भारत की आर्थिक यात्रा 1947 में स्वतंत्रता के बाद एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण दौर से शुरू हुई थी। एक नवजात राष्ट्र के रूप में, भारत के सामने गरीबी, अशिक्षा और अविकसित बुनियादी ढांचे जैसी गंभीर समस्याएं थीं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, भारत सरकार ने सोवियत संघ (USSR) से प्रेरित होकर पंचवर्षीय योजनाएँ (Five-Year Plans) लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) की सिविल सेवा परीक्षा के सामान्य अध्ययन पेपर-3 (आर्थिक विकास) के लिए पंचवर्षीय योजनाएँ एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। यद्यपि अब योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग आ चुका है, लेकिन भारत के वर्तमान आर्थिक ढांचे को समझने के लिए इन योजनाओं का इतिहास और इनके प्रभाव का अध्ययन अपरिहार्य है।

अर्थ और परिभाषा
आर्थिक नियोजन (Economic Planning) का अर्थ उपलब्ध संसाधनों का एक निश्चित समय सीमा के भीतर अनुकूलतम उपयोग करना है, ताकि पूर्व-निर्धारित राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
भारत में पंचवर्षीय योजनाएँ सरकार द्वारा तैयार किए गए वे विस्तृत दस्तावेज़ थे, जिनमें अगले पांच वर्षों के लिए देश की आय और व्यय का खाका तैयार किया जाता था। NCERT (कक्षा 11 – भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास) के अनुसार, नियोजन का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और समानता सुनिश्चित करना था।
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का मानना था कि “लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर योजनाबद्ध विकास ही भारत की गरीबी दूर करने का एकमात्र अचूक अस्त्र है।”
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास
भारत में नियोजन का इतिहास स्वतंत्रता से पूर्व ही शुरू हो गया था। इसकी समयरेखा इस प्रकार है:
- 1934 (विश्वेश्वरैया योजना): सर एम. विश्वेश्वरैया ने अपनी पुस्तक “प्लांड इकॉनमी फॉर इंडिया” में भारत के लिए एक 10-वर्षीय योजना का प्रस्ताव रखा था।
- 1938 (राष्ट्रीय नियोजन समिति): भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में सुभाष चंद्र बोस की पहल पर जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में इस समिति का गठन हुआ।
- 1944 (बॉम्बे प्लान): भारत के आठ प्रमुख उद्योगपतियों ने देश के आर्थिक विकास के लिए एक 15-वर्षीय योजना प्रस्तुत की।
- 1944 (गांधीवादी योजना): श्रीमन नारायण अग्रवाल द्वारा कृषि और कुटीर उद्योगों पर केंद्रित यह योजना लाई गई।
- 1945 (जन योजना): एम. एन. रॉय द्वारा मार्क्सवादी समाजवाद पर आधारित ‘पीपुल्स प्लान’ पेश किया गया।
- 1950 (सर्वोदय योजना): जयप्रकाश नारायण द्वारा प्रस्तुत योजना, जो विनोबा भावे के विचारों पर आधारित थी।
- 15 मार्च 1950: एक गैर-संवैधानिक और सलाहकार निकाय के रूप में योजना आयोग (Planning Commission) का गठन किया गया।
प्रमुख विशेषताएं और घटक
भारत की पंचवर्षीय योजनाओं की कुछ मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित थीं:
- लोकतांत्रिक नियोजन: सोवियत संघ के विपरीत, भारत में निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों (मिश्रित अर्थव्यवस्था) के सह-अस्तित्व को स्वीकार किया गया।
- केंद्रीकृत दृष्टिकोण: यद्यपि राज्य सरकारें शामिल थीं, लेकिन योजनाओं का प्रारूपण और वित्तीय नियंत्रण मुख्य रूप से केंद्र सरकार (योजना आयोग) के पास था।
- लक्षित विकास दर: प्रत्येक योजना में GDP (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि का एक निश्चित लक्ष्य तय किया जाता था।
- संसाधनों का आवंटन: कृषि, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए बजट का पूर्व-आवंटन किया जाता था।
