
परिचय: संसद (Sansad) क्या है और UPSC में क्यों है सबसे महत्वपूर्ण
प्रिय UPSC aspirants,
भारतीय लोकतंत्र का केंद्र बिंदु है संसद (Sansad)। जब भी हम संविधान, शासन व्यवस्था या लोकतंत्र की बात करते हैं तो संसद का नाम सबसे पहले आता है। यह वह स्थान है जहाँ देश के भविष्य के निर्णय लिए जाते हैं, कानून बनते हैं और सरकार जवाबदेह होती है।
UPSC Civil Services Examination के तीनों चरणों में संसद से जुड़े प्रश्न न केवल पूछे जाते हैं बल्कि यह विषय आपकी बेसिक समझ का आधार भी है। Prelims में तथ्यात्मक प्रश्न, Mains में विश्लेषणात्मक निबंध और Interview में संसदीय प्रक्रियाओं पर राय – हर जगह संसद की उपस्थिति अनिवार्य है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भी संसद चर्चा में है। हाल के संसद सत्रों में नए विधेयक पारित हुए, नए संसद भवन का उद्घाटन हुआ, और संसदीय कार्यप्रणाली में सुधार के प्रयास हुए। आइए इस महत्वपूर्ण विषय को गहराई से समझें।
संसद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
प्राचीन एवं मध्यकालीन परंपराएँ
भारत में विचार-विमर्श की परंपरा प्राचीन काल से रही है। बौद्ध काल के संघों में निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते थे। मौर्य काल में मंत्रिपरिषद और सभा-समितियाँ थीं। हालाँकि, आधुनिक संसद की अवधारणा ब्रिटिश शासन के दौरान विकसित हुई।
ब्रिटिश काल में विधायिका का विकास
वर्ष 1861 के भारतीय परिषद अधिनियम ने पहली बार विधायी परिषदों की स्थापना की। वर्ष 1892 के अधिनियम ने बजट पर चर्चा की अनुमति दी। वर्ष 1909 के मिंटो-मार्ले सुधारों ने विधायी परिषदों का विस्तार किया। वर्ष 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने द्विसदनवाद की शुरुआत की। वर्ष 1935 के भारत शासन अधिनियम ने संघीय विधायिका का प्रावधान किया।
संविधान सभा का योगदान
भारत की संविधान सभा ने स्वतंत्रता के बाद संसदीय प्रणाली को अपनाया। संविधान सभा के सदस्यों ने ब्रिटेन की संसद प्रणाली, अमेरिकी कांग्रेस और कनाडा के मॉडल का अध्ययन किया। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने स्पष्ट किया कि भारत की परिस्थितियों के लिए संसदीय प्रणाली सबसे उपयुक्त है।
संविधान लागू होने के बाद का सफर
26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही संसद अस्तित्व में आया। तब से लेकर अब तक संसद ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। आपातकाल, संशोधन, विघटन, और सुधार – संसद की यात्रा भारतीय लोकतंत्र की यात्रा है।
संसद का संवैधानिक आधार
अनुच्छेद 79: संसद (Sansad) की संरचना
अनुच्छेद 79 के अनुसार संघ की संसद में राष्ट्रपति और दो सदन होंगे – राज्यों की परिषद (राज्यसभा) और लोक सभा। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग हैं।
अनुच्छेद 80: राज्यसभा की संरचना
राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं। इनमें से 238 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होते हैं, और 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान रखने वालों में से मनोनीत किए जाते हैं।
अनुच्छेद 81: लोकसभा की संरचना
लोकसभा में अधिकतम 552 सदस्य हो सकते हैं। इनमें से 530 सदस्य राज्यों के प्रतिनिधि होते हैं, 20 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों से होते हैं।
अनुच्छेद 83 से 85: सत्र और विघटन
ये अनुच्छेद संसद के सत्र, स्थगन और विघटन से संबंधित हैं। राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों को बुलाते हैं, स्थगित करते हैं या लोकसभा को भंग करते हैं। दो सत्रों के बीच छह माह से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।
अनुच्छेद 105: संसद की शक्तियाँ और विशेषाधिकार
