परिचय: प्रधानमंत्री की नियुक्ति – भारतीय राजनीति का ‘वास्तविक सूत्रधार’
UPSC Civil Services Examination की तैयारी कर रहे हर हिंदी माध्यम के विद्यार्थी के लिए ‘प्रधानमंत्री’ को समझना न सिर्फ ज़रूरी है, बल्कि इससे अनिवार्य रूप से परीक्षा में कई प्रश्न सीधे जुड़ते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में, जहाँ राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक (First Citizen) होते हैं, वहीं प्रधानमंत्री (Prime Minister) को ‘सरकार का मुखिया’ क्यों कहा जाता है?

असल में, भारत ने ब्रिटेन से संसदीय शासन प्रणाली (Parliamentary System of Government) अपनाई है। इस प्रणाली में राष्ट्रपति तो नाममात्र का कार्यकारी प्रमुख (De Jure Executive) होता है, लेकिन प्रधानमंत्री ही वास्तविक कार्यकारी प्रमुख (De Facto Executive) होता है। लोकप्रिय शब्दों में कहें तो, राष्ट्रपति देश का ‘प्रतीकात्मक मुखिया’ है और प्रधानमंत्री ‘असली शासक’।
क्या आप जानते हैं कि 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद, श्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया? ऐसे में इस पद की संवैधानिक स्थिति, शक्तियों और ज़िम्मेदारियों का विश्लेषण करना और भी ज़रूरी हो गया है। आइए, इस लेख में हम बिल्कुल आधार से शुरू करते हुए, प्रधानमंत्री के हर पहलू को UPSC के नज़रिए से विस्तार से समझेंगे।
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री पद की जड़ें औपनिवेशिक भारत और संविधान सभा की बहसों में छिपी हैं।
- ब्रिटिश विरासत (British Legacy): भारत में प्रधानमंत्री पद की अवधारणा ब्रिटेन के ‘कैबिनेट सिस्टम’ से आई है। ब्रिटेन में राजा/रानी (प्रतीकात्मक प्रमुख) होते हैं, लेकिन वास्तविक शक्तियाँ प्रधानमंत्री के पास होती हैं।
- प्रारंभिक शुरुआत (Initial Setup): 1946 में अंतरिम सरकार के गठन के साथ ही प्रधानमंत्री पद का उदय हुआ। जवाहरलाल नेहरू उस अंतरिम सरकार में कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष थे, लेकिन प्रभावी रूप से उनके पास ही प्रधानमंत्री की शक्तियाँ थीं। उनका राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व ही इस पद का असली आधार बना।
- संविधान सभा में बहस (Constituent Assembly Debates): संविधान सभा में प्रधानमंत्री की भूमिका पर गहन चर्चा हुई। सदस्यों ने तय किया कि भारत में भी ब्रिटिश मॉडल अपनाया जाए। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद की सलाह माननी चाहिए, ताकि सरकार की स्थिरता बनी रहे।
- महत्वपूर्ण सुझाव (Important Suggestions): कुछ सदस्यों ने राष्ट्रपति को अधिक शक्तियाँ देने की वकालत की (जैसे अमेरिकी मॉडल), लेकिन भारत की विविध परिस्थितियों और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए एक सशक्त कार्यपालिका (प्रधानमंत्री) को ज़रूरी माना गया।
2. संवैधानिक आधार (Constitutional Framework)
भारत में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद से जुड़े सभी प्रावधान संविधान के भाग-V (केंद्र) के अध्याय-1 (कार्यपालिका) में अनुच्छेद 74 से 78 के तहत दिए गए हैं।
यहाँ प्रमुख संवैधानिक अनुच्छेदों (Important Articles) की एक त्वरित तालिका (Table) देखें:
| अनुच्छेद (Article) | प्रावधान (Provision) | UPSC Relevance |
|---|---|---|
| अनुच्छेद 74 | मंत्रिपरिषद का राष्ट्रपति को सलाह देना | राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री संबंधों का आधार |
| अनुच्छेद 75 | प्रधानमंत्री की नियुक्ति, शपथ, पदावधि, वेतन | नियुक्ति की प्रक्रिया, बाध्यकारी सलाह |
| अनुच्छेद 77 | भारत सरकार के कार्यों का संचालन | प्रशासनिक अधिकार, व्यवसाय का वितरण |
| अनुच्छेद 78 | राष्ट्रपति को सूचना देने के प्रधानमंत्री के कर्तव्य | प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच संवाद |
