परिचय –
दिसंबर 2025 की कुरुक्षेत्र पत्रिका का मुख्य विषय भारत के भविष्य का पोषण है। एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर भारत के लिए यह अनिवार्य है कि उसकी भावी पीढ़ी स्वस्थ और सशक्त हो। कुपोषण केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में एक बड़ी बाधा है।
इस संस्करण में सरकार द्वारा चलाए जा रहे पोषण अभियानों, विशेषकर ‘पोषण 2.0’ और ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ पर गहरा प्रकाश डाला गया है। UPSC के अभ्यर्थियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि कैसे सही पोषण रणनीतियां जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) को प्राप्त करने में मदद कर सकती हैं। यह लेख इन सभी पहलुओं को परीक्षा के दृष्टिकोण से कवर करता है।

संदर्भ – भारत में पोषण की स्थिति
पोषण किसी भी राष्ट्र की मानव पूंजी की आधारशिला है। भारत जैसे विशाल देश में, जहां युवाओं की संख्या सर्वाधिक है, वहां कुपोषण और रक्ताल्पता (Anemia) जैसी समस्याएं विकास की गति को धीमा कर सकती हैं।
वर्तमान परिदृश्य में भारत ‘कुपोषण के दोहरे बोझ’ (Double Burden of Malnutrition) का सामना कर रहा है। एक तरफ अविकसित बच्चे (Stunting/Wasting) हैं, तो दूसरी तरफ मोटापे की समस्या बढ़ रही है। सतत विकास लक्ष्य (SDG 2) के तहत ‘जीरो हंगर’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकीकृत प्रयास आवश्यक हैं।
8वें राष्ट्रीय पोषण माह के तीन मुख्य विषय
पोषण अभियान को एक जन आंदोलन बनाने के लिए हर साल सितंबर में पोषण माह मनाया जाता है। 8वें राष्ट्रीय पोषण माह ने मुख्य रूप से तीन विषयों पर ध्यान केंद्रित किया है –
- शिशु और छोटे बच्चों का आहार (Infant and Young Child Feeding – IYCF) – इसमें जन्म के तुरंत बाद स्तनपान और 6 महीने के बाद पूरक आहार पर जोर दिया गया।
- एनीमिया (रक्ताल्पता) की रोकथाम – विशेषकर किशोरियों और गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी को दूर करना।
- वृद्धि निगरानी (Growth Monitoring) – आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों की लंबाई और वजन की नियमित जांच ताकि कुपोषण का समय रहते पता चल सके।
शिशु एवं बाल आहार – एक विस्तृत विश्लेषण
शिशु के जीवन के शुरुआती 1000 दिन (गर्भधारण से लेकर 2 वर्ष की आयु तक) उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
प्रारंभिक पोषण का महत्व
मस्तिष्क का लगभग 80% विकास जीवन के पहले दो वर्षों में हो जाता है। यदि इस दौरान बच्चे को सही पोषण न मिले, तो उसके सीखने की क्षमता और प्रतिरक्षा प्रणाली हमेशा के लिए कमजोर हो सकती है। यह नुकसान अपरिवर्तनीय (Irreversible) होता है।
स्तनपान – प्रकृति का सुपर फ़ूड
मां का दूध बच्चे के लिए प्रकृति का सबसे बड़ा उपहार है। इसे ‘सुपर फ़ूड’ कहा जाता है क्योंकि –
- इसमें बच्चे के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व सही अनुपात में होते हैं।
- कोलोस्ट्रम (पहला गाढ़ा दूध) बच्चे को रोगों से लड़ने की शक्ति (Antibodies) प्रदान करता है।
- यह आसानी से पचने योग्य होता है और बच्चे को संक्रमण से बचाता है।
पूरक आहार (6-24 महीने)
6 महीने के बाद केवल स्तनपान बच्चे की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता। इस समय ‘ऊपरी आहार’ या पूरक आहार की शुरुआत करना अनिवार्य है। इसमें घर का बना ताजा खाना, मसली हुई सब्जियां, दाल और अनाज शामिल होना चाहिए। देरी से पूरक आहार शुरू करना कुपोषण का एक बड़ा कारण है।
प्राकृतिक भोजन और साझा जिम्मेदारी
आज के दौर में प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड का चलन बढ़ा है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। कुरुक्षेत्र पत्रिका स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों के महत्व पर जोर देती है।
- प्राकृतिक भोजन – मोटे अनाज (Millets), स्थानीय फल और सब्जियां न केवल पोषण से भरपूर हैं बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।
- साझा जिम्मेदारी – पोषण केवल सरकार या मां की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार के अन्य सदस्यों, पिता और समाज को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। पुरुषों की भागीदारी से पोषण स्तर में सुधार देखा गया है।
प्रारंभिक बाल्यकाल देखभाल एवं शिक्षा (ECCE)
