परिचय: राज्य विधायिकाओं (विधानसभा और विधानपरिषद) के पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष/सभापति) सदन की कार्यवाही के संचालन के लिए जिम्मेदार होते हैं। उनकी भूमिका संविधान के अनुच्छेद 178 (विधानसभा अध्यक्ष) और मानसून सत्र के नियमों द्वारा परिभाषित होती है।
- भूमिका:
- व्यवस्था बनाए रखना: वे सदन में शांति बनाए रखते हैं, सदस्यों को भाषण देने की अनुमति देते हैं या रोकते हैं।
- निष्पक्षता: वे सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तटस्थ रहते हैं। विधेयक पारित करते समय यह सुनिश्चित करते हैं कि विपक्ष को पर्याप्त समय मिले।
- लोकतांत्रिक परंपराएँ: प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान अनुशासन बनाए रखते हुए सदस्यों को जनता के मुद्दे उठाने का अवसर देते हैं।
- निष्कर्ष: पीठासीन अधिकारी सदन के “न्यायाधीश” होते हैं। उनकी निष्पक्षता ही लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखती है।
अभ्यास अनुभाग (Practice Section)
10 MCQs with Answers:
- राज्य सरकार का कार्यकारी प्रमुख कौन होता है?
a) राज्यपाल
b) मुख्यमंत्री
c) मुख्य न्यायाधीश
d) महाधिवक्ता
Ans: b) मुख्यमंत्री - विधानसभा द्वारा पारित विधेयक कानून तब बनता है जब उस पर सहमति कौन देता है?
a) मुख्यमंत्री
b) राष्ट्रपति
c) राज्यपाल
d) विधि मंत्री
Ans: c) राज्यपाल - “राज्य शासन कैसे काम करता है” यह समझने के लिए कौन सा सिद्धांत सबसे महत्वपूर्ण है?
a) एकात्मक सिद्धांत
b) शक्ति का पृथक्करण
c) सामंतवाद
d) द्वैध शासन
Ans: b) शक्ति का पृथक्करण - भारत के संविधान की 7वीं अनुसूची किससे संबंधित है?
a) राजभाषा
b) केंद्र-राज्य संबंध (शक्तियों का विभाजन)
c) जाति सूची
d) पंचायती राज
Ans: b) केंद्र-राज्य संबंध (शक्तियों का विभाजन) - मंत्रिपरिषद के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धांत कहाँ से लिया गया है?
a) अमेरिका
b) कनाडा
c) ब्रिटेन (UK)
d) फ्रांस
Ans: c) ब्रिटेन (UK) - राज्य के राजनीतिक परिदृश्य का निर्धारण कौन करता है?
a) सिविल सेवक
b) राजनीतिक दल
c) सेना
d) विदेशी दूतावास
Ans: b) राजनीतिक दल - किस समिति का गठन 1983 में केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा के लिए किया गया था?
a) राजमन्नार समिति
b) सरकारिया आयोग
c) पुंछी आयोग
d) एल.एम. सिंघवी समिति
Ans: b) सरकारिया आयोग - मीडिया को किस स्तंभ के नाम से जाना जाता है?
a) पहला स्तंभ
b) दूसरा स्तंभ
c) तीसरा स्तंभ
d) चौथा स्तंभ
Ans: d) चौथा स्तंभ - विधानसभा में किस अवधि को “प्रश्नकाल” कहा जाता है?
a) अंतिम 1 घंटा
b) मध्य 1 घंटा
c) प्रथम 1 घंटा
d) दोपहर 1 घंटा
Ans: c) प्रथम 1 घंटा - राष्ट्रपति किसके परामर्श पर राज्यपाल की नियुक्ति करता है?
a) प्रधानमंत्री
b) मुख्यमंत्री
c) उपराष्ट्रपति
d) सर्वोच्च न्यायालय
Ans: a) प्रधानमंत्री (केंद्रीय कैबिनेट की सलाह पर)
5 Mains Questions for Practice (150-200 words):
- भारतीय संघवाद में राज्यपाल की भूमिका की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए। क्या वे केवल केंद्र के एजेंट बनकर रह गए हैं?
- लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका “निरोधक” क्यों मानी जाती है? उदाहरण सहित चर्चा करें।
- राज्य शासन में प्रश्नकाल और शून्यकाल के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
- स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में राज्य सरकारों की प्रमुख चुनौतियों का वर्णन करें।
- राज्य सरकारों की विफलताओं को उजागर करने में मीडिया की भूमिका का आकलन करें。
Answer Writing Practice (Structured Answers):
प्रश्न: संविधान के किन तंत्रों के माध्यम से राज्य सरकार केंद्र के प्रति जवाबदेह है?
- परिचय: भारत में संसदीय प्रणाली है जहाँ सरकार एक दूसरे के प्रति उत्तरदायी है। हालाँकि, राज्य सरकार अपने क्षेत्र में स्वायत्त है, फिर भी संविधान केंद्र को राज्यों पर नियंत्रण के कुछ साधन देता है।
- उत्तर: राज्य सरकार केंद्र के प्रति जवाबदेह है क्योंकि:
- राज्यपाल: केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपाल राज्य सरकार की रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेजता है।
- अनुच्छेद 356: यदि राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होता है, तो केंद्र राज्य सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लगा सकता है。
- वित्तीय नियंत्रण: केंद्र वित्त आयोग की अनुशंसा पर राज्यों को धन देता है और CAG राज्यों के लेखों की जाँच करता है。
- सर्वोच्च न्यायालय: राज्य के कानूनों की संवैधानिक वैधता को SC चुनौती दे सकता है।
- निष्कर्ष: हालाँकि राज्य सरकारें सीधे केंद्र के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं, फिर भी संवैधानिक तंत्र यह सुनिश्चित करता है कि शक्ति का दुरुपयोग न हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: राज्य शासन कैसे काम करता है, लोकतंत्र में इसकी क्या भूमिका है?
A: राज्य शासन जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से राज्य के संसाधनों का प्रबंधन और नीतियों का निर्धारण करता है। यह सुनिश्चित करता है कि जनता की समस्याओं का समाधान जमीनी स्तर पर हो।
Q2: राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच मुख्य अंतर क्या है?
A: राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है (नाममात्र का प्रमुख), जबकि मुख्यमंत्री वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है।
Q3: विधानसभा में प्रश्नकाल में विधायक क्या करते हैं?
A: प्रश्नकाल में विधायक संबंधित मंत्रियों से सरकारी विभागों के कामकाज, बजट व्यय, और जनकल्याण योजनाओं के बारे में सवाल पूछते हैं。
Q4: सरकारी विभाग (जैसे स्वास्थ्य) जनता के लिए क्या सेवाएँ देते हैं?
A: स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पताल, टीकाकरण, एम्बुलेंस सेवा और स्वास्थ्य बीमा जैसी सेवाएँ देता है।
Q5: ‘राज्य शासन कैसे काम करता है’ यह UPSC के किस पेपर में पूछा जाता है?
A: यह मुख्य रूप से GS पेपर – II (राजव्यवस्था, शासन व्यवस्था और संघवाद) में पूछा जाता है।
Q6: क्या राज्य सरकार अपना कोई अलग संविधान बना सकती है?
A: नहीं, भारतीय संविधान राज्यों को अलग संविधान बनाने की अनुमति नहीं देता। पूरे देश के लिए एक ही संविधान है।
Q7: शून्यकाल क्या होता है?
A: प्रश्नकाल के बाद का समय, जहाँ विधायक बिना पूर्व सूचना के तत्कालीन राष्ट्रीय/राज्यीय मुद्दे उठा सकते हैं।
Q8: विधानसभा में कानून कैसे बनता है?
A: विधेयक प्रस्तुत → प्रथम/द्वितीय/तृतीय वाचन → बहस → समिति चरण → मतदान → राज्यपाल की सहमति।
Q9: क्या मीडिया राज्य सरकार को बदल सकता है?
A: मीडिया सीधे सरकार नहीं बदल सकता, लेकिन भ्रष्टाचार उजागर करके जनमत बनाने और सरकार पर दबाव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Q10: राज्य शासन कैसे काम करता है, इसके लिए 2 मुख्य स्त्रोत कौन से हैं?
A: NCERTS (ग्यारहवीं कक्षा – भारतीय संविधान: सिद्धांत और व्यवहार) और M. Laxmikanth प्रमुख स्रोत हैं।
Author: MD Afjal Ansari is a UPSC aspirant with 4 years of experience as a Software Engineer. His optional subject is Public Administration.

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