स्रोत (Sources)

NCERTकक्षा 11, राजनीति विज्ञान, अध्याय 7 – “संघवाद”संघीय व्यवस्था, भारतीय संघीय व्यवस्था की मूल अवधारणा
M. Laxmikanthअध्याय 14 – “Federal System”, अध्याय 56 – “Centre–State Relations”federal system in india, संघीय vs एकात्मक
D.D. Basu“Introduction to the Constitution of India” (अर्ध-संघीय अवधारणा)संघीय व्यवस्था की विशेषताएँ, एकात्मक विशेषताएँ
Granville Austin“The Indian Constitution: Cornerstone of a Nation” (सहकारी संघवाद)cooperative federalism, भारतीय संघीय व्यवस्था का दर्शन
K.C. Wheare“Federal Government” (अर्ध-संघीय शब्द का प्रयोग)unitary vs federal system, भारत में संघीय प्रणाली
सुप्रीम कोर्टS.R. Bommai vs Union of India (1994) – मूल संरचना सिद्धांतसंघीय व्यवस्था की न्यायिक व्याख्या
प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC)पहली ARC (1966) और दूसरी ARC (2005-09) रिपोर्टकेंद्र-राज्य संबंध, राज्यपाल सुधार
वित्त आयोग15वाँ वित्त आयोग (2021-26) रिपोर्टवित्तीय संघवाद, कर हस्तांतरण
PIBGST परिषद, 73वाँ-74वाँ संशोधन, नीति आयोगcurrent affairs 2024-26, सरकारी योजनाएँ
NITI आयोग“सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद” नीति दस्तावेज़संघीय व्यवस्था में सुधार के सुझाव
सरकारिया आयोगकेंद्र-राज्य संबंधों पर रिपोर्ट (1988)संघीय व्यवस्था का आलोचनात्मक मूल्यांकन
अंतर्राज्यीय परिषदअनुच्छेद 263 (गठन के बाद 2024 में पुनः सक्रिय)सहकारी संघवाद, केंद्र-राज्य विवाद

Table of Contents

भारतीय संघीय व्यवस्था परिचय –

“भारत राज्यों का एक संघ है।” यह सरल वाक्य हमारे संविधान के अनुच्छेद 1 में लिखा है, लेकिन इसके भीतर संघीय व्यवस्था का गहन दर्शन छिपा है। जब देश में विविधता चरम पर हो और एकता की डोर कमज़ोर पड़ने लगे, तब एक संतुलित संघीय ढाँचा ही राष्ट्र को जोड़े रख सकता है। यूपीएससी के छात्रों के लिए भारतीय संघीय व्यवस्था का गहन अध्ययन न सिर्फ GS पेपर-2 (राजव्यवस्था) के लिए, बल्कि GS पेपर-1 (सामाजिक विविधता), GS पेपर-3 (आर्थिक संघवाद) और निबंध में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जब केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर बहसें तेज़ हो गई हैं, जीएसटी जैसे कर सुधारों ने वित्तीय संघवाद को नई दिशा दी है, और सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों (जैसे अनुच्छेद 356 पर 2016 का फैसला) ने संघीय भावना को परिभाषित किया है तब संघीय व्यवस्था को समझना और भी आवश्यक हो जाता है। यह लेख प्रारंभिक, मुख्य और उत्तर लेखन के लिए आपका एकमात्र संदर्भ बिंदु होगा।

1. अर्थ और परिभाषा

संघीय व्यवस्था का अर्थ

संघीय व्यवस्था (Federal System) सरकार का एक ऐसा स्वरूप है जिसमें शक्तियों का विधायी एवं प्रशासनिक विभाजन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच संविधान द्वारा किया जाता है। दोनों स्तर के सरकारें अपने-अपने क्षेत्रों में स्वायत्त होती हैं और कोई भी स्तर एकदूसरे को समाप्त नहीं कर सकता। अमेरिकी राजनीतिक विचारक के.सी. व्हेयर के अनुसार, “संघीय व्यवस्था में शक्तियों का ऐसा बँटवारा होता है जहाँ केंद्र और राज्य दोनों अपने क्षेत्रों में अंतिम होते हैं।”

UPSC टिप: प्रीलिम्स में अक्सर “शक्तियों का विभाजन” और “दोहरी सरकार” जैसे लक्षण पूछे जाते हैं। मेन्स में आपको के.सी. व्हेयर और ग्रैनविल ऑस्टिन के विचारों का उल्लेख करना चाहिए।