3. प्रधानमंत्री की नियुक्ति
यह सबसे महत्वपूर्ण और परीक्षा की दृष्टि से सबसे अधिक प्रासंगिक विषय है।
(क) संवैधानिक प्रावधान
अनुच्छेद 75(1) के अनुसार, राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है। हालाँकि, यहाँ एक बारीकी है – संविधान में यह नहीं बताया गया कि राष्ट्रपति को ‘किसे’ नियुक्त करना है। यह प्रक्रिया पूरी तरह संसदीय परंपराओं और मानदंडों पर आधारित है।
(ख) नियुक्ति की प्रक्रिया
UPSC के दृष्टिकोण से यहाँ ‘परंपरा’ और ‘राष्ट्रपति का विवेक (President’s Discretion)’ को समझना सबसे ज़रूरी है।
अगर किसी एक दल को बहुमत मिल जाए (Single Party Majority):
जब कोई दल लोकसभा में 272 या उससे अधिक सीटें जीतता है, तो राष्ट्रपति के पास कोई विकल्प नहीं होता। वह लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता (Leader of the Majority Party) को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है।
अगर किसी एक दल को बहुमत न मिले (Hung Parliament या Coalition Government):
यहीं पर राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो राष्ट्रपति ‘विवेक’ का प्रयोग करता है। वह निम्नलिखित तरीकों से प्रधानमंत्री चुनता है:
- सबसे बड़े दल के नेता की नियुक्ति: राष्ट्रपति सबसे बड़े दल के नेता को सरकार बनाने का न्योता देता है।
- गठबंधन (Coalition) के नेता की नियुक्ति: यदि सबसे बड़े दल के पास पर्याप्त समर्थन न हो, लेकिन दो या दो से अधिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं, तो उस गठबंधन के नेता को नियुक्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, 1996 में एच.डी. देवगौड़ा (कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री) को संयुक्त मोर्चा के नेता के रूप में प्रधानमंत्री बनाया गया था।
प्रधानमंत्री की अप्रत्याशित मृत्यु (Unexpected Death):
यदि पद पर रहते हुए प्रधानमंत्री का निधन हो जाता है, और सत्तारूढ़ दल नया नेता चुन लेता है, तो राष्ट्रपति को विवेक का प्रयोग किए बिना उस नए नेता को ही प्रधानमंत्री नियुक्त करना होता है।
(ग) राष्ट्रपति के विवेक की सीमाएँ
क्या राष्ट्रपति किसी को भी प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकता है? नहीं! उसके पास असीमित विवेक नहीं है। उसे इस बात का प्रमाण देना होता है कि नियुक्त व्यक्ति लोकसभा का विश्वास हासिल कर सकता है।
4. शपथ, पदावधि और वेतन

शपथ (Oath):
प्रधानमंत्री अपने पद की शपथ राष्ट्रपति के समक्ष लेता है। यह शपथ संविधान की तीसरी अनुसूची (Third Schedule) में निर्धारित प्रारूप के अनुसार होती है। उन्हें दो शपथ लेनी होती हैं:
- पद की शपथ (Oath of Office): वह विधि के अनुसार देश की सेवा करेगा।
- गोपनीयता की शपथ (Oath of Secrecy): वह मंत्रिपरिषद में हुई चर्चाओं और निर्णयों को गुप्त रखेगा।
अनुच्छेद 75(4) के अनुसार, शपथ लिए बिना कोई मंत्री अपना पद ग्रहण नहीं कर सकता।
पदावधि (Term):
प्रधानमंत्री का कोई निश्चित कार्यकाल नहीं होता। उनका कार्यकाल राष्ट्रपति की ‘प्रसादपर्यंत’ (During the pleasure of the President) होता है (अनुच्छेद 75(2))। इसका मतलब यह नहीं कि राष्ट्रपति कभी भी उन्हें हटा सकता है; बल्कि, जब तक प्रधानमंत्री के पास लोकसभा का बहुमत और विश्वास है, तब तक वह पद पर बने रहते हैं। अगर लोकसभा में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पास हो जाता है, तो उन्हें पद छोड़ना होगा।
वेतन और भत्ते (Salary and Allowances):
प्रधानमंत्री का वेतन और भत्ते संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं (अनुच्छेद 75(6))। वर्तमान में, प्रधानमंत्री का वेतन ₹1.66 लाख प्रति माह है, लेकिन इसमें विभिन्न भत्ते जुड़ने के बाद यह राशि बढ़ जाती है। इसके अलावा, उन्हें आवास (7, लोक कल्याण मार्ग), यात्रा सुविधाएं, चिकित्सा सुविधाएं, और अन्य भत्ते भी मिलते हैं।