यह सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद है जो संसद और उसके सदस्यों को भाषण की स्वतंत्रता और विशेषाधिकार प्रदान करता है। संसद में कही गई बातों के लिए किसी सदस्य पर कोई न्यायिक कार्यवाही नहीं हो सकती।
अनुच्छेद 107 से 111: विधायी प्रक्रिया
ये अनुच्छेद विधेयक पारित करने की प्रक्रिया, दोनों सदनों के बीच विवाद के समाधान और राष्ट्रपति की स्वीकृति से संबंधित हैं।
सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय
वर्ष 1995 के पी.वी. नरसिम्हा राव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद के विशेषाधिकार संविधान के अधीन हैं। वर्ष 2007 के राज्यसभा अध्यक्ष मामले में न्यायालय ने सदन के नियमों की व्याख्या का अधिकार सदन को ही दिया।
संसद के दो सदन: लोकसभा और राज्यसभा
लोकसभा (लोगों का सदन)
लोकसभा संसद का निचला सदन है जो सीधे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों से बनता है। इसका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, लेकिन राष्ट्रपति इसे समय से पहले भी भंग कर सकते हैं। लोकसभा के अध्यक्ष को स्पीकर कहा जाता है।
लोकसभा की मुख्य विशेषताएँ:
पहली विशेषता – यह सीधे जनता के मतदान से चुनी जाती है। इसलिए यह जनता की तात्कालिक भावनाओं और आवश्यकताओं का प्रतिनिधित्व करती है।
दूसरी विशेषता – यह धन विधेयकों के मामले में राज्यसभा से अधिक शक्तिशाली है। धन विधेयक केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
तीसरी विशेषता – मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में ही लाया जा सकता है।
चौथी विशेषता – लोकसभा में सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 है। वर्तमान में 545 सदस्य हैं।
राज्यसभा (राज्यों का सदन)

राज्यसभा संसद का उच्च सदन है जो राज्यों के प्रतिनिधियों से बनता है। यह एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता। इसके एक तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त हो जाते हैं। राज्यसभा के अध्यक्ष को सभापति कहा जाता है (उपराष्ट्रपति इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं)।
राज्यसभा की मुख्य विशेषताएँ:
पहली विशेषता – राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। राज्यों की विधानसभाओं के सदस्य अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा उनका चुनाव करते हैं।
दूसरी विशेषता – यह राज्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करती है और संघीय संतुलन बनाए रखने में सहायक है।
तीसरी विशेषता – राज्यसभा के पास विशेष शक्तियाँ हैं जैसे कि अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना के लिए प्रस्ताव पारित करना।
चौथी विशेषता – राज्यसभा को विधायी क्षेत्र में लोकसभा के समान अधिकार हैं, सिवाय धन विधेयक के।
लोकसभा और राज्यसभा के बीच अंतर की तुलना तालिका
| मानदंड | लोकसभा | राज्यसभा |
|---|---|---|
| चुनाव का तरीका | प्रत्यक्ष चुनाव | अप्रत्यक्ष चुनाव |
| कार्यकाल | 5 वर्ष (भंग हो सकती है) | स्थायी (एक तिहाई सदस्य 2 वर्ष बाद सेवानिवृत्त) |
| अध्यक्ष | स्पीकर | सभापति (उपराष्ट्रपति) |
| आयु सीमा | 25 वर्ष | 30 वर्ष |
| अधिकतम सदस्य संख्या | 552 | 250 |
| धन विधेयक | केवल यहीं पेश और पारित हो सकता है | केवल सिफारिशें कर सकती है |
| अविश्वास प्रस्ताव | केवल यहीं लाया जा सकता है | अविश्वास प्रस्ताव का कोई प्रावधान नहीं |
| वास्तविक शक्ति | अधिक (जनता का प्रतिनिधित्व) | कम (निरंतरता और विशेषज्ञता) |
संसद के प्रमुख कार्य
विधायी कार्य
संसद का सबसे महत्वपूर्ण कार्य कानून बनाना है। संघ सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर संसद कानून बना सकती है। राज्य सूची के विषयों पर भी कुछ विशेष परिस्थितियों में संसद कानून बना सकती है।