प्रारंभिक बाल्यकाल देखभाल एवं शिक्षा (Early Childhood Care and Education – ECCE) बच्चों के समग्र विकास की नींव है।
संवैधानिक और नीतिगत आधार
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 45 (Article 45) 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा का प्रावधान करता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने भी इसे स्कूली शिक्षा का आधार माना है।
मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0
सरकार ने आंगनवाड़ियों को अपग्रेड करके ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ बनाने का लक्ष्य रखा है।
- इनमें बेहतर बुनियादी ढांचा, ऑडियो-विजुअल उपकरण और स्मार्ट लर्निंग की सुविधा होगी।
- पोषण 2.0 का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और पोषण वितरण प्रणाली (Nutrition Delivery System) को मजबूत करना है।
पोषण भी पढ़ाई पहल
‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ पहल का उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल ‘खिचड़ी सेंटर’ से बदलकर प्री-स्कूल लर्निंग सेंटर बनाना है। इसमें बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी जाती है और साथ ही उनके पोषण का ध्यान रखा जाता है।
सामुदायिक भागीदारी
पोषण ट्रैकर ऐप (Poshan Tracker App) और जन आंदोलन जैसी पहलों ने समुदाय को जोड़ा है। स्थानीय पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की मदद से पोषण सेवाओं की निगरानी की जा रही है।
मोटापे से निपटने के लिए पोषण साक्षरता
भारत में कुपोषण का स्वरूप बदल रहा है। अब हम मोटापे और उससे जुड़े रोगों का सामना भी कर रहे हैं।
उभरती चुनौती
बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि की कमी और अत्यधिक चीनी व वसा युक्त भोजन का सेवन बच्चों और युवाओं में मोटापा बढ़ा रहा है। इसे ‘नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज’ (NCDs) जैसे मधुमेह और हृदय रोग का मुख्य कारण माना जाता है।
स्वास्थ्य एवं आर्थिक प्रभाव
मोटापा न केवल व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को कम करता है, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी आर्थिक बोझ डालता है। एक अस्वस्थ कार्यबल देश की उत्पादकता को घटाता है।
नीतिगत एवं व्यावहारिक प्रतिक्रिया
इस समस्या से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है –
- फ़ूड लेबलिंग – पैकेटबंद भोजन पर चेतावनी लेबल (Front-of-pack labelling) अनिवार्य करना ताकि उपभोक्ता सही चुनाव कर सकें।
- जागरूकता – स्कूलों और कॉलेजों में पोषण साक्षरता (Nutrition Literacy) को बढ़ावा देना।
- कराधान (Taxation) – हानिकारक खाद्य पदार्थों (जैसे सुगरी ड्रिंक्स) पर उच्च कर लगाना।
- शारीरिक गतिविधि – ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ को जमीनी स्तर पर और मजबूत करना।
UPSC मुख्य परीक्षा नोट्स
चुनौतियां (Challenges) –
- अपर्याप्त आहार विविधता – भारतीय आहार में प्रोटीन और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी।
- कार्यान्वयन में खामियां – दूरदराज के क्षेत्रों में आंगनवाड़ी सेवाओं की अनियमितता।
- जागरूकता का अभाव – विशेषकर स्तनपान और स्वच्छता को लेकर।
- डेटा की विश्वसनीयता – सही समय पर सटीक डेटा का अभाव।
समाधान (Solutions) –
- Bio-fortification – फसलों में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाना (जैसे आयरन युक्त बाजरा)।
- Convergence – विभिन्न मंत्रालयों (स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास) के बीच बेहतर समन्वय।
- Technology – पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल टूल्स का प्रभावी उपयोग।
- Social Audit – योजनाओं की निगरानी में समुदाय को शामिल करना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- पोषण माह – हर साल सितंबर महीने में मनाया जाता है।
- पोषण पखवाड़ा – हर साल मार्च महीने में मनाया जाता है।
- मिशन पोषण 2.0 – इसमें पूरक पोषण कार्यक्रम, पोषण अभियान और किशोरियों के लिए योजनाएं शामिल हैं।
- अनुच्छेद 47 – राज्य का कर्तव्य है कि वह पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करे।
- Stunting (नाटापन) – उम्र के हिसाब से कम कद।
- Wasting (दुबलापन) – कद के हिसाब से कम वजन।
- वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI) – भारत की स्थिति चिंताजनक है (रिपोर्ट के अनुसार रैंक याद रखें)।