5. प्रधानमंत्री की शक्तियाँ एवं कार्य
प्रधानमंत्री की शक्तियाँ इतनी व्यापक हैं कि उन्हें ‘प्रधानमंत्रीशाही (Prime Ministerial Supremacy)’ या ‘प्रधान सचिव (Principal Secretary)’ का दर्जा हासिल है। आइए इन शक्तियों को विभिन्न श्रेणियों में समझते हैं।
तालिका: प्रधानमंत्री की शक्तियों का सरलीकृत विवरण
| शक्तियों का क्षेत्र (Area of Power) | मुख्य कार्य/प्रभाव (Main Functions/Impact) |
|---|---|
| प्रशासनिक शक्तियाँ | कैबिनेट की अध्यक्षता, विभागों का आवंटन, सिविल सेवकों के स्थानांतरण, नीतियों का अंतिम फैसला |
| विधायी शक्तियाँ | संसद सत्र बुलाने की सलाह, राज्यसभा और लोकसभा में सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ाना, अध्यादेशों की सिफारिश |
| वित्तीय शक्तियाँ | बजट प्रस्तुत करने से पहले उसे अंतिम रूप देना, योजना आयोग/नीति आयोग का अध्यक्ष, कर प्रस्तावों को मंजूरी देना |
| आपातकालीन शक्तियाँ | राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352), राज्य आपातकाल (अनुच्छेद 356), वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) लगाने की सिफारिश करना |
| अन्य (विदेश नीति, नियुक्तियाँ) | विदेश नीति का निर्धारण, महत्वपूर्ण पदों (CAG, UPSC सदस्य, चुनाव आयुक्त) पर नियुक्तियों की सिफारिश |
(i) प्रशासनिक शक्तियाँ
- मंत्रिपरिषद का निर्माण: प्रधानमंत्री बिना किसी की सलाह के, मनमाने ढंग से मंत्रियों का चयन नहीं कर सकता, लेकिन उसकी सलाह पर ही राष्ट्रपति दूसरे मंत्रियों की नियुक्ति करता है।
- विभागों का आवंटन (Allocation of Portfolios): वह तय करता है कि किस मंत्री को कौन सा विभाग मिलेगा। सबसे महत्वपूर्ण विभाग (जैसे – गृह, वित्त, रक्षा, विदेश) वह अपने पास रख सकता है या निकटतम सहयोगियों को देता है।
- समन्वय (Coordination): प्रशासन के विभिन्न अंगों (मंत्रालयों, विभागों) के बीच समन्वय बनाए रखना प्रधानमंत्री का दायित्व है।
- स्थानांतरण और नियंत्रण: वह सिविल सेवकों के स्थानांतरण और कार्य-प्रणाली को अंतिम रूप देता है।
(ii) विधायी शक्तियाँ
- संसद सत्र: वह राष्ट्रपति को संसद के सत्र बुलाने और स्थगित करने की सलाह देता है।
- सरकारी विधेयक: सरकार द्वारा लाए गए सभी विधेयक प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में ही तैयार किए जाते हैं।
- दल के नेता (Leader of the House): प्रधानमंत्री लोकसभा में सत्तारूढ़ दल के नेता होते हैं। वे संसद में पार्टी के एजेंडे को सफलतापूर्वक पारित कराने की रणनीति बनाते हैं।
(iii) वित्तीय शक्तियाँ
- बजट (Budget): केंद्रीय बजट वित्त मंत्री पेश करता है, लेकिन उसे प्रधानमंत्री की मंजूरी और कैबिनेट की स्वीकृति अनिवार्य होती है।
- नीति आयोग (NITI Aayog): योजना आयोग (अब नीति आयोग) का अध्यक्ष प्रधानमंत्री ही होता है। यह देश के आर्थिक विकास की दिशा तय करता है।
(iv) आपातकालीन शक्तियाँ
आपातकाल के समय प्रधानमंत्री की शक्तियाँ और भी बढ़ जाती हैं। वह राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352), राज्य आपातकाल (अनुच्छेद 356) या वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) लगाने की सिफारिश कर सकता है। 1975 में लगाए गए राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान प्रधानमंत्री की भूमिका इसका बड़ा उदाहरण है (हालाँकि यह अत्यधिक विवादास्पद था)।
6. प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच संबंध

यह विषय UPSC में बार-बार पूछा जाता है। अनुच्छेद 74, 75 और 78 मुख्य रूप से इसी संबंध को नियंत्रित करते हैं।