विधेयक संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, सिवाय धन विधेयक के जो केवल लोकसभा में पेश होता है। विधेयक को कानून बनने के लिए दोनों सदनों की स्वीकृति और राष्ट्रपति की सहमति आवश्यक है।
कार्यकारी कार्य
संसद कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। संसद के सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछ सकते हैं, अनुपूरक प्रश्न पूछ सकते हैं, अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं, और नियोजन प्रस्ताव पारित कर सकते हैं।
वित्तीय कार्य
संसद के पास सबसे महत्वपूर्ण शक्ति कोष पर नियंत्रण है। कोई भी कर तभी लगाया जा सकता है जब संसद द्वारा कानून बनाया जाए। बजट संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक को संसद की स्वीकृति आवश्यक है।
संविधान संशोधन की शक्ति
संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार है। अनुच्छेद 368 के तहत संसद किसी भी प्रावधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन बुनियादी ढाँचे में संशोधन नहीं कर सकती (जैसा कि केशवानंद भारती मामले में कहा गया)।
न्यायिक कार्य
संसद के पास कुछ न्यायिक कार्य भी हैं। यह राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के महाभियोग की कार्यवाही कर सकती है। यह सदस्यों को अपदस्थ कर सकती है। यह सदन के विशेषाधिकार के हनन पर कार्यवाही कर सकती है। यह उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की सिफारिश कर सकती है।
निर्वाचन कार्य
संसद राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेती है। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के सदस्य करते हैं। राज्यसभा और लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव भी संसद के सदस्य करते हैं।
संसद में विधेयक पारित करने की प्रक्रिया
साधारण विधेयक की प्रक्रिया
किसी साधारण विधेयक को कानून बनने के लिए निम्नलिखित चरणों से गुजरना पड़ता है।
प्रथम चरण – विधेयक का प्रथम वाचन। इसमें विधेयक का शीर्षक और उद्देश्य पढ़ा जाता है। कोई चर्चा नहीं होती।
द्वितीय चरण – विधेयक का द्वितीय वाचन। इसमें विधेयक के सिद्धांतों पर सामान्य चर्चा होती है। फिर विधेयक को किसी प्रवर समिति के पास भेजा जा सकता है या सीधे विचार के लिए लिया जा सकता है।
तृतीय चरण – विधेयक का तृतीय वाचन। इसमें विधेयक के प्रत्येक अनुच्छेद पर मतदान होता है। बहुमत से पारित होने के बाद विधेयक दूसरे सदन में भेजा जाता है।
चतुर्थ चरण – दूसरे सदन में यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। यदि दूसरा सदन विधेयक को अस्वीकार करता है या संशोधन करता है तो संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है।
पंचम चरण – राष्ट्रपति की स्वीकृति। विधेयक दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के पास जाता है। राष्ट्रपति अपनी स्वीकृति देते हैं या पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकते हैं।
धन विधेयक की विशेष प्रक्रिया
धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है और केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से। लोकसभा में पारित होने के बाद यह राज्यसभा को सिफारिशों के लिए भेजा जाता है। राज्यसभा के पास इसे 14 दिनों के भीतर लौटाने का समय होता है। यदि राज्यसभा 14 दिनों में कोई सिफारिश नहीं करती तो विधेयक पारित माना जाता है। लोकसभा राज्यसभा की सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
वित्त विधेयक
यह धन विधेयक से भिन्न है। इसमें राज्यसभा के पास अधिक अधिकार हैं। इसे दोनों सदनों में पारित होना आवश्यक है।
संसद के सत्र और उनकी प्रक्रियाएँ
संसद के तीन सत्र
भारत की संसद वर्ष में तीन सत्र बुलाई जाती है। बजट सत्र जनवरी-फरवरी से मई तक चलता है। मानसून सत्र जुलाई-अगस्त से सितंबर तक चलता है। शीतकालीन सत्र नवंबर से दिसंबर तक चलता है।
प्रश्न काल
