स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक सुदृढ़ और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का निर्माण करना था। औपनिवेशिक शासन के कारण देश गरीबी, निरक्षरता और औद्योगिक पिछड़ेपन का शिकार था। इन चुनौतियों से पार पाने के लिए 15 मार्च 1950 को योजना आयोग (Planning Commission) का गठन किया गया।

UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) की सिविल सेवा परीक्षा के सामान्य अध्ययन पेपर-2 (भारतीय राजव्यवस्था एवं संस्थाएं) और पेपर-3 (आर्थिक विकास) के लिए योजना आयोग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। यद्यपि 2014 में इसे समाप्त कर इसके स्थान पर नीति आयोग (NITI Aayog) लाया गया, लेकिन भारत के 65 वर्षों के आर्थिक इतिहास, केंद्र-राज्य संबंधों और नियोजन के उद्भव को समझने के लिए इसका अध्ययन आज भी अपरिहार्य है।

हम योजना आयोग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसके कार्यों, सफलताओं, विफलताओं और नीति आयोग के साथ इसके संरचनात्मक अंतर का गहन विश्लेषण करेंगे।

योजना आयोग

Table of Contents

1. अर्थ और परिभाषा

योजना आयोग भारत सरकार की एक संस्था थी, जिसका मुख्य कार्य देश के संसाधनों का आकलन करना और उनके प्रभावी उपयोग के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans) बनाना था।

संवैधानिक दृष्टिकोण से:

  • यह न तो एक संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) था (संविधान में इसका कोई उल्लेख नहीं था)।
  • यह न ही कोई वैधानिक निकाय (Statutory Body) था (इसे संसद के किसी अधिनियम द्वारा नहीं बनाया गया था)।
  • इसकी स्थापना भारत सरकार (केंद्रीय मंत्रिमंडल) के एक कार्यकारी प्रस्ताव (Executive Resolution) द्वारा की गई थी।

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, जो इसके प्रथम अध्यक्ष भी थे, का मानना था कि “लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत योजनाबद्ध विकास ही भारत को एक मजबूत और समतामूलक समाज बना सकता है।” यह संस्था मुख्य रूप से सोवियत संघ (USSR) के ‘गोसप्लान’ (Gosplan) मॉडल से प्रेरित थी।

2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास

भारत में आर्थिक नियोजन (Economic Planning) और योजना आयोग की स्थापना रातों-रात नहीं हुई थी। इसका एक लंबा ऐतिहासिक क्रम है:

  • 1934 (विश्वेश्वरैया योजना): एम. विश्वेश्वरैया ने “प्लांड इकॉनमी फॉर इंडिया” में भारत के लिए 10-वर्षीय योजना का खाका खींचा।
  • 1938 (राष्ट्रीय नियोजन समिति): सुभाष चंद्र बोस (तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष) की पहल पर जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में इस समिति का गठन हुआ।
  • 1944 (बॉम्बे प्लान): 8 प्रमुख उद्योगपतियों ने भारत के आर्थिक विकास का एक प्रस्ताव रखा।
  • 1944 (गांधीवादी योजना): श्रीमन नारायण अग्रवाल द्वारा कुटीर उद्योगों और कृषि पर केंद्रित योजना।
  • 1945 (जन योजना): एम. एन. रॉय द्वारा प्रस्तुत मार्क्सवादी दृष्टिकोण।
  • 1946 (के.सी. नियोगी समिति): इस सलाहकार योजना बोर्ड ने भारत में एक स्थायी योजना निकाय की सिफारिश की।
  • 15 मार्च 1950: नियोगी समिति की सिफारिशों के आधार पर भारत में योजना आयोग का विधिवत गठन किया गया।

3. प्रमुख विशेषताएं और घटक

योजना आयोग की संरचना और कार्यप्रणाली की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित थीं:

  • पदेन अध्यक्ष (Ex-officio Chairman): भारत के प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते थे, जो इसकी बैठकों की अध्यक्षता करते थे।
  • उपाध्यक्ष (Deputy Chairman): यह आयोग का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता था। इसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। (गुलजारीलाल नंदा इसके पहले उपाध्यक्ष थे)।
  • पूर्णकालिक सदस्य: विभिन्न क्षेत्रों (अर्थशास्त्र, उद्योग, विज्ञान, प्रशासन) के विशेषज्ञ इसके सदस्य होते थे, जिन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था।
  • अंशकालिक सदस्य: कुछ केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (जैसे वित्त, कृषि, रक्षा) पदेन सदस्य के रूप में कार्य करते थे।
  • कार्यालय: इसका मुख्यालय नई दिल्ली स्थित ‘योजना भवन’ था।