- सलाह का आधार (अनुच्छेद 74): राष्ट्रपति अपने कार्यों का निर्वहन मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही करेगा। प्रधानमंत्री उस सलाह को पहुँचाने का माध्यम होता है।
- बाध्यकारी प्रकृति (Binding Nature): यह सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी है, लेकिन इसमें एक ‘प्रोविज़ो’ (शर्त) जुड़ी है कि राष्ट्रपति इस सलाह पर पुनर्विचार (Reconsideration) करने के लिए कह सकते हैं। यदि मंत्रिपरिषद पुन: उसी सलाह पर अड़ी रहती है, तो राष्ट्रपति को मानना ही होगा।
- सूचना का अधिकार (अनुच्छेद 78): यह अनुच्छेद प्रधानमंत्री के कर्तव्य बताता है:
- वह राष्ट्रपति को संघ के शासन से जुड़े सभी निर्णयों और विधेयकों की जानकारी देंगे।
- वह राष्ट्रपति द्वारा माँगी गई जानकारी उपलब्ध कराएँगे।
- यदि किसी मामले पर मंत्री का निर्णय राष्ट्रपति के समक्ष नहीं रखा गया हो, तो प्रधानमंत्री उसे रखेंगे।
- ‘प्रसादपर्यंत’ (Pleasure of President): प्रधानमंत्री और मंत्री राष्ट्रपति की प्रसन्नता तक पद पर बने रहते हैं, लेकिन यह प्रसन्नता वास्तव में लोकसभा के विश्वास पर निर्भर करती है। इसलिए, राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को मनमाने ढंग से नहीं हटा सकता।
7. वे मुख्यमंत्री जो प्रधानमंत्री बने
यह विषय परीक्षा के साथ-साथ सामान्य जागरूकता (General Knowledge) के लिए भी महत्वपूर्ण है। अब तक 14 प्रधानमंत्री हुए हैं, जिनमें से 6 नेता पहले कभी न कभी मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।
| क्रम | प्रधानमंत्री का नाम | मुख्यमंत्री रह चुके राज्य | प्रधानमंत्री बनने का वर्ष | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| 1 | मोरारजी देसाई | बॉम्बे (वर्तमान गुजरात और महाराष्ट्र) | 1977 | पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री |
| 2 | चौधरी चरण सिंह | उत्तर प्रदेश | 1979 | किसान नेता, छोटा कार्यकाल |
| 3 | वी.पी. सिंह | उत्तर प्रदेश | 1989 | राजीव गांधी के खिलाफ बोफोर्स मुद्दा उठाया |
| 4 | पी.वी. नरसिम्हा राव | आंध्र प्रदेश | 1991 | आर्थिक सुधारों (LPG) के जनक |
| 5 | एच.डी. देवगौड़ा | कर्नाटक | 1996 | संयुक्त मोर्चा सरकार के नेता |
| 6 | नरेन्द्र मोदी | गुजरात | 2014, 2019, 2024 | लगातार तीन बार प्रधानमंत्री |
नोट: पंडित जवाहरलाल नेहरू (प्रथम प्रधानमंत्री), इंदिरा गांधी (प्रथम महिला प्रधानमंत्री), राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह आदि पहले मुख्यमंत्री नहीं रहे थे।
8. साम्यिक सरकार (Coalition Government) और प्रधानमंत्री
साम्यिक सरकार (Coalition Government) का मतलब है कि दो या दो से अधिक राजनीतिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं, क्योंकि किसी एक को पूर्ण बहुमत (272+) नहीं मिलता। 1990 के दशक के बाद से भारत में साम्यिक सरकारों का दौर शुरू हुआ।
- प्रधानमंत्री की चुनौतियाँ:
- आंतरिक तालमेल (Internal Coordination): गठबंधन में शामिल विभिन्न दलों के नेताओं को संतुष्ट रखना और उनके बीच समन्वय बनाए रखना मुश्किल होता है।
- अस्थिरता (Instability): कोई भी सहयोगी दल समर्थन वापस ले सकता है, जिससे सरकार गिर सकती है।
- सहमति से निर्णय (Consensus-based Decision): प्रधानमंत्री को अकेले निर्णय लेने की बजाय सभी सहयोगी दलों की सहमति लेनी होती है।
- प्रधानमंत्री की भूमिका:
- सेतु का काम (Role of a Bridge): प्रधानमंत्री विभिन्न दलों के बीच एक सेतु का काम करता है।
- राष्ट्रीय हित बनाम दलगत हित (National Interest vs Party Interest): उसे यह संतुलन बनाना होता है कि कहीं राष्ट्रीय हितों की कीमत पर दलगत स्वार्थ हावी न हो जाएं।
9. यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (UPSC Prelims) के लिए प्रमुख बिंदु
- नियुक्ति: प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है (अनुच्छेद 75)।