प्रमुख विद्वानों की परिभाषाएँ

विद्वानपरिभाषा का सार
के.सी. व्हेयर“भारतीय संविधान की प्रकृति अर्ध-संघीय (Quasi-federal) है।”
डी.डी. बसु“भारतीय संविधान न तो पूर्णतः एकात्मक है और न ही पूर्णतः संघीय, बल्कि दोनों का सम्मिश्रण है।”
ग्रैनविल ऑस्टिन“भारतीय संघवाद सहकारी संघवाद है।”
आइवर जेनिंग्स“भारतीय संविधान मुख्यतः संघीय है लेकिन राष्ट्रीय एकता के लिए अद्वितीय सुरक्षा उपायों के साथ।”

संघीय व्यवस्था के मूलभूत लक्षण

  1. दोहरी सरकारें — केंद्र में संघ सरकार, राज्यों में प्रांतीय सरकारें।
  2. लिखित संविधान — सभी संघीय देशों के पास एक लिखित दस्तावेज़ होता है।
  3. शक्तियों का विभाजन — अनुच्छेद 246 और 7वीं अनुसूची के तहत तीन सूचियाँ।
  4. संविधान की सर्वोच्चता — कोई भी सरकार संविधान के बाहर नहीं जा सकती।
  5. स्वतंत्र न्यायपालिका — सुप्रीम कोर्ट संघीय विवादों का अंतिम व्याख्याकार।
  6. संविधान में संशोधन की कठोरता — संघीय संरचना को बदलने के लिए विशेष बहुमत।

2. संघीय सरकार बनाम एकात्मक सरकार

यूपीएससी की दृष्टि से यह तुलना अत्यधिक महत्वपूर्ण है। प्रीलिम्स में अक्सर “संघीय” और “एकात्मक” के बीच अंतर पूछा जाता है। मेन्स में आपको यह दिखाना होता है कि भारतीय संघीय व्यवस्था में एकात्मक विशेषताएँ क्यों और कैसे सम्मिलित की गई हैं।

आधारएकात्मक सराजसंघीय सरकार
शक्ति का स्रोतकेंद्र सरकार सर्वोच्च होती है; राज्य/स्थानीय निकाय इसी से शक्ति प्राप्त करते हैं।शक्ति संविधान से प्राप्त होती है; दोनों स्तर स्वतंत्र होते हैं।
शक्तियों का विभाजनकोई स्पष्ट विभाजन नहीं; केंद्र किसी भी क्षेत्र में कानून बना सकता है।स्पष्ट विधायी सूचियाँ (संघ, राज्य, समवर्ती)
संविधाननम्य या कठोर; आमतौर पर एक ही संविधान।लिखित और कठोर; संशोधन के लिए विशेष बहुमत।
न्यायपालिकाएकीकृत; केंद्र के अधीन।स्वतंत्र; संघीय विवादों का निर्णायक।
नागरिकताएकल नागरिकता।दोहरी नागरिकता (जैसे अमेरिका में संघीय + राज्य नागरिकता)।

भारत में स्थिति: भारत एकल नागरिकता देता है (एकात्मक विशेषता) लेकिन साथ ही शक्तियों का संवैधानिक विभाजन भी करता है (संघीय विशेषता)। यही कारण है कि डी.डी. बसु ने इसे “अर्ध-संघीय” (Quasi-federal) कहा।

संघीय व्यवस्था

3. भारतीय संविधान की संघीय विशेषताएँ

भारत का संविधान पूर्णतया संघीय न होकर एक अद्वितीय मिश्रण है। फिर भी नीचे दी गई विशेषताएँ संघीय व्यवस्था के पारंपरिक लक्षणों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करती हैं।

(क) दोहरी सरकार (Dual Government)

केंद्र में संघ सरकार और राज्यों में राज्य सरकारें। दोनों संविधान से ही अस्तित्व और शक्तियाँ प्राप्त करती हैं।

(ख) लिखित एवं कठोर संविधान

भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। संघीय प्रावधानों (जैसे राज्यों का अस्तित्व, सर्वोच्च न्यायालय, संघ-राज्य विधायी संबंध) में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों के कुल सदस्यों के बहुमत से पारित और कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा अनुमोदन आवश्यक है।

(ग) शक्तियों का विभाजन (Division of Powers)

अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची तीन सूचियाँ प्रदान करती है:

  • संघ सूची (99 विषय): रक्षा, विदेश मामले, परमाणु ऊर्जा, रेलवे, मुद्रा आदि।
  • राज्य सूची (61 विषय): पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, कृषि, सिंचाई, स्थानीय स्वशासन।
  • समवर्ती सूची (52 विषय): शिक्षा, वन, विवाह, तलाक, दंड प्रक्रिया संहिता।

(घ) संविधान की सर्वोच्चता

कोई भी कानून संविधान के विरुद्ध नहीं हो सकता। संविधान (अनुच्छेद 13) किसी भी विधि को असंवैधानिक घोषित करने का अधिकार न्यायपालिका को देता है।

(ड़) स्वतंत्र न्यायपालिका

सुप्रीम कोर्ट संघीय विवादों (केंद्र-राज्य, राज्य-राज्य) का अंतिम व्याख्याकार है। इसके न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं हटाने की प्रक्रिया कठोर है (अनुच्छेद 124)।

4. भारतीय संविधान की एकात्मक विशेषताएँ

के.सी. व्हेयर ने सही कहा कि भारत एक “अर्ध-संघीय” राज्य है। निम्नलिखित एकात्मक विशेषताएँ बताती हैं कि हमारी संघीय व्यवस्था कैसे एक मजबूत केंद्र की ओर झुकती है:

एकात्मक विशेषतासंवैधानिक प्रावधान
मजबूत केंद्रसातवीं अनुसूची में संघ सूची में सबसे महत्वपूर्ण विषय। केंद्र समवर्ती सूची में भी कानून बना सकता है।
एकल संविधानकेंद्र और राज्य दोनों के लिए एक ही संविधान। (जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को हटाने के बाद पूरे देश में एकरूपता)
एकल नागरिकतासभी नागरिक भारत की एकल नागरिकता रखते हैं; राज्य स्तर की कोई अलग नागरिकता नहीं।
एकीकृत न्यायपालिकासुप्रीम कोर्ट के शीर्ष पर एक ही पिरामिड; राज्यों के उच्च न्यायालय इसके अधीन हैं।
आपातकालीन प्रावधानराष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352), राज्य आपातकाल (356) और वित्तीय आपातकाल (360) के दौरान केंद्र राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर सकता है।
राज्यपाल की नियुक्तिराज्यपाल राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होता है और केंद्र का एजेंट माना जाता है।
अखिल भारतीय सेवाएँIAS, IPS, IFoS जैसी सेवाएँ केंद्र के अधीन होती हैं; राज्य सरकारें इन अधिकारियों को हटा नहीं सकतीं।

महत्वपूर्ण: ये एकात्मक विशेषताएँ भारतीय संघीय व्यवस्था की कमज़ोरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए एक आवश्यक सुरक्षा कवच हैं।

5. संघीय व्यवस्था का आलोचनात्मक मूल्यांकन

यह खंड UPSC मेन्स के उत्तर लेखन के लिए अत्यंत उपयोगी है। आप “भारत में संघीय व्यवस्था का स्वरूप संघीय और एकात्मक दोनों का मिश्रण है।” वाक्य से शुरू कर सकते हैं।

5.1 सकारात्मक पहलू (जो काम करता है)

  1. विविधता में एकता: 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों वाला देश कामयाब है। यह सीधे हमारी संघीय व्यवस्था की सफलता है।
  2. सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism): NITI आयोग, जीएसटी परिषद, इंटर-स्टेट काउंसिल (अनुच्छेद 263) संघीय सहयोग के मंच हैं।
  3. संवैधानिक सुरक्षा: सुप्रीम कोर्ट ने एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) में कहा कि संघवाद ‘संविधान की मूल संरचना’ का हिस्सा है। संघीय सिद्धांतों का उल्लंघन होने पर न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है।

5.2 चुनौतियाँ और समस्याएँ

चुनौती 1: केंद्र का अत्यधिक प्रभुत्व

आपातकाल (अनुच्छेद 356) का दुरुपयोग। के. संथानम के अनुसार, वित्तीय क्षेत्र में केंद्र का प्रभुत्व और योजना आयोग ने एकात्मक पूर्वाग्रह को बढ़ाया। उदाहरण: 2024 में कुछ राज्यों ने केंद्र के अनुदान में कटौती पर चिंता जताई।

चुनौती 2: राज्यपाल का विवादास्पद रोल

राज्यपाल सत्ता परिवर्तन (मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र) के समय पक्षपात के आरोपों में रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में कहा कि राज्यपाल किसी राज्य में बहुमत साबित करने के लिए अनुचित समय न दे।

चुनौती 3: वित्तीय असंतुलन

केंद्र कर एकत्रित करता है (निगम कर, आयकर, सीमा शुल्क) और राज्यों को अनुदान देता है। 15वें वित्त आयोग (2021-26) के अनुसार राज्यों की व्यय ज़िम्मेदारियाँ तो बढ़ गई हैं लेकिन कर राजस्व में हिस्सेदारी सीमित है।

चुनौती 4: केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग

ED, CBI, IT जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी राज्यों के मंत्रियों या अधिकारियों के खिलाफ करने के आरोप लगते हैं। इससे संघीय व्यवस्था में ‘सौदेबाजी संघवाद’ (बार्गेनिंग फेडरलिज़म) का रूप देखा गया है।

चुनौती 5: समवर्ती सूची का क्षरण

केंद्र समवर्ती सूची में अधिनियम बनाकर राज्यों के विषयों (जैसे शिक्षा, वन) पर कब्ज़ा कर लेता है। उदाहरण: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 — राज्यों ने अपने पाठ्यक्रम बदलने को मजबूर महसूस किया।

चुनौती 6: क्षेत्रीय असंतुलन

भाजपा मुक्त राज्यों (पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना) के साथ केंद्र के व्यवहार में भेदभाव के आराम मिलते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने अक्सर ‘केंद्र से लड़ाई’ की बात की है।

5.3 विशेषज्ञों की राय

विद्वानदृष्टिकोण
के.सी. व्हेयर“भारतीय संघ एक संघीय राज्य है, जिसमें सहायक संघीय विशेषताएँ हैं।”
पॉल एप्पलबी“भारतीय प्रणाली अत्यंत संघीय है।”
मॉरिस जोन्स“भारत में सौदेबाजी वाला संघवाद (Bargaining Federalism) है।”
ग्रैनविल ऑस्टिन“भारतीय संघवाद सहकारी संघवाद है।”

6. विकेंद्रीकरण: 73वाँ और 74वाँ संविधान संशोधन

विकेंद्रीकरण भारतीय संघीय व्यवस्था की सबसे सफल कहानी है। 1992 के 73वें और 74वें संशोधनों ने स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा दिया।

  • 73वाँ संशोधन: ग्रामीण स्थानीय निकाय (पंचायती राज) — त्रिस्तरीय व्यवस्था (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद)।
  • 74वाँ संशोधन: शहरी स्थानीय निकाय (नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत)।
  • महत्व: यह संघवाद को तीसरे स्तर (लोकल गवर्नेंस) तक ले गया। अनुच्छेद 243G और 243W ने राज्यों को शक्तियाँ हस्तांतरित करने का निर्देश दिया।

7. वर्तमान घटनाक्रम (2024-2026) — करंट अफेयर्स

घटनासंघीय व्यवस्था पर प्रभाव
जीएसटी परिषद के निर्णय (2024-25)केंद्र और राज्य मिलकर कर दरें तय करते हैं — सहकारी संघवाद का मॉडल। हालाँकि केंद्र के पास वीटो शक्ति होने से राज्य अक्सर असंतुष्ट।
अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) पर चर्चा2025 में कुछ राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने की अटकलों ने बहस छेड़ दी। सुप्रीम कोर्ट के बोम्मई मामले के दिशा-निर्देश कमज़ोर पड़ते देखे गए।
वित्त आयोग की सिफारिशें (15वाँ और 16वाँ)16वें वित्त आयोग (2026-31) के गठन की तैयारी। कर हस्तांतरण, क्षैतिज असमानताओं पर बहस। राज्यों का कहना है कि केंद्र उपकरों (cess) और अधिभारों (surcharge) के माध्यम से उनका हिस्सा कम कर रहा है।
NITI आयोग का ‘संघीय सहयोग’ पर बलनीति आयोग के CEO (2025) ने ‘सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद’ पर जोर दिया। स्कोरकार्ड और रैंकिंग राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ा रहे हैं।
पूर्वोत्तर परिषद (NEC) में विस्तार2002 के संशोधन के बाद परिषद में घटक राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 3 सदस्य शामिल हैं।

8. सरकारी योजनाएँ और पहल

योजना/निकायवर्षउद्देश्य
जीएसटी परिषद2017 (101वाँ संशोधन)कर निर्धारण में केंद्र-राज्य सहयोग; केंद्र के पास 1/3 वोट, राज्यों के पास 2/3 वोट
अंतर्राज्यीय परिषद (Inter-State Council)1990 (अनुच्छेद 263)केंद्र-राज्य विवाद सुलझाना; 2024 में फिर सक्रिय
NITI आयोग2015योजना आयोग का स्थान लिया; ‘सहकारी संघवाद’ पर बल
पंचायती राज (73वाँ संशोधन)1992ग्रामीण स्थानीय स्वशासन
नगरपालिकाएँ (74वाँ संशोधन)1992शहरी स्थानीय स्वशासन
15वाँ वित्त आयोग (2021-26)2020राज्यों को कर हस्तांतरण (42%) और अनुदान
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर समिति (2025)2025संभावित रूप से संघीय ढाँचे को प्रभावित करेगी; राज्यों के चुनाव चक्र बदलेंगे

9. आगे की राह – मेन्स उत्तर लेखन हेतु

यह अनुभाग भारतीय संघीय व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए सुझाव देता है। आप अपने मेन्स उत्तर के ‘सुझाव’ भाग में इनका उपयोग कर सकते हैं।