UPSC मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन दृष्टिकोण
प्रश्न: “कुपोषण के दोहरे बोझ से आप क्या समझते हैं? भारत में बाल स्वास्थ्य पर इसके प्रभावों की चर्चा करते हुए सरकार द्वारा किए गए उपायों का विश्लेषण कीजिए।”
उत्तर संरचना (Value Added Points) –
- प्रस्तावना – कुपोषण के दोहरे बोझ (Double Burden) को परिभाषित करें (अल्पपोषण + मोटापा)।
- मुख्य भाग –
- आंकड़े प्रस्तुत करें (NFHS-5 डेटा)।
- शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास पर प्रभाव बताएं।
- सरकारी पहल – पोषण 2.0, एनीमिया मुक्त भारत, ईट राइट इंडिया मूवमेंट।
- आगे की राह – व्यवहार परिवर्तन (Behavioral Change) और पोषण साक्षरता पर जोर दें।
- निष्कर्ष – स्वस्थ भारत से ही ‘विकसित भारत 2047’ का सपना पूरा होगा।
पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)
- 2021 (Mains) – क्या भारत में ‘समेकित बाल विकास सेवा’ (ICDS) योजना का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है? चर्चा कीजिए।
- 2019 (Mains) – ‘पोषण अभियान’ के उद्देश्यों और उपलब्धियों का विस्तृत विवरण दीजिए।
UPSC प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न (MCQ)
प्रश्न 1 – मिशन पोषण 2.0 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें –
- इसका उद्देश्य कुपोषण की चुनौतियों का समाधान करना है।
- यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत आता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? (a) केवल 1 (b) केवल 2 (c) 1 और 2 दोनों (d) न तो 1 और न ही 2 उत्तर – (c)
प्रश्न 2 – ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ का मुख्य उद्देश्य क्या है? (a) आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का वेतन बढ़ाना (b) आंगनवाड़ी के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करना (c) केवल शहरी क्षेत्रों में केंद्र खोलना (d) उपरोक्त में से कोई नहीं उत्तर – (b)
प्रश्न 3 – भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल (ECCE) से संबंधित है? (a) अनुच्छेद 21A (b) अनुच्छेद 45 (c) अनुच्छेद 51A (d) अनुच्छेद 24 उत्तर – (b)
प्रश्न 4 – ‘एनीमिया मुक्त भारत’ रणनीति में ‘6x6x6’ का क्या अर्थ है? (a) 6 आयु वर्ग, 6 हस्तक्षेप, 6 संस्थागत तंत्र (b) 6 राज्य, 6 जिले, 6 गांव (c) 6 दवाएं, 6 डॉक्टर, 6 महीने (d) 6 टीके, 6 जांच, 6 पोषण आहार उत्तर – (a)
प्रश्न 5 – निम्नलिखित में से कौन सा ‘माइक्रोन्यूट्रिएंट’ (सूक्ष्म पोषक तत्व) नहीं है? (a) विटामिन ए (b) आयरन (c) आयोडीन (d) प्रोटीन उत्तर – (d) (प्रोटीन एक मैक्रोन्यूट्रिएंट है)
निष्कर्ष
भारत के भविष्य का पोषण एक सतत प्रक्रिया है जिसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और सामाजिक भागीदारी दोनों की आवश्यकता है। कुरुक्षेत्र (दिसंबर 2025) का यह अंक स्पष्ट करता है कि अब ध्यान केवल ‘खाद्य सुरक्षा’ (Food Security) पर नहीं, बल्कि ‘पोषण सुरक्षा’ (Nutrition Security) पर होना चाहिए।
तकनीक का उपयोग, पारंपरिक भोजन की वापसी और प्रारंभिक शिक्षा के साथ पोषण का एकीकरण ही वह मार्ग है जो भारत को एक स्वस्थ और समृद्ध राष्ट्र बनाएगा। UPSC अभ्यर्थियों को इन पहलों को न केवल परीक्षा के लिए, बल्कि एक प्रशासक के रूप में लागू करने के दृष्टिकोण से भी समझना चाहिए।
सामान्य प्रश्न (FAQs)
Q1. पोषण 2.0 क्या है? यह एक एकीकृत पोषण सहायता कार्यक्रम है, जिसमें पूरक पोषण कार्यक्रम और पोषण अभियान को मिला दिया गया है ताकि कुपोषण को प्रभावी ढंग से दूर किया जा सके।
Q2. पहले 1000 दिन क्यों महत्वपूर्ण हैं? गर्भधारण से लेकर बच्चे के दूसरे जन्मदिन तक की यह अवधि मस्तिष्क और शारीरिक विकास के लिए सबसे तेज और महत्वपूर्ण होती है।
Q3. भारत में स्टंटिंग (Stunting) का क्या अर्थ है? जब किसी बच्चे का कद उसकी उम्र के अनुपात में कम होता है, तो उसे स्टंटिंग कहते हैं। यह दीर्घकालिक कुपोषण का संकेत है।
Q4. मोटे अनाज (Millets) को पोषण में क्यों बढ़ावा दिया जा रहा है? मोटे अनाज (जैसे रागी, ज्वार, बाजरा) ग्लूटेन-फ्री होते हैं, इनमें फाइबर अधिक होता है और ये आयरन व कैल्शियम से भरपूर होते हैं, जो कुपोषण से लड़ने में मदद करते हैं।
Q5. आंगनवाड़ी सेवाओं के लाभार्थी कौन हैं? मुख्य रूप से 0-6 वर्ष के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और किशोरियां आंगनवाड़ी सेवाओं की लाभार्थी हैं।