प्रश्न काल प्रत्येक सत्र की शुरुआत में होता है। इस दौरान सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछ सकते हैं। प्रश्न तीन प्रकार के होते हैं – तारांकित प्रश्न (मौखिक उत्तर), अतारांकित प्रश्न (लिखित उत्तर), और अनुपूरक प्रश्न।
शून्य काल
प्रश्न काल के बाद शून्य काल आता है। इसमें सदस्य बिना पूर्व सूचना के तत्काल सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठा सकते हैं।
स्थगन प्रस्ताव
यह एक आपातकालीन प्रक्रिया है। सदस्य स्थगन प्रस्ताव लाकर साधारण कार्य को स्थगित कर सकते हैं और किसी गंभीर मुद्दे पर चर्चा कर सकते हैं।
अविश्वास प्रस्ताव
अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में लाया जा सकता है। यदि यह पारित हो जाता है तो मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।
संसद की समितियाँ
स्थायी समितियाँ
संसद की स्थायी समितियाँ दो प्रकार की होती हैं। वित्तीय समितियाँ – लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति। विभागीय संबंधी समितियाँ – 24 ऐसी समितियाँ हैं जो विभिन्न मंत्रालयों के कार्यों की जाँच करती हैं।
प्रवर समितियाँ
ये समितियाँ किसी विशेष विधेयक की विस्तृत जाँच के लिए अस्थायी रूप से बनाई जाती हैं। विधेयक पारित होने के बाद ये समाप्त हो जाती हैं।
अन्य विशेष समितियाँ
इनमें नियम समिति, विशेषाधिकार समिति, याचिका समिति, संसदीय भाषा समिति, और रेल समिति शामिल हैं।
संसद के विशेषाधिकार
संसद के विशेषाधिकार संसद के सदस्यों और उसकी समितियों को दिए गए विशेष अधिकार हैं। ये सुनिश्चित करते हैं कि संसद बिना किसी बाधा के अपने कार्य कर सके।
मुख्य विशेषाधिकार हैं – संसद में बोलने की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 105), प्रकाशन की स्वतंत्रता, गिरफ्तारी से छूट (कुछ परिस्थितियों में), सदन के भीतर अवमानना पर कार्यवाही का अधिकार, और अपने सदस्यों के अपदस्थीकरण का अधिकार।
संसद और कार्यपालिका के बीच संबंध
भारत में संसदीय प्रणाली है जहाँ कार्यपालिका विधायिका का अंग है। मंत्रिपरिषद संसद के प्रति उत्तरदायी है। मंत्री उस सदन के सदस्य होते हैं जिसके वे सदस्य हैं।
संसद कार्यपालिका को नियंत्रित करती है। वह अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है, अनुपूरक प्रश्न पूछ सकती है, स्थगन प्रस्ताव ला सकती है, और नियोजन प्रस्ताव पारित कर सकती है।
संसद में हालिया सुधार और चुनौतियाँ
हालिया सुधार
नए संसद भवन का निर्माण 2023 में हुआ। डिजिटल संसद की ओर कदम बढ़ाए गए हैं। संसदीय समितियों को मजबूत किया गया है। शून्य काल के समय में वृद्धि की गई है।
मौजूदा चुनौतियाँ
संसद के सामने कई चुनौतियाँ हैं। बार-बार सत्रों में व्यवधान और सदन का स्थगन एक गंभीर समस्या है। संसदीय दक्षता में गिरावट चिंता का विषय है। सदस्यों की उपस्थिति कम हो रही है। निर्णय प्रक्रिया में देरी होती है। विपक्ष की भूमिका कमजोर होती जा रही है। महिला आरक्षण विधेयक लंबित है।
सुझाव और सुधार के उपाय
द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने कई सुझाव दिए हैं। संसद का कार्यकाल बढ़ाना, सत्रों की संख्या बढ़ाना, प्रश्न काल का विस्तार करना, समितियों को अधिक शक्ति देना, और सदस्यों के लिए अनिवार्य उपस्थिति का प्रावधान करना।
UPSC Prelims के लिए संसद पर महत्वपूर्ण तथ्य
तथ्यात्मक बिंदु
एक – संसद का संवैधानिक प्रावधान भाग पांच अध्याय दो में अनुच्छेद 79 से 122 तक है।
दो – संसद का अंग राष्ट्रपति भी है, न कि केवल दो सदन।
तीन – लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 है, राज्यसभा की 250 है।
चार – राज्यसभा के 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं।
पाँच – लोकसभा के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष, राज्यसभा के लिए 30 वर्ष है।
छः – धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश होता है और इसकी परिभाषा अनुच्छेद 110 में है।