4. योजनाओं के प्रकार और वर्गीकरण

योजना आयोग द्वारा मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्तर पर योजनाएं बनाई जाती थीं। नियोजन के दृष्टिकोण को निम्नलिखित तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है:

नियोजन का प्रकारविवरण (Description)भारत के संदर्भ में
आदेशात्मक नियोजन (Imperative Planning)राज्य का अर्थव्यवस्था पर पूर्ण नियंत्रण। लक्ष्य अनिवार्य होते हैं। (जैसे USSR)भारत ने इसे आंशिक रूप से शुरुआती योजनाओं में अपनाया।
सांकेतिक नियोजन (Indicative Planning)राज्य एक सुविधाप्रदाता होता है। निजी क्षेत्र की भूमिका अहम होती है।1991 के LPG सुधारों के बाद भारत ने इस मॉडल को अपनाया।
केंद्रीकृत नियोजन (Centralized Planning)नीतियां शीर्ष स्तर पर बनती हैं और नीचे लागू की जाती हैं।योजना आयोग मुख्य रूप से इसी मॉडल (Top-down) पर काम करता था।
विकेंद्रीकृत नियोजन (Decentralized Planning)नीतियां स्थानीय स्तर (पंचायतों/जिलों) से बनकर ऊपर की ओर जाती हैं।73वें/74वें संशोधन के बाद इसकी परिकल्पना की गई।

5. विस्तृत विश्लेषण

आयोग के प्रमुख कार्य (Functions)

भारत के राजपत्र (1950) के अनुसार योजना आयोग के मुख्य कार्य थे:

  1. संसाधनों का आकलन: देश के भौतिक, पूंजीगत और मानव संसाधनों का अनुमान लगाना और कमियों को दूर करने के उपाय खोजना।
  2. योजना निर्माण: संसाधनों के संतुलित और प्रभावी उपयोग के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ तैयार करना।
  3. प्राथमिकताएं तय करना: विकास के चरणों को परिभाषित करना और प्रत्येक चरण के लिए संसाधनों का आवंटन करना।
  4. बाधाओं की पहचान: आर्थिक विकास को धीमा करने वाले कारकों (सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक) की पहचान करना।
  5. मूल्यांकन: योजनाओं के क्रियान्वयन की समय-समय पर समीक्षा करना और सुधार की सिफारिश करना।

राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) के साथ संबंध

चूंकि योजना आयोग में राज्यों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं था, इसलिए 6 अगस्त 1952 को ‘राष्ट्रीय विकास परिषद’ (National Development Council) का गठन किया गया। सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते थे। योजना आयोग द्वारा तैयार की गई पंचवर्षीय योजनाओं को अंतिम मंजूरी NDC ही देती थी। यह भारतीय संघवाद (Indian Federalism) को संतुलित करने का एक प्रयास था।

6. फायदे और नुकसान

योजना आयोग के सकारात्मक प्रभाव (Advantages)

  • बुनियादी ढांचे का विकास: भाखड़ा-नांगल जैसे बांधों, भिलाई और बोकारो जैसे इस्पात संयंत्रों की स्थापना इसके योजनाबद्ध दृष्टिकोण का ही परिणाम थी।
  • कृषि और खाद्य सुरक्षा: हरित क्रांति के लिए आवश्यक संसाधनों का आवंटन कर भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया।
  • संस्थागत निर्माण: IITs, IIMs और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों को प्रारंभिक दिशा और धन इसी के माध्यम से मिला।
  • दीर्घकालिक दृष्टिकोण: इसने देश के विकास को 5-वर्षीय और 15-वर्षीय परिप्रेक्ष्य (Perspective Planning) प्रदान किया।

आलोचनाएं और विफलताएं (Disadvantages)

  • केंद्र-राज्य विवाद: यह संविधान के अनुच्छेद 282 का उपयोग कर राज्यों को अनुदान (Discretionary Grants) देता था, जिससे वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) के कार्यों में अतिक्रमण होता था।
  • ‘एक आकार सभी के लिए’ दृष्टिकोण (One-size-fits-all): दिल्ली में बैठे योजनाकार नागालैंड और केरल के लिए एक जैसी नीतियां बनाते थे, जो भौगोलिक और जनसांख्यिकीय विविधताओं को नजरअंदाज करता था।
  • राजनीतिकरण: धीरे-धीरे यह एक ‘सुपर कैबिनेट’ बन गया, जहां राज्यों को धन प्राप्त करने के लिए राजनीतिक रूप से केंद्र के करीब होना पड़ता था।

Author: MD Afjal Ansari is a UPSC aspirant with 4 years of experience as a Software Engineer. His optional subject is Public Administration.