- सामाजिक न्याय: आर्थिक विकास के साथ-साथ गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन पर विशेष बल दिया गया।
योजनाओं के प्रकार और वर्गीकरण
भारत में 1951 से 2017 तक कुल 12 पंचवर्षीय योजनाएँ लागू की गईं। नीचे दी गई तालिका में उनका संक्षिप्त विवरण है:
| योजना (कार्यकाल) | विकास मॉडल | मुख्य फोकस / उद्देश्य |
| पहली (1951-56) | हेरोड-डोमर मॉडल | कृषि विकास, सिंचाई और मूल्य स्थिरता। |
| दूसरी (1956-61) | पी.सी. महालनोबिस मॉडल | भारी उद्योग, औद्योगीकरण और बुनियादी ढांचा। |
| तीसरी (1961-66) | गाडगिल योजना | आत्मनिर्भरता और कृषि। (युद्धों के कारण विफल) |
| चौथी (1969-74) | अशोक रुद्र और एलन मन्ने | स्थिरता के साथ विकास और आत्मनिर्भरता। |
| पांचवीं (1974-78) | डी.पी. धर मॉडल | गरीबी उन्मूलन (गरीबी हटाओ) और आत्मनिर्भरता। |
| छठी (1980-85) | आगत-निर्गत मॉडल | आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत, रोजगार सृजन। |
| सातवीं (1985-90) | जॉन डब्ल्यू. मिलर मॉडल | उत्पादकता, काम और भोजन। |
| आठवीं (1992-97) | राव-मनमोहन मॉडल | मानव संसाधन विकास, एलपीजी (LPG) सुधार। |
| नौवीं (1997-2002) | आगत-निर्गत मॉडल | सामाजिक न्याय और समानता के साथ विकास। |
| दसवीं (2002-07) | व्यापक विकास मॉडल | प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना। |
| ग्यारहवीं (2007-12) | सी. रंगराजन द्वारा तैयार | तीव्र और अधिक समावेशी विकास। |
| बारहवीं (2012-17) | मोंटेक सिंह अहलूवालिया | तीव्र, अधिक समावेशी और सतत विकास। |
(नोट: 1966-69, 1978-80 और 1990-92 के दौरान विभिन्न कारणों से पंचवर्षीय योजनाओं के बजाय वार्षिक योजनाएँ/योजना अवकाश लागू किए गए थे।)
विस्तृत विश्लेषण: प्रमुख योजनाओं का UPSC परिप्रेक्ष्य
UPSC मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से कुछ विशिष्ट योजनाओं का गहन विश्लेषण आवश्यक है:
1. पहली और दूसरी योजना: कृषि बनाम उद्योग
पहली योजना (1951-56) ने भाखड़ा नांगल और हीराकुंड जैसे बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के साथ कृषि को मजबूत किया। इसके विपरीत, दूसरी योजना (1956-61) ने “महालनोबिस रणनीति” अपनाई। इस रणनीति के तहत भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला में इस्पात संयंत्र स्थापित किए गए। इसका उद्देश्य पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ाकर दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करना था।
2. योजना अवकाश (Plan Holidays: 1966-69)
भारत-चीन युद्ध (1962), भारत-पाक युद्ध (1965) और गंभीर सूखे के कारण तीसरी योजना बुरी तरह विफल रही। अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए तीन वार्षिक योजनाएँ लाई गईं। इसी दौरान भारत में ऐतिहासिक हरित क्रांति (Green Revolution) की नींव रखी गई, जिसने भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया।
3. आठवीं योजना (1992-97): एलपीजी (LPG) सुधार
यह योजना भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। 1991 के भुगतान संतुलन (BoP) संकट के बाद, भारत ने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) को अपनाया। यहाँ से “आदेशात्मक नियोजन” (Imperative Planning) के बजाय “सांकेतिक नियोजन” (Indicative Planning) की शुरुआत हुई, जहां निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ गई।
4. बारहवीं योजना (2012-2017): सतत विकास
यह भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी। इसका लक्ष्य 8% की वृद्धि दर हासिल करना था। इसमें पहली बार पर्यावरण स्थिरता (Sustainability) को मुख्य आर्थिक लक्ष्यों के साथ जोड़ा गया था।
फायदे और नुकसान
भारत के विकास मॉडल में पंचवर्षीय योजनाओं का योगदान अत्यंत व्यापक रहा है, लेकिन इसकी कुछ गंभीर कमियां भी थीं।