सात – संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
आठ – राष्ट्रपति पहले धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए नहीं भेज सकते।
Prelims में ट्रैप प्रश्न
अक्सर परीक्षा में यह प्रश्न पूछा जाता है कि संसद के किस सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। उत्तर केवल लोकसभा।
एक और ट्रैप – क्या राज्यसभा के मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग ले सकते हैं? उत्तर हाँ, वे भाग ले सकते हैं। क्या वे उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग ले सकते हैं? उत्तर हाँ।
एक और ट्रैप – क्या संसद का कोई सदस्य अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अनुपस्थित रह सकता है? यह अनुशासनिक कार्यवाही का विषय है।
पिछले वर्षों के रुझान
पिछले दस वर्षों में संसद से Prelims में 8 प्रश्न पूछे गए हैं। सबसे अधिक पूछे जाने वाले विषय हैं – धन विधेयक, संयुक्त बैठक, राज्यसभा की विशेष शक्तियाँ, और संसदीय विशेषाधिकार।
UPSC Mains के लिए संसद का विश्लेषण
GS पेपर दो से संबंध
संसद GS पेपर दो का सबसे महत्वपूर्ण विषय है। संसदीय प्रणाली, विधायिका के कार्य, कार्यपालिका पर नियंत्रण, संसदीय समितियाँ, और संसदीय सुधार जैसे विषय आते हैं।
विश्लेषणात्मक प्रश्नों के लिए दृष्टिकोण
मान लीजिए प्रश्न है – भारतीय संसद की दक्षता और प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर दृष्टिकोण: परिचय में संसद की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करें। फिर संसद के सकारात्मक पक्ष लिखें – कानून निर्माण, सरकार पर नियंत्रण, बजटीय नियंत्रण। फिर कमजोरियाँ लिखें – व्यवधान, सदस्यों की अनुपस्थिति, दक्षता में कमी। फिर सुझाव दें। निष्कर्ष में सुधार की आवश्यकता बताएँ।
पिछले वर्षों के Mains प्रश्न
वर्ष 2018 में प्रश्न आया – संसद की कार्यप्रणाली में सुधार हेतु सुझाव दीजिए।
वर्ष 2019 में प्रश्न आया – क्या संसद ने कार्यपालिका पर नियंत्रण का अपना संवैधानिक दायित्व पूरा किया है? विवेचना कीजिए।
वर्ष 2020 में प्रश्न आया – राज्यसभा की उपयोगिता पर चर्चा कीजिए।
वर्ष 2022 में प्रश्न आया – संसद की विधायी दक्षता को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर लेखन कौशल: संसद पर मॉडल उत्तर
150 शब्दों का मॉडल उत्तर
प्रश्न: संसद की संरचना और उसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संसद भारत की सर्वोच्च विधायी संस्था है। अनुच्छेद 79 के अनुसार संसद में राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा शामिल हैं।
लोकसभा निचला सदन है जिसके सदस्य सीधे जनता द्वारा पाँच वर्ष के लिए चुने जाते हैं। इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 552 है। राज्यसभा उच्च सदन है जो स्थायी है और इसके सदस्य राज्य विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं।
संसद के प्रमुख कार्यों में कानून निर्माण, बजट पारित करना, कार्यपालिका पर नियंत्रण, संविधान संशोधन और न्यायिक कार्य शामिल हैं। लोकसभा धन विधेयक और अविश्वास प्रस्ताव के मामले में अधिक शक्तिशाली है, जबकि राज्यसभा संघीय संतुलन बनाए रखती है।
250 शब्दों का मॉडल उत्तर
प्रश्न: क्या भारतीय संसद ने अपनी संवैधानिक भूमिका का सही निर्वहन किया है? विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संसद को संविधान द्वारा विधायी, कार्यकारी, वित्तीय और न्यायिक कार्य सौंपे गए हैं। यह प्रश्न कि क्या संसद ने इन भूमिकाओं का सही निर्वहन किया है, संतुलित विश्लेषण की माँग करता है।
सकारात्मक पक्ष में, संसद ने सात दशकों में सैकड़ों महत्वपूर्ण कानून बनाए हैं। उसने कार्यपालिका को नियंत्रित करने के लिए प्रश्न काल, शून्य काल और समितियों जैसी प्रभावी व्यवस्थाएँ विकसित की हैं। बजटीय प्रक्रिया में संसद की भूमिका सराहनीय रही है। संविधान के 100 से अधिक संशोधन संसद द्वारा ही किए गए हैं।