7. तुलनात्मक तालिका (Comparison Table): योजना आयोग बनाम नीति आयोग

1 जनवरी 2015 को योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग (NITI Aayog – National Institution for Transforming India) की स्थापना की गई।

आधारयोजना आयोग (Planning Commission)नीति आयोग (NITI Aayog)
नीतिगत दृष्टिकोणटॉप-डाउन (Top-Down) दृष्टिकोण।बॉटम-अप (Bottom-Up) दृष्टिकोण।
राज्यों की भूमिकाराज्यों की भूमिका केवल दर्शक और धन प्राप्तकर्ता की थी (NDC के माध्यम से सीमित)।गवर्निंग काउंसिल के माध्यम से राज्य नीति-निर्माण में समान भागीदार हैं।
धन का आवंटनमंत्रालयों और राज्यों को धन आवंटित करने की शक्ति प्राप्त थी।धन आवंटित करने की कोई शक्ति नहीं (यह वित्त मंत्रालय का कार्य है)। यह केवल एक ‘थिंक-टैंक’ है।
योजना की प्रकृतिपंचवर्षीय योजनाएँ (5 Years)।15 वर्षीय विजन, 7 वर्षीय रणनीति, 3 वर्षीय एक्शन एजेंडा।
अंशकालिक सदस्यप्रावधान बहुत सीमित था।विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से आवश्यकतानुसार अंशकालिक सदस्य होते हैं।

8. समसामयिक मामले और वर्तमान परिप्रेक्ष्य (Current Affairs Integration 2024-2026)

यद्यपि योजना आयोग अब अस्तित्व में नहीं है, लेकिन इसका अध्ययन वर्तमान आर्थिक प्रवृत्तियों को समझने के लिए प्रासंगिक है:

  • विकसित भारत @2047 (Viksit Bharat @2047): नीति आयोग ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का विजन डॉक्युमेंट तैयार किया है। यह दस्तावेज़ पुरानी 5-वर्षीय योजनाओं की कठोरता के विपरीत, वैश्विक AI, जलवायु परिवर्तन और जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) जैसी आधुनिक चुनौतियों को शामिल करता है।
  • राज्यों के साथ बढ़ता संवाद: 2024-2025 में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांत पर कई राज्यों (विशेषकर गैर-NDA शासित राज्यों) ने नीति आयोग की बैठकों में अपनी क्षेत्रीय मांगों को मुखरता से उठाया है। पुरानी व्यवस्था में राज्य योजना आयोग के सामने केवल अनुदान मांगने के लिए खड़े होते थे, अब वे नीतियां तय कर रहे हैं।
  • डेटा संचालित प्रतिस्पर्धा: पहले धन का आवंटन राजनीतिक आधार पर होता था। अब नीति आयोग ‘हेल्थ इंडेक्स’, ‘वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स’ और ‘एक्सपोर्ट प्रिपेयरनेस इंडेक्स’ (2024-25 रिपोर्ट्स) के माध्यम से राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) को बढ़ावा दे रहा है।

9. प्रमुख चुनौतियां / मुद्दे

योजना आयोग के विघटन के पीछे वे 5 प्रमुख चुनौतियां थीं, जिन्होंने इसे अप्रासंगिक बना दिया:

  1. संघीय ढांचे का क्षरण (Erosion of Federal Structure): भारत के संविधान ने संसाधनों के बंटवारे के लिए वित्त आयोग बनाया था। लेकिन योजना आयोग ने विवेकाधीन अनुदान (Plan Grants) देकर वित्त आयोग को हाशिए पर धकेल दिया था।
  2. नौकरशाही का दबदबा (Bureaucratic Inertia): यह अर्थशास्त्रियों के बजाय नौकरशाहों (IAS अधिकारियों) का अड्डा बन गया था, जिसमें नवाचार (Innovation) का अभाव था।
  3. बदलती अर्थव्यवस्था के साथ तालमेल न होना: 1991 के उदारीकरण (LPG Reforms) के बाद जब निजी क्षेत्र अर्थव्यवस्था का मुख्य चालक बन गया, तो राज्य-नियंत्रित ‘सोवियत मॉडल’ की यह संस्था अप्रासंगिक हो गई।
  4. दोषपूर्ण गरीबी आकलन: मोंटेक सिंह अहलूवालिया के समय आयोग द्वारा तय की गई गरीबी रेखा (जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ₹27 प्रतिदिन) को लेकर भारी विवाद हुआ, जिसने संस्था की विश्वसनीयता को खत्म कर दिया।
  5. कार्यान्वयन का अभाव: आयोग केवल योजनाएं बनाता था, लेकिन उनके जमीनी कार्यान्वयन पर उसका कोई नियंत्रण नहीं था। इससे परियोजनाओं में भारी देरी और लागत वृद्धि (Cost Overrun) होती थी।

10. सरकारी योजनाएं / नीतियां

योजना आयोग के युग की समाप्ति के बाद, भारत सरकार ने क्षेत्रीय विकास (Sectoral Development) के लिए ‘अंब्रेला स्कीम्स’ पर जोर दिया है:

  • आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme – 2018): यह पिछड़े जिलों को विकसित करने की योजना है। 2024 में इसे विस्तारित कर ‘आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम’ (Aspirational Blocks Programme) कर दिया गया है। यह “एक आकार सभी के लिए” की पुरानी नीति का सीधा खंडन है।
  • पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti – 2021/2022): 100 लाख करोड़ रुपये का राष्ट्रीय मास्टर प्लान, जो बुनियादी ढांचे के विकास को साइलो (Silos) से निकालकर 16 मंत्रालयों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करता है। (यह काम पहले योजना आयोग को करना चाहिए था, जो वह नहीं कर सका)।
  • उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI Scheme – 2020): विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए यह 14 क्षेत्रों में लागू की गई है, जो आत्मनिर्भर भारत का आधार है।

11. आगे की राह

UPSC मुख्य परीक्षा के उत्तर के लिए एक विश्लेषणात्मक ‘आगे की राह’ निम्नलिखित होनी चाहिए:

  • मूल्यांकन तंत्र को मजबूत करना: योजना आयोग की सबसे बड़ी विफलता आउटकम (परिणाम) के बजाय आउटले (खर्च) पर ध्यान देना था। नीति आयोग को ‘आउटकम बजटिंग’ (Outcome Budgeting) और स्वतंत्र तीसरे पक्ष के ऑडिट (Third-Party Audit) पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
  • वित्तीय विकेंद्रीकरण: 15वें और 16वें वित्त आयोग की भूमिका को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि राज्यों को उनकी आवश्यकतानुसार बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के धन मिल सके।
  • निजी क्षेत्र का समावेशन: भारत के बुनियादी ढांचे के अंतर को पाटने के लिए केवल सरकारी खर्च पर्याप्त नहीं है। मजबूत PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल को और सुव्यवस्थित करना होगा।
  • लचीलापन (Flexibility): वैश्विक अनिश्चितताओं (जैसे युद्ध, महामारी, सप्लाई चेन संकट) को देखते हुए नियोजन को इतना लचीला होना चाहिए कि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित नीतिगत बदलाव किए जा सकें।

13. निष्कर्ष

निष्कर्षतः, योजना आयोग ने एक नवजात राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को दिशा देने और बुनियादी ढांचे की नींव रखने में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई। हालांकि समय के साथ यह एक भारी-भरकम, केंद्रीकृत और नौकरशाही तंत्र में बदल गया जो 21वीं सदी की खुली और वैश्वीकृत भारतीय अर्थव्यवस्था की गति से मेल नहीं खा सका। योजना आयोग से नीति आयोग की ओर परिवर्तन केवल एक नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक प्रतिमान बदलाव (Paradigm Shift) है जो ‘सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद’ के माध्यम से नए भारत की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास (UPSC Prelims PYQs)

प्रश्न 1. ‘योजना आयोग’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (UPSC 2013)

  1. योजना आयोग एक संवैधानिक निकाय था।
  2. भारत का प्रधानमंत्री योजना आयोग का पदेन अध्यक्ष होता था।उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?A) केवल 1B) केवल 2C) 1 और 2 दोनोंD) न तो 1, न ही 2उत्तर: Bव्याख्या: योजना आयोग एक गैर-संवैधानिक और गैर-वैधानिक निकाय था। इसकी स्थापना 1950 में केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव द्वारा की गई थी। प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते थे।