सकारात्मक प्रभाव (Advantages)
- बुनियादी ढांचे का विकास: आज का रेलवे नेटवर्क, बांध, भारी उद्योग और बिजली संयंत्र इन्हीं योजनाओं की देन हैं।
- संस्थागत निर्माण: IITs, IIMs, ISRO और DRDO जैसी विश्वस्तरीय संस्थाओं की स्थापना शुरुआती योजनाओं के दौरान ही हुई।
- खाद्य सुरक्षा: कृषि पर केंद्रित शुरुआती योजनाओं और बाद में हरित क्रांति के कारण भारत खाद्यान्न आयातक से निर्यातक बन गया।
- राष्ट्रीय आय में वृद्धि: योजना काल के दौरान भारत की GDP और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय और स्थिर वृद्धि दर्ज की गई।
चुनौतियां और विफलताएं (Disadvantages)
- कार्यान्वयन में देरी: लाल फीताशाही (Red Tapism) और नौकरशाही की सुस्ती के कारण अधिकांश परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हुईं।
- क्षेत्रीय असंतुलन: औद्योगीकरण और हरित क्रांति का लाभ कुछ ही राज्यों (जैसे पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र) तक सीमित रहा, जिससे क्षेत्रीय विषमताएं बढ़ीं।
- कृषि की उपेक्षा (दूसरी योजना के बाद): दूसरी योजना में भारी उद्योगों पर अत्यधिक जोर देने से कृषि क्षेत्र पिछड़ गया, जिससे खाद्य संकट पैदा हुआ।
- बेरोजगारी और गरीबी: यद्यपि वृद्धि दर बढ़ी, लेकिन यह “रोजगार विहीन विकास” (Jobless Growth) साबित हुआ। गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की संख्या में पर्याप्त कमी नहीं आई।
योजना आयोग बनाम नीति आयोग (Comparison Table)
1 जनवरी 2015 को योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना की गई। UPSC के लिए इन दोनों के बीच का अंतर समझना बहुत महत्वपूर्ण है।
| आधार (Parameters) | योजना आयोग (Planning Commission) | नीति आयोग (NITI Aayog) |
| दृष्टिकोण (Approach) | टॉप-डाउन दृष्टिकोण (ऊपर से नीचे) | बॉटम-अप दृष्टिकोण (नीचे से ऊपर) |
| राज्यों की भूमिका | राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) के माध्यम से सीमित भूमिका। | गवर्निंग काउंसिल के माध्यम से राज्यों की सक्रिय और समान भागीदारी। |
| धन आवंटन | मंत्रालयों और राज्यों को धन आवंटित करने की शक्ति थी। | धन आवंटित करने की कोई शक्ति नहीं; यह शक्ति वित्त मंत्रालय के पास है। |
| प्रकृति (Nature) | एक आदेशात्मक निकाय के रूप में कार्य करता था। | एक थिंक-टैंक (Think-Tank) और सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करता है। |
| योजना की अवधि | 5 वर्ष (पंचवर्षीय योजनाएँ)। | 15-वर्षीय विजन, 7-वर्षीय रणनीति और 3-वर्षीय एक्शन एजेंडा। |
समसामयिक मामले और वर्तमान परिप्रेक्ष्य (Current Affairs Integration 2024-2026)
वर्तमान में भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य (Viksit Bharat @2047) पर काम कर रहा है। आज पारंपरिक पंचवर्षीय योजनाएँ मौजूद नहीं हैं, लेकिन नियोजन का स्वरूप बदल गया है:
- विजन 2047 दस्तावेज़: नीति आयोग 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था को $30 ट्रिलियन तक ले जाने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार कर रहा है। यह पुरानी पांच-वर्षीय प्रणाली की तुलना में अधिक दूरदर्शी है।
- सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism): नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठकों (2024-2025) में राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार नीतियां बनाने का अधिकार दिया जा रहा है।
- डेटा-संचालित नियोजन: नीति आयोग विभिन्न सूचकांक (जैसे- SDG Index, Health Index, Export Preparedness Index) जारी करता है, जो राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) को बढ़ावा देते हैं।
नियोजन के समक्ष प्रमुख चुनौतियां
यद्यपि नियोजन का मॉडल बदल गया है, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई কাঠামोगत (structural) चुनौतियां मौजूद हैं:
- राजकोषीय घाटा और संसाधन जुटाना: महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी की आवश्यकता होती है। सीमित कर-आधार (Tax Base) के कारण सरकार के लिए संसाधन जुटाना आज भी एक बड़ी चुनौती है।
- केंद्र-राज्य विवाद: जीएसटी (GST) मुआवजे और संसाधनों के वितरण को लेकर कई गैर-बीजेपी शासित राज्यों और केंद्र के बीच अक्सर तनाव देखा जाता है, जो राष्ट्रीय नियोजन को बाधित करता है।
- अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (Informal Economy): भारत का लगभग 80% से अधिक कार्यबल अनौपचारिक क्षेत्र में है। इन तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और इनका सटीक डेटा जुटाना कठिन है।
- वैश्विक आर्थिक झटके (Global Shocks): भू-राजनीतिक तनाव (जैसे रूस-यूक्रेन या मध्य-पूर्व संकट), आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और वैश्विक मंदी भारत की घरेलू योजनाओं को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं।
- जलवायु परिवर्तन: विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। अत्यधिक औद्योगीकरण के कारण प्रदूषण और संसाधनों का क्षरण हो रहा है।
आधुनिक नियोजन से जुड़ी सरकारी योजनाएं
भारत सरकार ने पुरानी पंचवर्षीय योजनाएँ बंद कर दी हैं, लेकिन क्षेत्रीय विकास के लिए कई विशिष्ट और लक्षित अंब्रेला योजनाएं (Umbrella Schemes) लागू की हैं:
- पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti – 2021): यह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान है। यह 16 मंत्रालयों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाता है ताकि परियोजनाओं की योजना और निष्पादन एकीकृत तरीके से हो सके।
- PLI योजना (Production Linked Incentive – 2020): भारत को वैश्विक विनिर्माण हब (Manufacturing Hub) बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 14 प्रमुख क्षेत्रों में यह योजना लागू की गई है।
- आत्मनिर्भर भारत अभियान (2020): कोविड-19 के बाद अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और भारत को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए यह समग्र आर्थिक पैकेज घोषित किया गया था।
- राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP): ब्राउनफील्ड (Brownfield) बुनियादी ढांचा संपत्तियों को पट्टे पर देकर नए इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए धन जुटाने की यह एक अभिनव योजना है।
आगे की राह
UPSC मुख्य परीक्षा के उत्तर के लिए एक सकारात्मक और व्यावहारिक ‘आगे की राह’ लिखना आवश्यक है:
- विकेंद्रीकृत नियोजन: ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है (73वें और 74वें संशोधन का पूर्ण कार्यान्वयन)।
- रोजगार केंद्रित विकास: केवल GDP के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, विनिर्माण (Manufacturing) और MSME क्षेत्र को बढ़ावा देना चाहिए जो अधिक रोजगार पैदा करते हैं।
- मानव पूंजी में निवेश: शिक्षा (NEP 2020 का प्रभावी कार्यान्वयन) और स्वास्थ्य सेवा (GDP का कम से कम 2.5-3%) में निवेश बढ़ाना भविष्य के विकास की कुंजी है।
- तकनीक का उपयोग: एआई (AI), ब्लॉकचेन और बिग डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार और लीकेज को रोका जाना चाहिए (जैसे- JAM Trinity)।
निष्कर्ष (Conclusion)
निष्कर्षतः, पंचवर्षीय योजनाएँ स्वतंत्र भारत के आर्थिक इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय रही हैं। इन्होंने एक नवजात और गरीब राष्ट्र को एक मजबूत, औद्योगिक और कृषि रूप से आत्मनिर्भर देश में बदलने का आधार तैयार किया। यद्यपि लाल फीताशाही और कठोर केंद्रीयकरण जैसी इसकी कुछ कमियां थीं, लेकिन उस समय की भू-राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों में यह एक आवश्यक कदम था। आज नीति आयोग के नेतृत्व में भारत का वर्तमान विकास मॉडल अधिक लचीला, समावेशी और सहकारी संघवाद पर आधारित है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास (UPSC Prelims PYQs)
प्रश्न 1. भारत में “योजना अवकाश” (Plan Holiday) की अवधि क्या थी? (UPSC 2013)
A) 1965-1968
B) 1966-1969
C) 1967-1970
D) 1978-1980
उत्तर: B
व्याख्या: 1966-1969 के बीच तीन वार्षिक योजनाएं लागू की गईं। इसे योजना अवकाश कहा गया क्योंकि तीसरी योजना के बुरी तरह विफल होने के बाद चौथी योजना को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था।
प्रश्न 2. भारत की द्वितीय पंचवर्षीय योजना किस मॉडल पर आधारित थी? (UPSC 2008)
A) हेरोड-डोमर मॉडल
B) पी.सी. महालनोबिस मॉडल
C) गाडगिल मॉडल
D) वी.के.आर.वी. राव मॉडल
उत्तर: B
व्याख्या: दूसरी योजना (1956-1961) पी.सी. महालनोबिस के 4-सेक्टर मॉडल पर आधारित थी, जिसने भारी उद्योगों के विकास पर जोर दिया।
प्रश्न 3. राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) का गठन कब हुआ था? (UPSC 2011)
A) 1950
B) 1951
C) 1952
D) 1954
उत्तर: C
व्याख्या: अगस्त 1952 में योजना आयोग के तहत राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए NDC का गठन किया गया था।
प्रश्न 4. ‘गरीबी हटाओ’ का नारा किस पंचवर्षीय योजना के दौरान दिया गया था? (UPSC 2015)
A) तीसरी
B) चौथी
C) पांचवीं
D) छठी
उत्तर: C
व्याख्या: पांचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-78) के दौरान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गरीबी उन्मूलन को मुख्य उद्देश्य बनाते हुए यह नारा दिया था।
प्रश्न 5. बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) का मुख्य उद्देश्य क्या था? (UPSC 2014)
A) समावेशी विकास और गरीबी में कमी
B) तीव्र, धारणीय (sustainable) और अधिक समावेशी विकास
C) रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास
D) कृषि और औद्योगिक विकास में संतुलन
उत्तर: B
व्याख्या: बारहवीं योजना का केंद्रीय विषय “तीव्र, अधिक समावेशी और सतत विकास” (Faster, More Inclusive and Sustainable Growth) था।
UPSC मुख्य परीक्षा विगत वर्ष प्रश्न (UPSC Mains PYQs Model Answers)
प्रश्न 1. यद्यपि भारत ने योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग की स्थापना की है, लेकिन नियोजन के मूलभूत उद्देश्य आज भी वही हैं। आलोचनात्मक विश्लेषण करें। (150 शब्द)
मॉडल उत्तर:
प्रस्तावना: 2015 में योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग का गठन किया गया। यह बदलाव “वन साइज फिट्स ऑल” (एक आकार सभी के लिए उपयुक्त) के पुराने दृष्टिकोण से हटकर “सहकारी संघवाद” की ओर एक कदम था।
मुख्य भाग:
बदलाव (संस्थागत): योजना आयोग केंद्र द्वारा राज्यों पर नीतियां थोपता था और उसे फंड आवंटन का अधिकार था। नीति आयोग केवल एक थिंक-टैंक है जो राज्यों को नीति निर्माण में समान भागीदार (गवर्निंग काउंसिल के माध्यम से) बनाता है।
उद्देश्यों में निरंतरता: संस्थागत ढांचे में बदलाव के बावजूद, भारत में नियोजन के मूल लक्ष्य—आर्थिक विकास (वर्तमान में $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य), गरीबी उन्मूलन (बहुआयामी गरीबी सूचकांक पर जोर), समावेशी विकास (वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तिकरण) और आत्मनिर्भरता (मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत)—आज भी वही हैं जो पंचवर्षीय योजनाएँ के दौरान थे।
निष्कर्ष: नीति आयोग ने नियोजन के “तरीके” (Means) को बदला है, लेकिन इसके “अंतिम लक्ष्य” (Ends) भारत के संवैधानिक मूल्यों और कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के अनुरूप आज भी अपरिवर्तित हैं।
प्रश्न 2. 1991 के आर्थिक सुधारों ने भारत में नियोजन की प्रकृति को कैसे बदल दिया? स्पष्ट करें। (250 शब्द)
मॉडल उत्तर:
प्रस्तावना: 1991 का ऐतिहासिक भुगतान संतुलन संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक वाटरशेड क्षण था। इसके बाद पी.वी. नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में LPG (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) सुधार लागू किए गए, जिन्होंने आर्थिक नियोजन की पूरी दिशा बदल दी।
मुख्य भाग (नियोजन की प्रकृति में बदलाव):
- आदेशात्मक से सांकेतिक नियोजन: 1991 से पहले (विशेषकर सातवीं योजना तक), राज्य अर्थव्यवस्था का मुख्य नियंत्रक था। आठवीं पंचवर्षीय योजना के साथ, भारत सांकेतिक नियोजन (Indicative Planning) की ओर बढ़ा, जहाँ राज्य की भूमिका एक “नियंत्रक” से बदलकर “सुविधाप्रदाता” (Facilitator) की हो गई।
- निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका: ‘लाइसेंस राज’ की समाप्ति के बाद औद्योगिक विकास का जिम्मा मुख्य रूप से निजी क्षेत्र पर आ गया। सार्वजनिक क्षेत्र केवल सामरिक महत्व (जैसे रेलवे, परमाणु ऊर्जा) के क्षेत्रों तक सीमित रह गया।
- बाजार की शक्तियों पर निर्भरता: संसाधन आवंटन अब केवल योजना आयोग के निर्देश पर नहीं, बल्कि बाजार की मांग और आपूर्ति की शक्तियों (Market Forces) द्वारा निर्धारित होने लगा।
- विदेशी पूंजी का एकीकरण: एफडीआई (FDI) और एफपीआई (FPI) को मंजूरी दी गई, जिसने घरेलू नियोजन को वैश्विक आर्थिक रुझानों से जोड़ दिया।
निष्कर्ष: 1991 के सुधारों ने भारत के नियोजन को एक बंद अर्थव्यवस्था के समाजवादी मॉडल से एक खुली और प्रतिस्पर्धी बाजार अर्थव्यवस्था में बदल दिया। इसी नींव पर आज भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है।
प्रश्न 3. स्वतंत्रता के बाद से भारत की कृषि रणनीति में पंचवर्षीय योजनाओं के योगदान का मूल्यांकन करें। (150 शब्द)
मॉडल उत्तर:
प्रस्तावना: स्वतंत्रता के समय भारत भीषण खाद्य संकट का सामना कर रहा था। ऐसे में कृषि विकास को शुरुआती पंचवर्षीय योजनाएँ के केंद्र में रखा गया।
मुख्य भाग:
सकारात्मक योगदान:
- पहली योजना में भाखड़ा नांगल जैसे बांधों ने सिंचाई क्षमता बढ़ाई।
- 1960 के दशक (योजना अवकाश के दौरान) हरित क्रांति की शुरुआत हुई, जिसमें HYV बीजों और उर्वरकों के उपयोग ने भारत को गेहूं और चावल में आत्मनिर्भर बनाया।
- बाद की योजनाओं (जैसे 11वीं और 12वीं) में ‘राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ (RKVY) के माध्यम से कृषि को अधिक आधुनिक बनाने का प्रयास किया गया।चुनौतियां: दूसरी योजना में भारी उद्योग पर अति-निर्भरता ने कृषि को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा, हरित क्रांति का लाभ केवल गेहूं-चावल और पंजाब-हरियाणा जैसे क्षेत्रों तक सीमित रहा, जिससे दलहन/तिलहन का उत्पादन पिछड़ गया।
निष्कर्ष: नियोजन ने भारत को अकाल की स्थिति से निकालकर खाद्य अधिशेष (Food Surplus) देश बना दिया, लेकिन वर्तमान में जलवायु परिवर्तन और घटती जोत के संदर्भ में “सदाबहार क्रांति” (Evergreen Revolution) की आवश्यकता है।
प्रैक्टिस सेक्शन (Practice Section)
10 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
- किस योजना के दौरान भारत ने ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था’ (Mixed Economy) का विकल्प चुना?A) पहली B) दूसरी C) तीसरी D) चौथी(उत्तर: B – औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 के माध्यम से)
- रोलिंग प्लान (Rolling Plan) की अवधारणा का प्रतिपादन किसने किया था?A) गुन्नार मिर्डल B) पी.सी. महालनोबिस C) अमर्त्य सेन D) मनमोहन सिंह(उत्तर: A)
- चौथी पंचवर्षीय योजना किस मॉडल पर आधारित थी?A) हेरोड-डोमर B) महालनोबिस C) अशोक रुद्र और एलन मन्ने D) जॉन डब्ल्यू मिलर(उत्तर: C)
- ‘समावेशी विकास’ (Inclusive Growth) का लक्ष्य पहली बार किस योजना में स्पष्ट रूप से रखा गया?A) 9वीं B) 10वीं C) 11वीं D) 12वीं(उत्तर: C)
- योजना आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष कौन थे?A) जवाहरलाल नेहरू B) गुलजारीलाल नंदा C) वल्लभभाई पटेल D) सी.डी. देशमुख(उत्तर: B)
- 20-सूत्रीय आर्थिक कार्यक्रम पहली बार किस वर्ष शुरू किया गया था?A) 1969 B) 1975 C) 1980 D) 1991(उत्तर: B – पांचवीं योजना के दौरान)
- स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना किस पंचवर्षीय योजना में शुरू हुई?A) सातवीं B) आठवीं C) नौवीं D) दसवीं(उत्तर: C)
- किस पंचवर्षीय योजना का वास्तविक विकास दर लक्ष्य से अधिक रहा?A) पहली B) तीसरी C) चौथी D) नौवीं(उत्तर: A – लक्ष्य 2.1% था, प्राप्ति 3.6% हुई)
- भारत में विकेंद्रीकृत नियोजन का आधार किस संविधान संशोधन ने रखा?A) 42वां B) 44वां C) 73वां और 74वां D) 86वां(उत्तर: C)
- निम्नलिखित में से कौन नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल का हिस्सा नहीं है?A) सभी राज्यों के मुख्यमंत्री B) उपराज्यपाल (UTs) C) राष्ट्रपति D) प्रधानमंत्री(उत्तर: C)
5 मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Questions – 150/250 Words)
- “भारत में पंचवर्षीय योजनाएँ आर्थिक विकास का एक शक्तिशाली इंजन थीं, लेकिन वे सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में आंशिक रूप से ही सफल रहीं।” टिप्पणी करें।
- नीति आयोग का 15-वर्षीय विजन पारंपरिक पंचवर्षीय योजनाओं से किस प्रकार भिन्न और श्रेष्ठ है?
- पी.सी. महालनोबिस को ‘भारतीय नियोजन का वास्तुकार’ क्यों कहा जाता है? उनके द्वारा सुझाए गए मॉडल की वर्तमान प्रासंगिकता पर चर्चा करें।
- भारत की 11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजना के केंद्रीय विषय ‘समावेशी विकास’ की अवधारणा और इसकी उपलब्धियों का मूल्यांकन करें।
- “सहकारी संघवाद के बिना भारत में प्रभावी आर्थिक नियोजन संभव नहीं है।” नीति आयोग की भूमिका के संदर्भ में इस कथन का परीक्षण करें।
उत्तर लेखन अभ्यास (Answer Writing Practice – 5 Structured Frameworks)
यहां ऊपर दिए गए 5 प्रश्नों के संक्षिप्त ढांचे (Frameworks) दिए गए हैं, जो छात्रों को उत्तर लिखने में मदद करेंगे:
उत्तर 1 का ढांचा:
- प्रस्तावना: पंचवर्षीय योजनाओं के दोहरे लक्ष्य (आर्थिक वृद्धि और सामाजिक न्याय) का उल्लेख करें।
- बॉडी (आर्थिक वृद्धि): उद्योगों की स्थापना, कृषि उत्पादन में वृद्धि (हरित क्रांति), बुनियादी ढांचे का विकास (उदाहरण दें)।
- बॉडी (सामाजिक न्याय में विफलता): बढ़ती आय असमानता, क्षेत्रीय विषमता, गरीब और अमीर के बीच की खाई, ‘ट्रिकल-डाउन’ थ्योरी का विफल होना।
- निष्कर्ष: सरकार के वर्तमान प्रयासों (जैसे DBT, जन धन योजना) के साथ निष्कर्ष निकालें जो सीधे अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहे हैं।
उत्तर 2 का ढांचा:
- प्रस्तावना: नीति आयोग और उसके 15-वर्षीय विजन, 7-वर्षीय रणनीति, 3-वर्षीय एक्शन एजेंडा का परिचय दें।
- भिन्नता और श्रेष्ठता: 5 वर्ष बहुत छोटी अवधि होती है बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए। 15-वर्षीय विजन दीर्घकालिक लक्ष्य तय करता है। यह बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुकूल लचीलापन (flexibility) प्रदान करता है।
- निष्कर्ष: विजन 2047 के साथ जोड़ते हुए उत्तर समाप्त करें।
उत्तर 3 का ढांचा:
- प्रस्तावना: पी.सी. महालनोबिस (ISI के संस्थापक) और दूसरी पंचवर्षीय योजना में उनके योगदान का परिचय।
- मॉडल की विशेषताएं: भारी और बुनियादी उद्योगों (Capital goods) पर ध्यान।
- प्रासंगिकता: आज भी भारत को विनिर्माण (Manufacturing) को बढ़ावा देने के लिए (Make in India, PLI schemes) उसी प्रकार के बड़े संरचनात्मक निवेश की आवश्यकता है।
- निष्कर्ष: उनके योगदान के कारण 29 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया जाता है।
उत्तर 4 का ढांचा:
- प्रस्तावना: 11वीं योजना (तीव्र और अधिक समावेशी विकास) और 12वीं योजना के लक्ष्यों को परिभाषित करें।
- समावेशी विकास का अर्थ: विकास का लाभ सभी वर्गों (विशेषकर महिलाओं, SC/ST, अल्पसंख्यकों) और सभी क्षेत्रों तक पहुंचे।
- उपलब्धियां: मनरेगा (MGNREGA) का विस्तार, RTE एक्ट, स्वास्थ्य मिशन (NRHM)।
- निष्कर्ष: समावेशी विकास एक निरंतर प्रक्रिया है, जिस पर SDG (सतत विकास लक्ष्यों) के तहत आज भी काम चल रहा है।
उत्तर 5 का ढांचा:
- प्रस्तावना: सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को परिभाषित करें।
- नियोजन में आवश्यकता क्यों: भारत एक विशाल और विविध देश है। केरल की आर्थिक आवश्यकताएं बिहार से अलग हैं। इसलिए केंद्र द्वारा थोपी गई योजनाएं सफल नहीं हो सकतीं।
- नीति आयोग की भूमिका: गवर्निंग काउंसिल, मुख्यमंत्रियों के सब-ग्रुप्स, Aspirational District Programme।
- निष्कर्ष: “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र के साथ संतुलित निष्कर्ष लिखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. भारत में पहली पंचवर्षीय योजना कब शुरू हुई थी?
भारत में पहली पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1951 को लागू की गई थी। इसे हेरोड-डोमर मॉडल पर तैयार किया गया था और इसका मुख्य फोकस कृषि और सिंचाई पर था।
Q2. कुल कितनी पंचवर्षीय योजनाएँ लागू की गई हैं?
भारत में 1951 से 2017 के बीच कुल 12 पंचवर्षीय योजनाएँ लागू की गईं। 12वीं योजना (2012-2017) इस श्रृंखला की अंतिम योजना थी।
Q3. योजना आयोग का नाम बदलकर क्या रखा गया है?
1 जनवरी 2015 को योजना आयोग को भंग कर दिया गया और उसके स्थान पर ‘नीति आयोग’ (National Institution for Transforming India) की स्थापना की गई।
Q4. रोलिंग प्लान (Rolling Plan) क्या था?
1978 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार ने पांचवीं योजना को समय से पहले समाप्त कर ‘रोलिंग प्लान’ पेश किया था। इसमें योजना का मूल्यांकन और संशोधन वार्षिक आधार पर किया जाता था।
Q5. किस पंचवर्षीय योजना में ‘गरीबी हटाओ’ का नारा दिया गया?
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पांचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-1978) के दौरान गरीबी उन्मूलन को मुख्य लक्ष्य बनाते हुए ‘गरीबी हटाओ’ का प्रसिद्ध नारा दिया था।
Q6. नीति आयोग और योजना आयोग में मुख्य अंतर क्या है?
योजना आयोग ‘ऊपर से नीचे’ (Top-down) दृष्टिकोण पर काम करता था और उसे धन आवंटित करने की शक्ति थी। नीति आयोग ‘नीचे से ऊपर’ (Bottom-up) दृष्टिकोण वाला एक सलाहकार थिंक-टैंक है, जिसे धन आवंटन का अधिकार नहीं है।
Q7. ‘योजना अवकाश’ (Plan Holiday) का क्या अर्थ है?
1966 से 1969 के बीच जब युद्ध और सूखे के कारण नियमित पांच-वर्षीय योजनाएं नहीं बन पाईं, तो अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए 3 वार्षिक योजनाएं चलाई गईं। इसी अवधि को योजना अवकाश कहा जाता है।
Q8. भारत में आर्थिक नियोजन का उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास दर को बढ़ाना, रोजगार के अवसर पैदा करना, गरीबी कम करना, आय की असमानता को दूर करना और देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
Author: MD Afjal Ansari is a UPSC aspirant with 4 years of experience as a Software Engineer. His optional subject is Public Administration.