तथापि, नकारात्मक पक्ष भी कम नहीं हैं। बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता के कारण सत्र बार-बार स्थगित होते हैं। सदन में सार्थक चर्चा की जगह हंगामे ने ले ली है। सदस्यों की उपस्थिति चिंताजनक रूप से कम है। संसदीय समितियों की दक्षता में गिरावट आई है। धन विधेयक के माध्यम से कार्यपालिका विधायिका के अधिकारों का हनन कर रही है।
निष्कर्षतः संसद ने कई क्षेत्रों में सफलता पाई है लेकिन वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए संसदीय सुधारों की तत्काल आवश्यकता है। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों को लागू करना आवश्यक है।
उत्तर लेखन में चित्र और आरेख का सुझाव
संसद की संरचना का एक सरल चित्र बना सकते हैं जिसमें शीर्ष पर राष्ट्रपति, फिर दो स्तंभों में लोकसभा और राज्यसभा, और नीचे उनके कार्य। दूसरा आरेख विधेयक पारित करने की प्रक्रिया का चक्र हो सकता है।
संसद का अन्य विषयों से अंतर्संबंध
इतिहास से संबंध
ब्रिटिश संसदीय प्रणाली का प्रभाव। संविधान सभा की बहसें। संसदीय परंपराओं का विकास।
अर्थशास्त्र से संबंध
बजट संसद में पारित होता है। वित्त विधेयक और विनियोग विधेयक संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। राजकोषीय नीति संसदीय नियंत्रण में होती है।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों से संबंध
अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों को संसद की स्वीकृति आवश्यक है। संसदीय प्रतिनिधिमंडल विदेश यात्राएँ करते हैं। संसद विदेश नीति की समीक्षा करती है।
नैतिकता से संबंध
सांसदों का नैतिक आचरण। हितों के टकराव की स्थिति। संसदीय विशेषाधिकारों का दुरुपयोग। निर्वाचित प्रतिनिधियों की नैतिक जिम्मेदारी।
UPSC aspirants द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ
अवधारणात्मक गलतियाँ
कई छात्र यह मान लेते हैं कि संसद में केवल लोकसभा और राज्यसभा होती है, जबकि राष्ट्रपति भी संसद का अंग है। दूसरी गलती यह है कि वे धन विधेयक और वित्त विधेयक को एक मान लेते हैं।
उत्तर लेखन की गलतियाँ
Mains में उत्तर लिखते समय छात्र केवल परिभाषा और सूची लिखकर रुक जाते हैं। वे विश्लेषणात्मक भाग नहीं लिखते। वे वर्तमान उदाहरण नहीं देते।
Prelims में गलतियाँ
Prelims के प्रश्नों में छात्र अक्सर आयु सीमा, सदस्य संख्या और विशेष शक्तियों को मिला देते हैं। इसलिए इन तथ्यों को बार-बार दोहराना चाहिए।
त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स
एक पृष्ठ में संपूर्ण संसद संशोधन के लिए निम्नलिखित बिंदु पर्याप्त हैं।
संसद की परिभाषा: राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा
अनुच्छेद: 79 से 122 तक
लोकसभा: प्रत्यक्ष चुनाव, अधिकतम 552 सदस्य, 5 वर्ष, 25 वर्ष आयु
राज्यसभा: अप्रत्यक्ष चुनाव, अधिकतम 250 सदस्य (12 मनोनीत), स्थायी, 30 वर्ष आयु
लोकसभा अध्यक्ष: स्पीकर
राज्यसभा अध्यक्ष: सभापति (उपराष्ट्रपति)
धन विधेयक: केवल लोकसभा, अनुच्छेद 110, 14 दिन राज्यसभा
अविश्वास प्रस्ताव: केवल लोकसभा
संयुक्त बैठक: अनुच्छेद 108, अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष
विशेषाधिकार: अनुच्छेद 105
प्रश्न काल: प्रत्येक सत्र की शुरुआत
स्थायी समितियाँ: लोक लेखा, प्राक्कलन, सार्वजनिक उपक्रम
महत्वपूर्ण तथ्य: राष्ट्रपति धन विधेयक को पुनर्विचार नहीं भेज सकते
याद रखने की ट्रिक
लोकसभा के लिए – लोग, प्रत्यक्ष, पाँच वर्ष, पच्चीस वर्ष, पाच सौ बावन
राज्यसभा के लिए – राज्य, अप्रत्यक्ष, स्थायी, तीस वर्ष, ढाई सौ
साक्षात्कार परिप्रेक्ष्य: संसद से जुड़े संभावित प्रश्न
प्रश्न: आपकी राय में भारतीय संसद की सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?
उत्तर की दिशा: ताकत – लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व, विविधता, जनता से सीधा जुड़ाव। कमजोरी – बार-बार सत्रों में व्यवधान, दक्षता में कमी।
प्रश्न: यदि आप सांसद होते तो संसद की कार्यप्रणाली में क्या बदलाव लाते?
उत्तर की दिशा: प्रश्न काल को और प्रभावी बनाना, सदस्यों के लिए उपस्थिति अनिवार्य करना, समितियों को अधिक शक्ति देना, महिला आरक्षण लागू करना।
प्रश्न: क्या आप मानते हैं कि नई संसद का निर्माण भारतीय लोकतंत्र के लिए एक मील का पत्थर है?
उत्तर की दिशा: हाँ, यह भारतीय लोकतंत्र की बढ़ती ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। लेकिन भवन से अधिक महत्वपूर्ण उसकी कार्यप्रणाली में सुधार है।
विद्वानों और विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर
उनका मानना था कि संसद भारतीय लोकतंत्र का मंदिर है। उन्होंने संसदीय प्रणाली को इसलिए चुना क्योंकि यह सरकार को जवाबदेह बनाती है और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करती है।
ग्रानविल ऑस्टिन
उनके अनुसार भारतीय संसद ने दुनिया की सबसे विविधतापूर्ण विधायिका होने का गौरव अर्जित किया है। इसने संघीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सुभाष कश्यप
उनका कहना है कि संसद की शक्तियाँ अप्रतिम हैं लेकिन दुर्भाग्य से हाल के वर्षों में इसकी कार्यक्षमता में गिरावट आई है।
द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग
आयोग ने संसद के कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 150 से अधिक सिफारिशें की हैं। इनमें सत्रों की संख्या बढ़ाना, सदन की बैठकों का समय बढ़ाना, और समितियों को अधिक शक्ति देना शामिल है।
समीक्षात्मक विश्लेषण
सकारात्मक पक्ष
संसद भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है। इसने विविधतापूर्ण देश में एकता और अखंडता बनाए रखी है। इसने सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के लिए कई ऐतिहासिक कानून बनाए हैं। इसने कार्यपालिका को जवाबदेह बनाए रखा है।
नकारात्मक पक्ष
हाल के वर्षों में संसद की छवि धूमिल हुई है। बार-बार सदन स्थगित होने से जनता में निराशा है। सदस्यों की अनुपस्थिति बढ़ी है। सार्थक बहस की जगह हंगामे ने ले ली है। समिति तंत्र कमजोर हुआ है।
सुधार की आवश्यकता
संसद को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित सुधार आवश्यक हैं।
पहला सुधार – सत्रों की संख्या बढ़ाई जाए और कम से कम 120 दिन संसद चले।
दूसरा सुधार – सदस्यों के लिए उपस्थिति अनिवार्य की जाए और अनुपस्थित रहने पर वेतन काटा जाए।
तीसरा सुधार – प्रश्न काल को बिना व्यवधान के संचालित किया जाए।
चौथा सुधार – समितियों को अधिक शक्ति और संसाधन दिए जाएँ।
पाँचवाँ सुधार – धन विधेयक के दुरुपयोग पर रोक लगाई जाए।
भविष्य की चुनौतियाँ
आने वाले समय में संसद के सामने ये चुनौतियाँ होंगी। डिजिटल संसद की आवश्यकता। साइबर सुरक्षा के खतरे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव। युवाओं की भागीदारी बढ़ाना। महिलाओं के प्रतिनिधित्व में वृद्धि। संसदीय नैतिकता को मजबूत करना।
निष्कर्ष: संसद का भविष्य और संवैधानिक मूल्य
प्रिय aspirants,
संसद केवल एक विषय नहीं है जिसे आपको परीक्षा के लिए रटना है। संसद भारतीय लोकतंत्र की जीवंत आत्मा है। यह वह स्थान है जहाँ आवाजें उठती हैं, वादे टूटते और बनते हैं, और देश की दिशा तय होती है।