  1. अंतर्राज्यीय परिषद (ISC) को शक्तिशाली बनाना: इसे नियमित रूप से (वर्ष में तीन बार) बुलाया जाना चाहिए। 2024 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने ISC को अधिक प्रभावी बनाने की माँग की।
  2. राज्यपाल की नियुक्ति में पारदर्शिता: सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक समिति पैनल से चयन किया जाए। दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) ने भी यह सुझाव दिया था।
  3. राज्य सूची को मजबूत करना: समवर्ती सूची के बढ़ते दखल को रोकना। केंद्र को राज्यों की सहमति के बिना समवर्ती सूची में अधिनियम नहीं लाना चाहिए।
  4. विकेंद्रीकरण को गहरा करना: पंचायतों और नगरपालिकाओं को वास्तविक शक्तियाँ (वित्तीय, प्रशासनिक) हस्तांतरित करना। अनुच्छेद 243G के तहत 29 विषयों में से अधिकांश अभी भी राज्यों के पास हैं।
  5. वित्तीय स्वायत्तता: राज्यों को उपकरों और अधिभारों में हिस्सेदारी देना। 16वाँ वित्त आयोग इस दिशा में कदम उठा सकता है।

10. UPSC पिछले वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) PYQs

प्रश्न 1: पूर्वोत्तर परिषद (NEC) की स्थापना पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम, 1971 द्वारा की गई थी। 2002 में NEC अधिनियम में संशोधन के बाद, परिषद में निम्नलिखित में से कौन से सदस्य शामिल हैं? (UPSC Prelims 2024)

  1. घटक राज्य के राज्यपाल
  2. घटक राज्य के मुख्यमंत्री
  3. भारत के राष्ट्रपति द्वारा नामित तीन सदस्य
  4. भारत के गृह मंत्री

नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4

सही उत्तर: (d) 1, 2, 3 और 4

व्याख्या: 2002 के संशोधन के बाद NEC में सभी चारों सदस्य शामिल हैं। यह भारतीय संघीय व्यवस्था में क्षेत्रीय सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

प्रश्न 2: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (UPSC Prelims 2021)

  1. संविधान की समवर्ती सूची में सूचीबद्ध विषयों पर राज्य विधानमंडल कानून बना सकते हैं।
  2. संविधान की समवर्ती सूची में सूचीबद्ध किसी विषय पर केंद्र द्वारा बनाए गए कानून का राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून पर प्रभाव होता है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2

सही उत्तर: (c) 1 और 2 दोनों

व्याख्या: समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। यदि संघर्ष होता है, तो केंद्रीय कानून प्रभावी होता है (अनुच्छेद 254)।

प्रश्न 3: भारत में दल-बदल विरोधी कानून के सन्दर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (UPSC Prelims 2018)

  1. यह कानून विनिर्दिष्ट करता है कि कोई नामनिर्दिष्ट (मनोनीत) विधायक सदन में नियुक्त होने के छह मास के अन्दर किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो सकता है।
  2. यह कानून कोई समयावधि नहीं देता जिसके अन्दर पीठासीन अधिकारी को दल-बदल के मामले का फैसला करना होता है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2

सही उत्तर: (b) केवल 2

व्याख्या: मनोनीत सदस्य 6 माह के भीतर दल में शामिल हो सकता है, बाद में अयोग्य हो जाता है। पीठासीन अधिकारी के पास निर्णय लेने की कोई समयसीमा नहीं।

प्रश्न 4: निम्नलिखित में से कौन सी संघीय व्यवस्था की विशेषता नहीं है?
(a) लिखित संविधान
(b) शक्तियों का विभाजन
(c) लचीला संविधान
(d) स्वतंत्र न्यायपालिका

सही उत्तर: (c) लचीला संविधान

व्याख्या: संघीय व्यवस्था में संविधान कठोर (नम्य नहीं) होता है।

प्रश्न 5: भारतीय संविधान की निम्नलिखित में से कौन सी विशेषता एकात्मक शासन प्रणाली की ओर संकेत करती है?
(a) दोहरी सरकार
(b) एकल नागरिकता
(c) शक्तियों का विभाजन
(d) स्वतंत्र न्यायपालिका

सही उत्तर: (b) एकल नागरिकता

व्याख्या: एकल नागरिकता एकात्मक विशेषता है। संघीय व्यवस्थाओं में (जैसे अमेरिका) दोहरी नागरिकता होती है।

मुख्य परीक्षा (Mains) PYQs

प्रश्न 1: “भारतीय संविधान का स्वरूप संघीय है लेकिन उसमें एकात्मक लक्षणों की प्रधानता है।” इस कथन की विवेचना कीजिए। (UPSC Mains 2016, 15 अंक)

मॉडल उत्तर:

प्रस्तावना: भारतीय संविधान संघीय और एकात्मक दोनों प्रकार की विशेषताओं का अद्वितीय मिश्रण है। डी.डी. बसु के अनुसार, यह न तो पूर्णतया संघीय है और न ही पूर्णतया एकात्मक।

मुख्य भाग:

  • संघीय लक्षण: लिखित एवं कठोर संविधान, शक्तियों का विभाजन (7वीं अनुसूची), स्वतंत्र न्यायपालिका, दोहरी सरकार का अस्तित्व।
  • एकात्मक लक्षण: एकल संविधान, एकल नागरिकता, मजबूत केंद्र (संघ सूची में 99 विषय), राज्यपाल की केंद्र द्वारा नियुक्ति, आपातकालीन प्रावधान (352, 356, 360), अखिल भारतीय सेवाएँ।
  • निष्कर्ष: के.सी. व्हेयर ने इसे ‘अर्ध-संघीय’ (Quasi-federal) कहा। भारतीय संघीय व्यवस्था राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए आवश्यक एकात्मक पहलुओं को साथ लेकर चलती है।

निष्कर्ष: संविधान निर्माताओं ने भारत की विविधता को देखते हुए ‘सहकारी संघवाद’ (ग्रैनविल ऑस्टिन) का मॉडल अपनाया।

प्रश्न 2: क्या भारत की संघीय व्यवस्था सहकारी संघवाद से सौदेबाजी संघवाद की ओर बढ़ रही है? चर्चा कीजिए। (UPSC Mains 2018, 12.5 अंक)

मॉडल उत्तर:

प्रस्तावना: सहकारी संघवाद में केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं, जबकि सौदेबाजी संघवाद में राजनीतिक सौदों और मोल-भाव के आधार पर संबंध बनते हैं।

मुख्य भाग:

  • सहकारी संघवाद के उदाहरण: जीएसटी परिषद, NITI आयोग, इंटर-स्टेट काउंसिल, वित्त आयोग।
  • सौदेबाजी संघवाद के संकेत:
    • ED, CBI, IT जैसी एजेंसियों का विपक्षी राज्यों के नेताओं के खिलाफ उपयोग।
    • राज्यपाल की भूमिका (कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में सरकार गिराने के प्रयास)।
    • विशेष दर्जे (जम्मू-कश्मीर का अनुच्छेद 370 हटाना) बिना राज्य की सहमति के।
    • केंद्रीय योजनाओं का राज्यों पर थोपा जाना।
  • निष्कर्ष: मॉरिस जोन्स ने भारत को ‘सौदेबाजी संघवाद’ का उदाहरण बताया। वर्तमान में दोनों प्रवृत्तियाँ साथ-साथ चल रही हैं। ‘सहकारी संघवाद’ को बढ़ाने के लिए ISC को मजबूत बनाना होगा।

प्रश्न 3: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों ने भारतीय संघीय व्यवस्था में किस प्रकार योगदान दिया? (UPSC Mains 2020, 10 अंक)

मॉडल उत्तर:

प्रस्तावना: 1992 के 73वें और 74वें संशोधनों ने स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा दिया, जिससे भारतीय संघीय व्यवस्था में ‘तीसरा स्तर’ जुड़ गया।

मुख्य भाग:

  • 73वाँ संशोधन: ग्रामीण स्तर पर त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (ग्राम, ब्लॉक, जिला)। अनुच्छेद 243G के तहत 29 विषयों को पंचायतों को हस्तांतरित करने का प्रावधान।
  • 74वाँ संशोधन: शहरी स्तर पर नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत। अनुच्छेद 243W के तहत 18 विषयों का हस्तांतरण।
  • योगदान: लोकतंत्र का गहराकरण, सत्ता का विकेंद्रीकरण, जमीनी स्तर पर भागीदारी, महिलाओं के लिए 1/3 आरक्षण।
  • सीमाएँ: अधिकांश राज्यों ने वास्तविक शक्तियाँ (वित्त, कर्मचारी) हस्तांतरित नहीं कीं। राज्य सरकारें अक्सर पंचायतों के चुनाव टालती हैं।

निष्कर्ष: ये संशोधन संघीय व्यवस्था को जमीनी स्तर तक ले गए। इन्हें ‘भारतीय संघवाद का स्वर्णिम अध्याय’ कहा जाता है।

11. अभ्यास प्रश्न (Practice Questions)