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) का हिस्सा नहीं है? (UPSC 2013)

A) नीति आयोग के सचिव

B) राज्यों के मुख्यमंत्री

C) भारत के राष्ट्रपति

D) केंद्रीय कैबिनेट मंत्री

उत्तर: C

व्याख्या: भारत के राष्ट्रपति NDC के सदस्य नहीं होते। इसमें प्रधानमंत्री, सभी कैबिनेट मंत्री, राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक शामिल होते हैं।

प्रश्न 3. भारत में आर्थिक नियोजन किस सूची का विषय है? (UPSC 2001)

A) संघ सूची

B) राज्य सूची

C) समवर्ती सूची

D) किसी भी सूची में निर्दिष्ट नहीं

उत्तर: C

व्याख्या: आर्थिक और सामाजिक नियोजन भारतीय संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत समवर्ती सूची (Concurrent List – प्रविष्टि 20) का विषय है।

प्रश्न 4. ‘बॉम्बे प्लान’ (1944) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है? (UPSC 2021 Model)

A) यह गांधीवादी आर्थिक मॉडल पर आधारित था।

B) यह प्रमुख भारतीय उद्योगपतियों द्वारा तैयार किया गया एक आर्थिक मसौदा था।

C) यह ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रस्तावित पंचवर्षीय योजना थी।

D) यह कृषि के राष्ट्रीयकरण से संबंधित था।

उत्तर: B

व्याख्या: 1944 में जे.आर.डी. टाटा, जीडी बिड़ला सहित 8 प्रमुख उद्योगपतियों ने भारत के आर्थिक विकास का एक प्रस्ताव रखा था, जिसे ‘बॉम्बे प्लान’ कहा जाता है।

प्रश्न 5. योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग का गठन कब किया गया? (UPPSC/UPSC Basics)

A) 15 अगस्त 2014

B) 1 जनवरी 2015

C) 26 जनवरी 2015

D) 1 अप्रैल 2015

उत्तर: B

व्याख्या: 1 जनवरी 2015 को मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव द्वारा योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग की स्थापना की गई।

UPSC मुख्य परीक्षा विगत वर्ष प्रश्न (UPSC Mains PYQs Model Answers)

प्रश्न 1. यद्यपि नीति आयोग ने योजना आयोग की जगह ले ली है, लेकिन क्या इसने वास्तव में सहकारी संघवाद के सिद्धांतों को स्थापित किया है? आलोचनात्मक विश्लेषण करें। (250 शब्द – UPSC 2015)

मॉडल उत्तर:

प्रस्तावना: 2015 में “एक आकार सभी के लिए उपयुक्त” की केंद्रीकृत नीति वाले योजना आयोग को नीति आयोग से बदल दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य ‘सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद’ को बढ़ावा देना था।

मुख्य भाग:

सहकारी संघवाद की दिशा में कदम (सफलताएं):

  1. गवर्निंग काउंसिल: राज्यों के मुख्यमंत्रियों की नीति-निर्माण में प्रत्यक्ष भागीदारी।
  2. थिंक-टैंक भूमिका: नीति आयोग धन का आवंटन नहीं करता, जिससे केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में उसका राजनीतिकरण नहीं होता (यह काम अब पूरी तरह वित्त आयोग करता है)।
  3. कस्टमाइज्ड नीतियां: राज्यों को अपनी क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार नीतियां बनाने का लचीलापन।

चुनौतियां और आलोचनाएं:

  1. सलाहकार प्रकृति: नीति आयोग के पास अपनी सिफारिशों को लागू करवाने की वित्तीय या वैधानिक शक्ति नहीं है।
  2. केंद्र का वर्चस्व: कई आलोचकों का मानना है कि महत्वपूर्ण नीतियां अभी भी केंद्र द्वारा प्रायोजित (Centrally Sponsored Schemes) होती हैं, जिनमें राज्यों को अपना हिस्सा देना पड़ता है।
  3. गैर-बीजेपी राज्यों का विरोध: हाल ही में कई राज्यों ने नीति आयोग की बैठकों का बहिष्कार किया, जो राजनीतिक ध्रुवीकरण को दर्शाता है।

निष्कर्ष: नीति आयोग ने संस्थागत स्तर पर सहकारी संघवाद का ढांचा तो तैयार किया है, लेकिन इसके वास्तविक क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों के बीच अधिक राजनीतिक विश्वास (Political Trust) और वित्तीय स्वायत्तता की आवश्यकता है।