- कार्यकाल: राष्ट्रपति के ‘प्रसादपर्यंत’ (लेकिन वास्तव में 5 वर्ष का लोकसभा कार्यकाल)।
- योग्यता: भारतीय नागरिक होना, लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य होना (यदि 6 माह के अंदर न हुआ तो पद खत्म हो जाता है)।
- शपथ: राष्ट्रपति के सामने, तीसरी अनुसूची के अनुसार।
- सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(3)): मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
- वैयक्तिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75(2)): मंत्री वैयक्तिक रूप से राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
- 91वां संशोधन अधिनियम (91st Amendment Act, 2003): मंत्रियों की संख्या लोकसभा की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती।
- राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच संबंध: अनुच्छेद 74, 75, और 78।
10. यूपीएससी मुख्य परीक्षा (UPSC Mains) के लिए विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
GS पेपर II (राजव्यवस्था, शासन, संघवाद) में प्रासंगिकता:
- संसदीय बनाम अध्यक्षीय प्रणाली: ‘प्रधानमंत्री को अधिक शक्तियाँ देने के पक्ष और विपक्ष में तर्क’।
- प्रशासनिक सुधार: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की बढ़ती भूमिका – क्या PMO मंत्रालयों के अधिकारों का हनन कर रहा है?
- संघवाद (Federalism): प्रधानमंत्री की भूमिका केंद्र-राज्य संबंधों में। उदाहरण – GST परिषद (प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नहीं, लेकिन उनकी भागीदारी)।
- नैतिकता (Ethics – GS-IV): शक्ति के केन्द्रीकरण से उत्पन्न होने वाले नैतिक दुविधाएँ (Ethical Dilemmas)। जैसे – ‘मंत्रियों के पद पर बने रहने में योग्यता की उपेक्षा कर दल की राजनीति को प्राथमिकता देना’।
Mains के लिए Model Answer Structure (10 Marks – 150 words):
प्रश्न: “प्रधानमंत्री भारतीय संसदीय प्रणाली के ‘सूर्य’ के समान है, जबकि मंत्री ग्रह हैं।” विवेचना कीजिए।
उत्तर:
- भूमिका: भारतीय संविधान में संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई, जहाँ राष्ट्रपति नाममात्र तथा प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यकारी प्रमुख है।
- मुख्य भाग: (1) प्रधानमंत्री की नियुक्ति में निर्णायक भूमिका, (2) कैबिनेट की अध्यक्षता, विभागों का आवंटन, (3) विधेयकों और नीतियों का अंतिम निर्धारण, (4) राष्ट्रपति को सलाह देना, (5) 91वें संशोधन के बाद भी उसकी स्थिति ‘प्रथम समानों में प्रथम’ (Primus inter pares) बनी हुई है।
- निष्कर्ष: हालाँकि, साम्यिक सरकारों के युग में प्रधानमंत्री को ‘सहमति से शासन’ करना पड़ता है, फिर भी भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री का स्थान केंद्रीय बना हुआ है।
11. पिछले वर्षों के प्रश्न (Previous Year Questions – PYQs)
- प्रश्न: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की बढ़ती भूमिका ने मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी को किस प्रकार प्रभावित किया है? (UPSC Mains 2018)
- प्रश्न: राष्ट्रपति की नियुक्ति शक्तियों और प्रधानमंत्री की सलाह के बीच संबंधों पर चर्चा करें। (UPSC Mains 2015)
- प्रश्न: क्या राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह को अस्वीकार कर सकता है? संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (UPSC Mains 2013)
- प्रिलिम्स ट्रैप: “प्रधानमंत्री का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।” – गलत। उनका कोई निश्चित कार्यकाल नहीं है, वे तब तक रहते हैं जब तक लोकसभा में बहुमत है।
12. साक्षात्कार (Interview) के लिए दृष्टिकोण
- प्रश्न: “प्रधानमंत्री को क्या अधिक शक्तियाँ मिलनी चाहिए या कम?”
- संतुलित उत्तर: भारत जैसे बड़े और विविध देश में प्रधानमंत्री के पास सशक्त होना आवश्यक है, लेकिन साम्यिक सरकारों में सहमति आवश्यक है। अति सशक्त प्रधानमंत्री लोकतंत्र के लिए चुनौती बन सकता है (जैसे- आपातकाल 1975)।
- प्रश्न: “क्या आपको लगता है कि PMO मंत्रालयों से अधिक शक्तिशाली हो गया है?”
- उत्तर: PMO समन्वय के लिए है, लेकिन हाँ, हाल के वर्षों में PMO की भूमिका काफी बढ़ी है। यह तब तक ठीक है जब तक यह मंत्रालयों की संवैधानिक स्वायत्तता का उल्लंघन न करे।
13. स्मार्ट रिवीजन टिप्स
- मेमोरी ट्रिक: ‘75-तो-78’ को याद रखें:
- 75 = नियुक्ति + शपथ + वेतन
- 74 = सलाह (राष्ट्रपति को)
- 78 = सूचना (प्रधानमंत्री देगा राष्ट्रपति को)
- 77 = कार्यों का संचालन
- एक नज़र में प्रधानमंत्री:
- वास्तविक कार्यकारी प्रमुख (De Facto Executive)
- कैबिनेट की अध्यक्षता करता है
- लोकसभा का नेता (Leader of the House)
- राष्ट्रपति का मुख्य सलाहकार
- विभिन्न पदों पर नियुक्तियों का प्रस्तावक (CAG, UPSC, CEC)
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री का पद संवैधानिक व्यवस्था और प्रशासनिक संरचना का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। UPSC की तैयारी करते समय, इस विषय को न सिर्फ रटना है, बल्कि वास्तविक जीवन के उदाहरणों (जैसे कि वर्तमान आर्थिक नीतियाँ, विदेश यात्राएँ, PMO के फैसले) से जोड़कर समझना है। यह लेख एक गहन मार्गदर्शक है, लेकिन एम. लक्ष्मीकांत (M. Laxmikanth) की ‘भारत की राजव्यवस्था’ और संविधान के मूल अध्ययन से इसे क्रॉस-चेक ज़रूर करें। सफलता आपकी मेहनत और निरंतरता पर निर्भर करती है। संविधान की रक्षा करें और अपने लक्ष्य को प्राप्त करें।
FAQS
भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है?
भारत के प्रधानमंत्री की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। सामान्यतः लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है।
वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री कौन हैं?
वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi हैं।
प्रधानमंत्री बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए?
प्रधानमंत्री बनने के लिए व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना तथा संसद के किसी सदन का सदस्य होना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री का कार्यकाल कितना होता है?
प्रधानमंत्री का निश्चित कार्यकाल नहीं होता। वे लोकसभा में बहुमत रहने तक पद पर बने रहते हैं।
भारत के प्रधानमंत्री को शपथ कौन दिलाता है?
भारत के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं।
प्रधानमंत्री का वेतन कितना होता है?
भारत के प्रधानमंत्री को वेतन एवं अन्य भत्ते मिलाकर लगभग ₹2 लाख प्रति माह से अधिक सुविधाएँ प्राप्त होती हैं।
भारत के प्रधानमंत्री की शक्तियाँ क्या हैं?
प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते हैं, नीतियाँ बनाते हैं, राष्ट्रपति को सलाह देते हैं तथा देश की कार्यपालिका का संचालन करते हैं।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच क्या संबंध होता है?
राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं जबकि प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख होते हैं। राष्ट्रपति सामान्यतः प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं।
भारत के पहले प्रधानमंत्री कौन थे?
भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru थे।
भारत के प्रधानमंत्री का उल्लेख संविधान के किस अनुच्छेद में है?
भारत के प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद से संबंधित प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 74 और 75 में दिए गए हैं।