MCQ — 10 प्रश्न

  1. निम्नलिखित में से कौन सी संघीय व्यवस्था की विशेषता नहीं है?
    a) लिखित संविधान
    b) लचीला संविधान
    c) शक्तियों का विभाजन
    d) स्वतंत्र न्यायपालिका
  2. भारत में संघीय व्यवस्था का कौन सा लक्षण सबसे अधिक एकात्मक है?
    a) दोहरी सरकार
    b) एकल नागरिकता
    c) सर्वोच्च न्यायालय
    d) संविधान की कठोरता
  3. ‘भारतीय संघवाद सहकारी संघवाद है’ यह कथन किसके द्वारा दिया गया?
    a) के.सी. व्हेयर
    b) डी.डी. बसु
    c) ग्रैनविल ऑस्टिन
    d) आइवर जेनिंग्स
  4. निम्नलिखित में से किस आपातकाल के दौरान केंद्र राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर सकता है?
    a) राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352)
    b) राज्य आपातकाल (अनुच्छेद 356)
    c) वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360)
    d) उपरोक्त सभी
  5. 73वें संशोधन के अनुसार पंचायती राज की कितनी स्तरीय व्यवस्था है?
    a) दो
    b) तीन
    c) चार
    d) पाँच
  6. जीएसटी परिषद के निर्णय किस आधार पर लिए जाते हैं?
    a) केंद्र के पास 2/3 और राज्यों के पास 1/3 वोट
    b) केंद्र के पास 1/3 और राज्यों के पास 2/3 वोट
    c) केवल केंद्र का वोट
    d) केवल राज्यों का वोट
  7. निम्नलिखित में से कौन सा विषय राज्य सूची में शामिल है?
    a) रक्षा
    b) परमाणु ऊर्जा
    c) पुलिस
    d) रेलवे
  8. ‘बार्गेनिंग फेडरलिज़म’ (सौदेबाजी संघवाद) की अवधारणा किससे संबंधित है?
    a) ग्रैनविल ऑस्टिन
    b) के.सी. व्हेयर
    c) मॉरिस जोन्स
    d) पॉल एप्पलबी
  9. सर्वोच्च न्यायालय ने किस मामले में संघवाद को ‘संविधान की मूल संरचना’ का हिस्सा बताया?
    a) केशवानंद भारती मामला (1973)
    b) एस.आर. बोम्मई मामला (1994)
    c) मेनका गांधी मामला (1978)
    d) गोलकनाथ मामला (1967)
  10. भारत में अखिल भारतीय सेवाएँ (IAS, IPS) किस सूची के विषय में आती हैं?
    a) संघ सूची
    b) राज्य सूची
    c) समवर्ती सूची
    d) अवशिष्ट सूची

उत्तर: 1(b), 2(b), 3(c), 4(d), 5(b), 6(b), 7(c), 8(c), 9(b), 10(a)

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (5 प्रश्न)

  1. संघीय व्यवस्था की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करें। भारतीय संघीय व्यवस्था संयुक्त राज्य अमेरिका की संघीय व्यवस्था से किस प्रकार भिन्न है? (200 शब्द)
  2. भारतीय संविधान में सम्मिलित एकात्मक विशेषताओं की चर्चा कीजिए। क्या ये विशेषताएँ भारतीय संघीय व्यवस्था की सफलता में बाधक हैं? (200 शब्द)
  3. हाल के वर्षों में केंद्र-राज्य संबंधों में बढ़ते तनाव के क्या कारण हैं? सुधार के सुझाव दीजिए। (200 शब्द)
  4. 73वें और 74वें संविधान संशोधनों ने भारतीय संघीय व्यवस्था को मजबूत किया है।” इस कथन की समीक्षा कीजिए। (200 शब्द)
  5. वित्तीय संघवाद से क्या तात्पर्य है? भारत में वित्तीय संघवाद के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ कौन-सी हैं? (200 शब्द)

12. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. भारतीय संघीय व्यवस्था की प्रकृति क्या है?
भारतीय संघीय व्यवस्था पूर्णतः संघीय न होकर ‘अर्ध-संघीय’ (Quasi-federal) है। के.सी. व्हेयर के अनुसार इसमें सहायक संघीय विशेषताएँ हैं, और यह राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक एकात्मक लक्षणों से युक्त है।

2. संघीय सरकार और एकात्मक सरकार में मुख्य अंतर क्या है?
संघीय सरकार में शक्तियाँ केंद्र और राज्यों के बीच बँटी होती हैं, जबकि एकात्मक सरकार में सभी शक्तियाँ केंद्र के पास होती हैं। संघीय व्यवस्था में लिखित एवं कठोर संविधान होता है, जबकि एकात्मक में संविधान नम्य हो सकता है।

3. भारतीय संविधान की प्रमुख संघीय विशेषताएँ कौन-सी हैं?
प्रमुख संघीय विशेषताएँ हैं: दोहरी सरकार, लिखित एवं कठोर संविधान, शक्तियों का विभाजन (7वीं अनुसूची), संविधान की सर्वोच्चता, स्वतंत्र न्यायपालिका और द्विसदनीय विधायिका (राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है)।