प्रश्न 2. 1991 के बाद योजना आयोग की प्रासंगिकता पर सवाल क्यों उठने लगे थे? (150 शब्द)

मॉडल उत्तर:

प्रस्तावना: भारत का योजना आयोग सोवियत संघ के ‘कमांड इकॉनमी’ मॉडल पर आधारित था। लेकिन 1991 में LPG (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रकृति को बदल दिया।

मुख्य भाग:

  1. बाजार अर्थव्यवस्था का उदय: 1991 के बाद संसाधन आवंटन बाजार की शक्तियों (मांग और आपूर्ति) द्वारा होने लगा। ऐसे में एक केंद्रीकृत निकाय द्वारा संसाधनों के ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ की आवश्यकता समाप्त हो गई।
  2. निजी क्षेत्र की प्रमुखता: पंचवर्षीय योजनाएँ मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के व्यय पर केंद्रित थीं, जबकि उदारीकरण के बाद निजी क्षेत्र विकास का मुख्य इंजन बन गया।
  3. वैश्वीकरण का प्रभाव: खुली अर्थव्यवस्था में वैश्विक प्रवृत्तियों, FDI और विदेशी बाजारों का प्रभाव बढ़ा, जिसे 5 साल की कठोर योजनाओं में बांधना संभव नहीं था।
  4. राज्यों की बदलती भूमिका: 1990 के दशक में मजबूत क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के उदय ने योजना आयोग के ‘टॉप-डाउन’ मॉडल को चुनौती दी।

निष्कर्ष: 1991 के सुधारों के बाद एक नियंत्रक निकाय के बजाय एक ‘सुविधाप्रदाता’ (Facilitator) और ‘थिंक-टैंक’ की आवश्यकता थी, जो अंततः नीति आयोग के रूप में परिणत हुई।

प्रश्न 3. भारत के आर्थिक विकास में योजना आयोग के योगदान का मूल्यांकन करें। (250 शब्द – UPSC 2014)

मॉडल उत्तर:

प्रस्तावना: स्वतंत्रता के समय भारत की 70% से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर थी और बुनियादी ढांचा नगण्य था। ऐसे समय में योजना आयोग ने देश के सीमित संसाधनों को दिशा देने का कार्य किया।

मुख्य भाग (सकारात्मक योगदान):

  1. औद्योगिक आधार का निर्माण: द्वितीय पंचवर्षीय योजना (महालनोबिस मॉडल) के तहत भारी उद्योगों (स्टील, मशीनरी, बिजली) की स्थापना हुई।
  2. कृषि और आत्मनिर्भरता: तृतीय योजना के बाद योजना अवकाश के दौरान हरित क्रांति की नींव रखी गई, जिसने भारत को खाद्य अधिशेष देश बनाया।
  3. बुनियादी ढांचा और मानव पूंजी: रेलवे का विस्तार, बांधों का निर्माण, और IIT/IIM जैसी संस्थाओं का विकास इसी योजनाबद्ध प्रक्रिया का हिस्सा था।
  4. सामाजिक न्याय: गरीबी हटाओ (5वीं योजना) और रोजगार सृजन कार्यक्रमों (जैसे मनरेगा की शुरुआत के समय) को दिशा दी।

विफलताएं: क्षेत्रीय असमानता में वृद्धि (जैसे पंजाब vs बिहार), रोजगार विहीन विकास, और लाल फीताशाही के कारण परियोजनाओं में देरी।

निष्कर्ष: यद्यपि अपनी कार्यप्रणाली में कमियों और अत्यधिक केंद्रीकरण के कारण इसे अंततः समाप्त कर दिया गया, फिर भी योजना आयोग ने एक अस्थिर और गरीब भारत को एक आधुनिक और विकासशील अर्थव्यवस्था की पटरी पर लाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

प्रैक्टिस सेक्शन (Practice Section)