संविधान निर्माताओं ने संसद को सर्वोच्च स्थान दिया था क्योंकि उनका मानना था कि जनता के प्रतिनिधि ही सबसे अच्छा निर्णय लेंगे। आज यदि संसद कमजोर हो रही है तो लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। इसलिए संसदीय सुधार सिर्फ एक शैक्षणिक मुद्दा नहीं है, यह राष्ट्रीय आवश्यकता है।
आप UPSC के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाएँगे। वहाँ आपको न केवल कानून लागू करना है बल्कि संसद के प्रति जवाबदेह भी रहना है। आपके उत्तरों की संसदीय समितियों द्वारा जाँच होगी। आपके विभाग के कामकाज पर प्रश्न उठेंगे। इसलिए संसद को समझना आपके भविष्य के करियर का भी हिस्सा है।
मेरी आपको सलाह है कि संसद के दैनिक कामकाज पर नजर रखें। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही देखें। बहसों को सुनें। विधेयकों के बारे में पढ़ें। यह न केवल आपकी परीक्षा में मदद करेगा बल्कि आपको एक बेहतर नागरिक और एक बेहतर प्रशासक भी बनाएगा।
आपकी तैयारी की कामना करता हूँ। हर दिन थोड़ा सीखें, हर दिन थोड़ा आगे बढ़ें।
FAQs
प्रश्न 1: संसद किस अनुच्छेद में परिभाषित है?
उत्तर: अनुच्छेद 79 में। यह बताता है कि संघ की संसदमें राष्ट्रपति तथा दो सदन होंगे।
प्रश्न 2: लोकसभा और राज्यसभा में अंतर क्या है?
उत्तर: लोकसभा प्रत्यक्ष चुनाव से बनती है, राज्यसभा अप्रत्यक्ष। लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष, राज्यसभा स्थायी। लोकसभा के लिए 25 वर्ष, राज्यसभा के लिए 30 वर्ष।
प्रश्न 3: संसद के मुख्य कार्य क्या हैं?
उत्तर: विधायी कार्य (कानून बनाना), कार्यकारी कार्य (सरकार पर नियंत्रण), वित्तीय कार्य (बजट पारित करना), संविधान संशोधन, और न्यायिक कार्य।
प्रश्न 4: धन विधेयक किस सदन में पेश होता है?
उत्तर: केवल लोकसभा में। इसे राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से पेश किया जाता है।
प्रश्न 5: राज्यसभा के कितने सदस्य राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं?
उत्तर: 12 सदस्य। ये साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र से मनोनीत होते हैं।
प्रश्न 6: संसद का संयुक्त सत्र कब बुलाया जाता है?
उत्तर: जब कोई साधारण विधेयक एक सदन में पारित होकर दूसरे सदन में अस्वीकृत हो जाता है या उसमें संशोधन कर दिया जाता है, तो राष्ट्रपति संयुक्त सत्र बुला सकते हैं।
प्रश्न 7: संसद के विशेषाधिकार क्या हैं?
उत्तर: संसद के सदस्यों को भाषण की स्वतंत्रता, प्रकाशन की स्वतंत्रता और कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी से छूट मिलती है। यह अनुच्छेद 105 में दिया गया है।
प्रश्न 8: UPSC Prelims में संसद से कितने प्रश्न आते हैं?
उत्तर: पिछले दस वर्षों में औसतन प्रति वर्ष एक प्रश्न आया है, हालाँकि कुछ वर्षों में दो-तीन प्रश्न भी आए हैं।
प्रश्न 9: संसद के सत्र कौन बुलाता है?
उत्तर: राष्ट्रपति। वर्ष में तीन सत्र होते हैं – बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र।
प्रश्न 10: संसद में महिला आरक्षण का क्या प्रावधान है?
उत्तर: संविधान 108वें संशोधन विधेयक (महिला आरक्षण विधेयक) के अनुसार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। यह अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है।
यह संसद पर आपकी सम्पूर्ण मार्गदर्शिका है। इसे ध्यानपूर्वक पढ़ें, अपने नोट्स बनाएँ और बार-बार दोहराएँ। आपकी UPSC यात्रा सफल हो, यही शुभकामना।

[…] अधिकार – संपूर्ण मार्गदर्शन भारत की संसद – लोकसभा और राज्यसभा राष्ट्रपति की शक्तियाँ और […]