4. क्या भारत एक संघीय देश है?
हाँ, भारत एक संघीय देश है, लेकिन इसमें मजबूत एकात्मक प्रवृत्तियाँ हैं। संविधान के अनुच्छेद 1 में इसे ‘राज्यों का संघ’ कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बोम्मई मामले (1994) में संघवाद को ‘संविधान की मूल संरचना’ का हिस्सा बताया।

5. संघीय व्यवस्था की विशेषताएँ (Features of federal system) क्या हैं?
प्रमुख विशेषताएँ: (1) दोहरी सरकार (2) लिखित संविधान (3) शक्तियों का विभाजन (4) संविधान की सर्वोच्चता (5) स्वतंत्र न्यायपालिका (6) संविधान की कठोरता।

6. भारतीय संविधान की एकात्मक विशेषताएँ कौन-सी हैं?
प्रमुख एकात्मक विशेषताएँ हैं: मजबूत केंद्र, एकल संविधान, एकल नागरिकता, राज्यपाल की केंद्र द्वारा नियुक्ति, आपातकालीन प्रावधान (अनुच्छेद 352, 356, 360), अखिल भारतीय सेवाएँ, एकीकृत न्यायपालिका और संसद का राज्य सूची पर कानून बनाने का अधिकार।

7. भारतीय संघीय व्यवस्था के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
प्रमुख चुनौतियाँ हैं: (1) केंद्र का अत्यधिक प्रभुत्व और अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग (2) राज्यपाल की विवादास्पद भूमिका (3) वित्तीय असंतुलन (4) केंद्रीय एजेंसियों (ED, CBI) का पक्षपातपूर्ण उपयोग (5) समवर्ती सूची के माध्यम से राज्यों के विषयों में दखल (6) क्षेत्रीय असंतुलन।

8. सहकारी संघवाद और सौदेबाजी संघवाद में क्या अंतर है?
सहकारी संघवाद में केंद्र और राज्य मिलकर सहयोग से काम करते हैं (जैसे जीएसटी परिषद)। सौदेबाजी संघवाद में राजनीतिक सौदों, मोल-भाव और सत्ता के खेल पर आधारित संबंध होते हैं। मॉरिस जोन्स ने भारत को सौदेबाजी संघवाद का उदाहरण बताया।

9. 73वें और 74वें संशोधनों ने संघीय व्यवस्था को कैसे प्रभावित किया?
1992 के इन संशोधनों ने स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक दर्जा देकर भारतीय संघीय व्यवस्था में तीसरा स्तर (पंचायत और नगरपालिका) जोड़ा। इससे लोकतंत्र का गहराकरण हुआ और सत्ता का विकेंद्रीकरण बढ़ा।

10. UPSC परीक्षा के लिए संघीय व्यवस्था पर किन मामलों का अध्ययन करें?
प्रमुख मामले: एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) (संघवाद मूल संरचना), केशवानंद भारती (1973) (मूल संरचना सिद्धांत), रामानुजम कमेटी (केंद्र-राज्य संबंध), राज्यपाल की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश (2016)

निष्कर्ष

भारतीय संघीय व्यवस्था विश्व की सबसे जटिल और अद्वितीय शासन प्रणालियों में से एक है। यह न तो पूर्णतया अमेरिकी मॉडल जैसी है और न ही पूर्णतया एकात्मक। डी.डी. बसु के शब्दों में, “यह दोनों का सम्मिश्रण है।” इस प्रणाली ने 70 से अधिक वर्षों में भारत जैसे अत्यधिक विविधतापूर्ण राष्ट्र को न केवल एकजुट रखा है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को जमीनी स्तर तक पहुँचाया है।

हालाँकि, केंद्र-राज्य संबंधों में बढ़ते तनाव, वित्तीय असंतुलन और राज्यपाल जैसे पदों का विवादास्पद उपयोग इस प्रणाली के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत करते हैं। फिर भी, जीएसटी परिषद, NITI आयोग और अंतर्राज्यीय परिषद जैसे मंच ‘सहकारी संघवाद’ की ओर बढ़ने के सकारात्मक संकेत हैं।

आगे की राह: राज्यों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता, राज्यपाल की नियुक्ति में पारदर्शिता और 73वें-74वें संशोधनों के पूर्ण क्रियान्वयन से भारतीय संघीय व्यवस्था और मजबूत होगी। यूपीएससी के छात्रों के लिए यह विषय न केवल परीक्षा की दृष्टि से, बल्कि एक जागरूक नागरिक के रूप में समझने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Author: MD Afjal Ansari is a UPSC aspirant with 4 years of experience as a Software Engineer. His optional subject is Public Administration.

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