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. योजना आयोग का प्रथम उपाध्यक्ष कौन था?A) जवाहरलाल नेहरू B) सी.डी. देशमुख C) गुलजारीलाल नंदा D) मोंटेक सिंह अहलूवालिया(उत्तर: C)
  2. राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की स्थापना किस वर्ष हुई?A) 1950 B) 1951 C) 1952 D) 1954(उत्तर: C)
  3. योजना आयोग द्वारा कुल कितनी पंचवर्षीय योजनाएँ बनाई गईं?A) 10 B) 11 C) 12 D) 13(उत्तर: C)
  4. निम्नलिखित में से किसने भारत के लिए “सर्वोदय योजना” प्रस्तुत की थी?A) जयप्रकाश नारायण B) विनोबा भावे C) महात्मा गांधी D) एम.एन. रॉय(उत्तर: A)
  5. योजना आयोग एक किस प्रकार का निकाय था?A) वैधानिक B) संवैधानिक C) गैर-संवैधानिक और सलाहकार D) विधिक(उत्तर: C)
  6. किस अनुच्छेद के तहत योजना आयोग राज्यों को विवेकाधीन अनुदान देता था?A) 280 B) 282 C) 275 D) 268(उत्तर: B)
  7. “रोलिंग प्लान” (Rolling Plan) का विचार किस सरकार द्वारा लाया गया था?A) कांग्रेस सरकार B) जनता पार्टी सरकार C) संयुक्त मोर्चा D) एनडीए सरकार(उत्तर: B)
  8. योजना आयोग का अंतिम उपाध्यक्ष कौन था?A) मनमोहन सिंह B) मोंटेक सिंह अहलूवालिया C) अरविंद पनगढ़िया D) रघुराम राजन(उत्तर: B)
  9. संविधान में आर्थिक और सामाजिक नियोजन का उल्लेख कहां है?A) राज्य सूची B) संघ सूची C) समवर्ती सूची D) अवशिष्ट शक्तियां(उत्तर: C)
  10. भारत में नियोजन का मुख्य उद्देश्य क्या रहा है?A) आर्थिक विकास B) आधुनिकीकरण C) आत्मनिर्भरता D) उपरोक्त सभी(उत्तर: D)

5 मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Questions – 150/200 Words)

  1. योजना आयोग और वित्त आयोग के बीच कार्यों के टकराव ने भारतीय संघवाद को कैसे प्रभावित किया? चर्चा करें।
  2. ‘आदेशात्मक नियोजन’ और ‘सांकेतिक नियोजन’ के बीच अंतर स्पष्ट करें। भारत में इसका संक्रमण कैसे हुआ?
  3. क्या नीति आयोग पुरानी शराब नई बोतल में है? योजना आयोग के संदर्भ में आलोचनात्मक परीक्षण करें।
  4. भारत में विकेंद्रीकृत नियोजन की विफलता के पीछे योजना आयोग का शीर्ष-से-नीचे (Top-down) दृष्टिकोण किस हद तक जिम्मेदार था?
  5. योजना आयोग के विघटन से भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में क्या संरचनात्मक परिवर्तन आए हैं?

उत्तर लेखन अभ्यास (Answer Writing Practice – 5 Structured Frameworks)

(छात्रों के स्व-मूल्यांकन के लिए रूपरेखा)

उत्तर 1 का ढांचा (योजना आयोग vs वित्त आयोग):

  • प्रस्तावना: अनुच्छेद 280 (वित्त आयोग – संवैधानिक) और अनुच्छेद 282 (योजना आयोग – गैर-संवैधानिक) का उल्लेख करें।
  • बॉडी (टकराव): वित्त आयोग का काम कर राजस्व का बंटवारा करना है। लेकिन योजना आयोग ने विवेकाधीन ‘योजना अनुदान’ (Plan Grants) देकर वित्त आयोग की भूमिका को सीमित कर दिया था। इससे केंद्र का राजनीतिक नियंत्रण बढ़ा और राज्यों की स्वायत्तता घटी।
  • निष्कर्ष: नीति आयोग के आने से यह विकृति समाप्त हो गई है और अब संसाधन आवंटन का पूरा कार्य वित्त आयोग के पास है, जो राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) को मजबूत करता है।

उत्तर 2 का ढांचा (नियोजन के प्रकार):

  • प्रस्तावना: दोनों की परिभाषा दें। आदेशात्मक (राज्य का पूर्ण नियंत्रण) बनाम सांकेतिक (राज्य सुविधाप्रदाता, बाजार की भूमिका)।
  • संक्रमण: 1951 से 1991 तक भारत में भारी उद्योगों पर राज्य के नियंत्रण के साथ आदेशात्मक मॉडल प्रभावी रहा। 1991 के भुगतान संतुलन संकट और LPG सुधारों के बाद, आठवीं योजना (1992-97) से भारत ने सांकेतिक नियोजन अपनाया।
  • निष्कर्ष: आज भारत विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसका श्रेय इसी समय पर किए गए संक्रमण को जाता है।

उत्तर 3 का ढांचा (क्या नीति आयोग पुरानी शराब है?):

  • प्रस्तावना: योजना आयोग के स्थान पर 2015 में नीति आयोग के गठन का संदर्भ।
  • नहीं, यह नई बोतल में नई शराब है: क्योंकि इसकी संरचना (गवर्निंग काउंसिल), कार्यप्रणाली (थिंक-टैंक, कोई वित्तीय शक्ति नहीं), और दृष्टिकोण (विजन दस्तावेज़ vs पंचवर्षीय योजना) पूरी तरह से अलग हैं।
  • निष्कर्ष: यह महज नाम का बदलाव नहीं, बल्कि भारतीय नियोजन के प्रतिमान (Paradigm) में एक मौलिक संरचनात्मक सुधार है।

उत्तर 4 का ढांचा (विकेंद्रीकृत नियोजन):

  • प्रस्तावना: 73वें और 74वें संशोधन (1992) ने पंचायत और नगर पालिका स्तर पर नियोजन (DPC – District Planning Committee) का प्रावधान किया।
  • योजना आयोग की भूमिका: योजना भवन (दिल्ली) में केंद्रीकृत नीतियां बनती थीं। राज्यों और स्थानीय निकायों को केवल उन्हें लागू करना होता था। धन का आवंटन ‘बंधा’ (Tied funds) होता था, जिससे स्थानीय आवश्यकतानुसार खर्च करने की स्वतंत्रता नहीं थी।
  • निष्कर्ष: इसी खामी को दूर करने के लिए नीति आयोग ‘ग्राम पंचायत विकास योजना’ (GPDP) के माध्यम से बॉटम-अप अप्रोच अपना रहा है।

उत्तर 5 का ढांचा (संरचनात्मक परिवर्तन):

  • प्रस्तावना: 2014 के बाद की प्रशासनिक व्यवस्था का परिचय।
  • परिवर्तन: ‘योजना व्यय’ और ‘गैर-योजना व्यय’ का कृत्रिम विभाजन बजट (2017) से समाप्त कर दिया गया। मंत्रालयों को अपने बजट के लिए सीधे वित्त मंत्रालय से संपर्क करना होता है, बीच का एक ‘रेड टेप’ (योजना आयोग) हट गया है।
  • निष्कर्ष: इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ी है और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. योजना आयोग का गठन कब और कैसे हुआ था?

योजना आयोग का गठन 15 मार्च 1950 को केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा किया गया था। यह एक गैर-संवैधानिक निकाय था।

Q2. योजना आयोग का अध्यक्ष कौन होता था?

भारत का प्रधानमंत्री योजना आयोग का पदेन अध्यक्ष होता था। जवाहरलाल नेहरू इसके पहले अध्यक्ष थे।

Q3. योजना आयोग का मुख्य कार्य क्या था?

देश के भौतिक, पूंजीगत और मानव संसाधनों का आकलन करना और देश के आर्थिक विकास के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans) तैयार करना इसका मुख्य कार्य था।

Q4. राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) और योजना आयोग में क्या संबंध था?

योजना आयोग द्वारा बनाई गई पंचवर्षीय योजनाओं का अंतिम अनुमोदन (Approval) राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा किया जाता था, जिसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होते थे।

Q5. योजना आयोग को क्यों समाप्त कर दिया गया?

यह अत्यधिक केंद्रीकृत, नौकरशाही से ग्रस्त संस्था बन गई थी, जो 1991 के उदारीकरण के बाद बदलती भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों (निजी क्षेत्र की भागीदारी, लचीलापन) को पूरा करने में अक्षम साबित हो रही थी।

Q6. योजना आयोग और नीति आयोग में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

योजना आयोग के पास राज्यों और मंत्रालयों को धन आवंटित करने की शक्ति थी, जबकि नीति आयोग केवल एक ‘थिंक-टैंक’ है जिसके पास धन आवंटन की कोई शक्ति नहीं है।

Q7. भारत में अंतिम पंचवर्षीय योजना कौन सी थी?

12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी, जिसे योजना आयोग द्वारा तैयार किया गया था।

Q8. रोलिंग प्लान क्या था और यह कब आया?

1978 में जनता पार्टी सरकार ने पांचवीं योजना को समय से पहले रोककर ‘रोलिंग प्लान’ पेश किया, जिसका उद्देश्य हर साल योजना के प्रदर्शन का आकलन कर नई योजना बनाना था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *