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परिचय- Cabinet Committees क्या हैं और UPSC में क्यों महत्वपूर्ण

प्रिय UPSC aspirants,

आज हम भारतीय राजव्यवस्था के एक ऐसे व्यावहारिक पहलू पर चर्चा करेंगे जो संविधान में तो सीधे नहीं लिखा, लेकिन सरकार की दैनिक कार्यप्रणाली की रीढ़ है। यह है Cabinet Committees यानी मंत्रिमंडल समितियाँ।

जब केन्द्रीय मंत्रिपरिषद का आकार बढ़ता है तो हर मंत्री को हर मुद्दे पर बुलाना संभव नहीं होता। ऐसे में निर्णय प्रक्रिया को त्वरित एवं कुशल बनाने के लिए Cabinet Committees का गठन किया जाता है। ये समितियाँ मंत्रिमंडल के छोटे समूह होते हैं जिन्हें विशिष्ट विषयों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया जाता है।

UPSC परीक्षा के तीनों चरणों में यह विषय प्रासंगिक है। Prelims में तथ्यात्मक प्रश्न, Mains में शासन प्रक्रिया का विश्लेषण और Interview में व्यावहारिक प्रशासनिक दृष्टिकोण परखा जाता है।

Cabinet Committees

Cabinet Committees की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ब्रिटिश विरासत से भारतीय अनुकूलन तक

Cabinet Committees की अवधारणा मूल रूप से ब्रिटेन की शासन प्रणाली से ली गई है। ब्रिटेन में 19वीं शताब्दी के अंत में कैबिनेट के बढ़ते कार्यभार को देखते हुए समितियों का गठन प्रारंभ हुआ।

भारत में स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा ने मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 77(3) के तहत राष्ट्रपति सरकार के कार्य संचालन के नियम बना सकते हैं। इसी प्रावधान के तहत Cabinet Committees का गठन किया जाता है।

प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में गठन

प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सबसे पहले Cabinet Committee on Parliamentary Affairs और Cabinet Committee on Economic Affairs का गठन किया। धीरे-धीरे विकास, सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों के लिए अन्य समितियाँ बनाई गईं।

संविधान सभा में बहस

संविधान सभा में सदस्यों ने प्रश्न उठाया कि क्या Cabinet Committees मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत को कमजोर करेंगी। इस पर स्पष्टीकरण दिया गया कि समितियाँ मंत्रिमंडल के अधीनस्थ होती हैं और उनके निर्णय मंत्रिमंडल के निर्णय माने जाते हैं।

संवैधानिक आधार: Cabinet Committees को संविधान कहाँ अनुमति देता है

अनुच्छेद 77(3)

अनुच्छेद 77(3) – राष्ट्रपति भारत सरकार के कार्यों के अधिक सुविधाजनक संचालन के लिए नियम बना सकते हैं। Cabinet Committees इसी प्रावधान के तहत बनाई गई हैं।

अनुच्छेद 78

अनुच्छेद 78 – प्रधानमंत्री का कर्तव्य है कि वह मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को दें। Cabinet Committees के निर्णय भी इसी के अंतर्गत आते हैं।

सरकार के कार्य संचालन नियम

1961 में बनाए गए सरकार के कार्य संचालन नियम (Government of India Transaction of Business Rules) के तहत Cabinet Committees को औपचारिक मान्यता मिली। इन नियमों में स्पष्ट किया गया कि किन विषयों पर किस समिति का निर्णय अंतिम होगा।

सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या

सुप्रीम कोर्ट ने अपने विभिन्न निर्णयों में Cabinet Committees की वैधता को स्वीकार किया है। वर्ष 1994 के S.P. Anand बनाम केंद्र सरकार मामले में न्यायालय ने कहा कि Cabinet Committees मंत्रिमंडल प्रणाली का एक आवश्यक अंग हैं।

Cabinet Committees की विशेषताएँ

Cabinet Committees की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं जो इन्हें अद्वितीय बनाती हैं।

समिति का गठन

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में Cabinet Committees का गठन होता है। प्रधानमंत्री यह तय करते हैं कि कौन सी समिति बनेगी, उसके सदस्य कौन होंगे और उसका कार्यक्षेत्र क्या होगा।

सदस्यता का आधार

Cabinet Committees के सदस्य आमतौर पर कैबिनेट मंत्री होते हैं। कभी-कभी राज्य मंत्रियों को भी आमंत्रित किया जाता है यदि विषय उनके विभाग से संबंधित हो।

निर्णय की बाध्यकारी प्रकृति

Cabinet Committees के निर्णय पूरे मंत्रिमंडल के निर्णय माने जाते हैं। किसी भी मंत्री द्वारा इन निर्णयों को चुनौती नहीं दी जा सकती।

अध्यक्षता

लगभग सभी Cabinet Committees की अध्यक्षता प्रधानमंत्री स्वयं करते हैं। अपवाद स्वरूप कभी गृह मंत्री या रक्षा मंत्री को अध्यक्ष बनाया जाता है।

सचिवालय सहायता

Cabinet Secretariat इन समितियों को सचिवालय सहायता प्रदान करता है। Cabinet Secretary इन समितियों के कार्यों का समन्वयन करते हैं।

अनंतिम प्रकृति

Cabinet Committees स्थायी नहीं होतीं। प्रधानमंत्री इनका गठन, पुनर्गठन या समाप्ति कभी भी कर सकते हैं।

Cabinet Committees की सूची

वर्तमान में केंद्र सरकार की निम्नलिखित मुख्य Cabinet Committees हैं। यह सूची समय-समय पर बदलती रहती है।

Cabinet Committee on Security (CCS)

यह सबसे महत्वपूर्ण Cabinet Committee है। इसमें प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, वित्त मंत्री और विदेश मंत्री सदस्य होते हैं। इसके कार्य क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा नीति, सेना की तैनाती, परमाणु नीति और आंतरिक सुरक्षा शामिल हैं।

Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA)

यह आर्थिक नीतियों से संबंधित समिति है। इसमें प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, रेल मंत्री, उद्योग मंत्री और योजना आयोग (अब नीति आयोग) के उपाध्यक्ष सदस्य होते हैं। इसके निर्णय देश की आर्थिक दिशा तय करते हैं।

Cabinet Committee on Political Affairs (CCPA)

इसे अक्सर सुपर कैबिनेट भी कहा जाता है। यह सामान्य प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर निर्णय लेती है। इसमें प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, विदेश मंत्री और कानून मंत्री जैसे वरिष्ठ मंत्री शामिल होते हैं।

Cabinet Committee on Appointments (ACC)

यह समिति सरकार के वरिष्ठ पदों पर नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार है। इसमें प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदस्य होते हैं। इसके अनुमोदन के बिना कोई भी महत्वपूर्ण नियुक्ति नहीं हो सकती।

Cabinet Committee on Parliamentary Affairs (CCPA)

यह समिति संसद के कामकाज को सुचारू बनाने में मदद करती है। यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी विधेयक संसद में पारित हो जाएँ। इसमें प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, संसदीय कार्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री सदस्य होते हैं।

Cabinet Committee on Investment and Growth (CCIG)

यह अपेक्षाकृत नई समिति है जो निवेश को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार करती है।

Cabinet Committee on Employment and Skill Development

यह समिति रोजगार सृजन और कौशल विकास की नीतियों पर निर्णय लेती है।

अन्य समितियाँ

समय-समय पर आवश्यकतानुसार अन्य समितियाँ भी बनाई जाती हैं जैसे Cabinet Committee on Prices, Cabinet Committee on Infrastructure आदि।

Cabinet Committees के कार्य

Cabinet Committees के कार्यों को निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है।

विषयों का वितरण

Cabinet Committees का सबसे महत्वपूर्ण कार्य विभिन्न विषयों को उनकी प्रकृति के अनुसार संबंधित समिति में भेजना है। जैसे आर्थिक विषय CCEA को, सुरक्षा विषय CCS को।

त्वरित निर्णय लेना

मंत्रिमंडल में सभी मंत्रियों को एक साथ बुलाना समयसाध्य है। Cabinet Committees छोटे समूह होते हैं इसलिए इनमें त्वरित निर्णय लिए जा सकते हैं।

विशेषज्ञता का लाभ

किसी विशेष क्षेत्र के मंत्री उसी विषय पर समिति में होते हैं। इससे विशेषज्ञता पर आधारित निर्णय लेने में मदद मिलती है।

मंत्रिमंडल का बोझ कम करना

दैनिक शासन के छोटे-बड़े निर्णय समितियों के स्तर पर ले लिए जाते हैं, जिससे मंत्रिमंडल का समय बचता है।

विभागीय विवादों का समाधान

जब दो या अधिक मंत्रालयों के बीच विवाद होता है तो Cabinet Committees उसका समाधान करती हैं।

नीति निर्धारण

सरकार की प्रमुख नीतियाँ पहले संबंधित Cabinet Committees में विचार के लिए रखी जाती हैं और बाद में पूर्ण मंत्रिमंडल के सामने प्रस्तुत की जाती हैं।

Cabinet Committees के लाभ और महत्व

Cabinet Committees के निम्नलिखित लाभ हैं।

कार्यकुशलता में वृद्धि

समितियों के कारण निर्णय प्रक्रिया तीव्र होती है। प्रशासनिक मशीनरी अधिक प्रभावी ढंग से काम करती है।

निर्णयों में गुणवत्ता

संबंधित विशेषज्ञ मंत्री एक साथ बैठकर विषय की गहराई से चर्चा करते हैं। इससे निर्णय अधिक परिपक्व और गुणवत्तापूर्ण होते हैं।

गोपनीयता

संवेदनशील विषयों पर केवल चुनिंदा मंत्री ही निर्णय लेते हैं। इससे सूचना का रिसाव कम होता है।

मंत्रिमंडल पर दबाव कम

हर छोटे मुद्दे पर मंत्रिमंडल को बुलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे वरिष्ठ मंत्री अन्य महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान दे सकते हैं।

संसाधनों का बेहतर उपयोग

समितियों के गठन से सरकारी समय, ऊर्जा और संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है।

Cabinet Committees की सीमाएँ और आलोचना

किसी भी व्यवस्था की तरह Cabinet Committees की भी कुछ सीमाएँ हैं जिनकी आलोचना की जाती है।

प्रधानमंत्री का अत्यधिक प्रभुत्व

लगभग सभी समितियों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे प्रधानमंत्री के हाथों में अत्यधिक शक्ति केंद्रित हो जाती है।

मंत्रिमंडल के सामूहिक निर्णय का ह्रास

जब सबसे महत्वपूर्ण निर्णय छोटी समितियाँ ले लेती हैं तो पूर्ण मंत्रिमंडल एक औपचारिकता मात्र रह जाता है। यह संविधान के सामूहिक उत्तरदायित्व सिद्धांत के खिलाफ है।

पारदर्शिता का अभाव

Cabinet Committees की बैठकें गोपनीय होती हैं। उनके वार्तालाप सार्वजनिक नहीं होते। इससे निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहता है।

संसदीय नियंत्रण में कमी

संसद सरकार के कार्यों पर नियंत्रण रखती है। जब निर्णय छोटी समितियाँ ले लेती हैं तो संसद के लिए उन पर प्रश्न उठाना कठिन हो जाता है।

मंत्रियों का अलगाव

जो मंत्री किसी समिति के सदस्य नहीं होते वे महत्वपूर्ण निर्णयों से अलग-थलग महसूस करते हैं।

Cabinet Committees की वर्तमान स्थिति और हालिया सुधार

Cabinet Committees

वर्ष 2024 में केन्द्र सरकार ने Cabinet Committees का पुनर्गठन किया। इस पुनर्गठन में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बदलाव हुए।

नई समितियों का गठन

Cabinet Committee on Investment and Growth (CCIG) जैसी नई समितियाँ बनाई गईं जो विकास दर बढ़ाने और निवेश को आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित करती हैं।

Cabinet Committee on Security में परिवर्तन

CCS में अब अतिरिक्त सदस्यों को शामिल किया गया है जैसे कि सैन्य मामलों के राज्य मंत्री।

नीति आयोग की भूमिका

पुरानी समितियों में योजना आयोग का स्थान अब नीति आयोग ने ले लिया है।

UPSC Prelims के लिए Cabinet Committees पर तथ्य

Prelims में प्रश्न मुख्यतः तथ्यात्मक होते हैं। निम्नलिखित बिंदु ध्यान देने योग्य हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य संग्रह

एक: Cabinet Committees का कोई संवैधानिक उल्लेख नहीं है। ये सरकार के कार्य संचालन नियमों के तहत बनाई जाती हैं।

दो: प्रधानमंत्री इन समितियों का गठन करते हैं और सदस्यों का चयन करते हैं।

तीन: Cabinet Secretary इन समितियों के सचिवालय कार्यों का संचालन करते हैं।

चार: सभी Cabinet Committees के निर्णय पूर्ण मंत्रिमंडल के निर्णय माने जाते हैं।

पाँच: Cabinet Committee on Security सबसे महत्वपूर्ण समिति है।

छः: Cabinet Committee on Appointments में केवल दो सदस्य होते हैं – प्रधानमंत्री और गृह मंत्री।

सात: Cabinet Committees की बैठकों की आवृत्ति निश्चित नहीं है। आवश्यकतानुसार बुलाई जाती हैं।

Prelims में ट्रैप प्रश्न

अक्सर परीक्षा में यह प्रश्न पूछा जाता है कि Cabinet Committees का संवैधानिक आधार क्या है। छात्र संविधान का कोई अनुच्छेद बताने लगते हैं जबकि वास्तविक आधार कार्य संचालन नियम हैं।

एक और ट्रैप है – क्या उपराष्ट्रपति Cabinet Committees के सदस्य हो सकते हैं। उत्तर है नहीं, क्योंकि उपराष्ट्रपति मंत्रिपरिषद का सदस्य नहीं है।

MCQ उत्तर देने की तकनीक

जब भी प्रश्न Cabinet Committees से संबंधित हो तो इन बातों का ध्यान रखें। यदि विकल्प में कहा गया है कि संविधान में समितियों का उल्लेख है तो वह गलत विकल्प है। यदि कहा गया है कि प्रधानमंत्री समितियों का गठन नहीं बदल सकते तो वह भी गलत है।

पिछले वर्षों के रुझान

पिछले दस वर्षों में 2013, 2015, 2017, 2019 और 2021 में Cabinet Committees से संबंधित प्रश्न पूछे गए हैं। CCS और CCEA सबसे अधिक पूछे जाने वाले विषय रहे हैं।

UPSC Mains के लिए Cabinet Committees का विश्लेषण

Mains परीक्षा में Cabinet Committees से संबंधित प्रश्न विश्लेषणात्मक होते हैं। यहाँ विभिन्न आयाम दिए जा रहे हैं।

GS पेपर II से संबंध

शासन व्यवस्था, मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली, निर्णय प्रक्रिया में सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों के अंतर्गत Cabinet Committees का अध्ययन किया जाता है।

संघीय ढाँचे पर प्रभाव

प्रश्न उठता है कि क्या Cabinet Committees राज्यों के अधिकारों का हनन करती हैं। चूँकि इन समितियों में राज्यों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, इसलिए संघीय संवेदनशीलता वाले विषयों पर निर्णय लेते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

संवैधानिक नैतिकता का पहलू

Cabinet Committees में लिए गए निर्णयों का मंत्रियों का वैयक्तिक उत्तरदायित्व नहीं होता। यह संवैधानिक नैतिकता का एक जटिल प्रश्न है कि जब निर्णय सामूहिक होता है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।

लोकतांत्रिक पारदर्शिता का संतुलन

एक ओर गोपनीयता आवश्यक है तो दूसरी ओर पारदर्शिता लोकतंत्र की जान है। Cabinet Committees इस दुविधा का प्रतिनिधित्व करती हैं।

पिछले वर्षों के प्रश्नों का विश्लेषण

यहाँ कुछ महत्वपूर्ण PYQs (पिछले वर्षों के प्रश्न) दिए जा रहे हैं।

Prelims PYQ 2015

प्रश्न: Cabinet Committees के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

विकल्प:
क) वे संविधान में उल्लिखित हैं
ख) वे केवल तभी बनती हैं जब मंत्रिमंडल बैठक नहीं कर सकता
ग) उनके गठन का आधार सरकार के कार्य संचालन नियम हैं
घ) उनके सदस्यों का चयन राष्ट्रपति करते हैं

उत्तर: ग) उनके गठन का आधार सरकार के कार्य संचालन नियम हैं

व्याख्या: यह प्रश्न मूलभूत तथ्य पर आधारित था। जिन छात्रों ने कार्य संचालन नियमों के बारे में पढ़ा था उन्होंने सही उत्तर दिया।

Mains PYQ 2019

प्रश्न: मंत्रिमंडल समितियों की संवैधानिक स्थिति और कार्यप्रणाली की चर्चा कीजिए। क्या ये समितियाँ मंत्रिमंडल की सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत को कमजोर करती हैं?

उत्तर दृष्टिकोण: इस प्रश्न में दो भाग हैं। पहले भाग में संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करनी है – कोई सीधा प्रावधान नहीं, अनुच्छेद 77(3) के अंतर्गत नियम। दूसरे भाग में सामूहिक उत्तरदायित्व पर प्रभाव का विश्लेषण – दोनों पक्षों को तर्क सहित प्रस्तुत करना है।

Mains PYQ 2021

प्रश्न: Cabinet Committee on Security की संरचना और कार्यों का वर्णन कीजिए। इस समिति की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर दृष्टिकोण: सबसे पहले CCS की परिभाषा और संरचना लिखें। फिर सदस्यों के नाम बताएँ। फिर कार्यों को सूचीबद्ध करें। अंत में राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में इसकी आवश्यकता स्पष्ट करें।

उत्तर लेखन कौशल: Cabinet Committees पर मॉडल उत्तर

150 शब्दों का मॉडल उत्तर

प्रश्न: Cabinet Committees क्या हैं? इनके गठन का औचित्य स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

Cabinet Committees मंत्रिमंडल के छोटे समूह होते हैं जिनका गठन सरकार के कार्य संचालन नियमों के तहत किया जाता है। इनका कोई प्रत्यक्ष संवैधानिक आधार नहीं है बल्कि अनुच्छेद 77(3) के अंतर्गत बनाए गए नियम इन्हें अधिकार देते हैं।

इन समितियों का गठन निम्नलिखित कारणों से आवश्यक है। पहला, ये निर्णय प्रक्रिया को त्वरित बनाती हैं। दूसरा, विशेषज्ञ मंत्रियों के समूह में बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं। तीसरा, मंत्रिमंडल के कार्यभार में कमी आती है। चौथा, संवेदनशील विषयों पर गोपनीयता बनी रहती है।

वर्तमान में प्रमुख Cabinet Committees में Cabinet Committee on Security, Cabinet Committee on Economic Affairs और Cabinet Committee on Appointments शामिल हैं। प्रधानमंत्री लगभग सभी समितियों के अध्यक्ष होते हैं।

250 शब्दों का मॉडल उत्तर

प्रश्न: Cabinet Committees की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। क्या ये समितियाँ लोकतांत्रिक पारदर्शिता में बाधा उत्पन्न करती हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर:

Cabinet Committees की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं। गठन की प्रक्रिया – प्रधानमंत्री द्वारा ये समितियाँ बनाई जाती हैं। सदस्यता – इनमें केवल कैबिनेट मंत्री ही सदस्य होते हैं। अध्यक्षता – प्रधानमंत्री स्वयं अध्यक्ष होते हैं। निर्णयों की बाध्यकारी प्रकृति – समितियों के निर्णय पूर्ण मंत्रिमंडल के निर्णय माने जाते हैं। सचिवालय – Cabinet Secretariat इन्हें सहायता प्रदान करता है। अस्थायी प्रकृति – प्रधानमंत्री कभी भी इनका पुनर्गठन कर सकते हैं।

अब प्रश्न का दूसरा भाग – क्या ये पारदर्शिता में बाधक हैं। इसके पक्ष में तर्क यह है कि इनकी बैठकें गोपनीय होती हैं, उनके एजेंडा और चर्चा सार्वजनिक नहीं होती, और संसद का इन पर प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है। विपक्ष में तर्क यह है कि सुरक्षा और संवेदनशील आर्थिक मामलों में गोपनीयता आवश्यक है, अत्यधिक पारदर्शिता से निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होगी, और समितियों के निर्णय अंततः संसद में मंत्रिपरिषद द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं।

निष्कर्षतः Cabinet Committees का अस्तित्व आवश्यक है लेकिन उनकी कार्यप्रणाली में संतुलित पारदर्शिता लाने के प्रयास होने चाहिए।

उत्तर लेखन में आरेखों का सुझाव

इस विषय पर उत्तर लिखते समय निम्नलिखित आरेख बनाए जा सकते हैं। एक सरल सीढ़ी जैसा आरेख जिसमें शीर्ष पर प्रधानमंत्री, फिर विभिन्न Cabinet Committees, फिर उनके सदस्य। या एक वृत्ताकार आरेख जिसमें केंद्र में Cabinet Secretariat और चारों ओर विभिन्न समितियाँ।

मूल्य संवर्धन बिंदु

उत्तर में निम्नलिखित बिंदु जोड़कर गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशें – इसने Cabinet Committees की पारदर्शिता बढ़ाने की सिफारिश की थी। दूसरे, हालिया पुनर्गठन में नई समितियों का गठन। तीसरे, तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य – ब्रिटेन और अमेरिका में इसी प्रकार की व्यवस्था।

Cabinet Committees का अन्य विषयों से अंतर्संबंध

इतिहास से संबंध

ब्रिटिश कैबिनेट सिस्टम से ली गई यह अवधारणा भारत में औपनिवेशिक विरासत का हिस्सा है। 1935 के भारत शासन अधिनियम में भी इसके प्रारंभिक रूप देखने को मिलते हैं।

अर्थशास्त्र से संबंध

Cabinet Committee on Economic Affairs के निर्णय देश की आर्थिक नीति, मूल्य निर्धारण, निवेश और विकास को प्रभावित करते हैं। यह समिति अर्थशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों से संबंध

Cabinet Committee on Security विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समझौतों पर निर्णय लेती है। सीमा विवाद, परमाणु नीति और विदेशी सहायता जैसे विषय इसी समिति में तय होते हैं।

नैतिकता से संबंध

Cabinet Committees के सदस्यों के लिए नैतिक दुविधाएँ होती हैं। गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग न करना, हितों के टकराव से बचना और सामूहिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करना नैतिक मुद्दे हैं।

आंतरिक सुरक्षा से संबंध

CCS और Cabinet Committee on Political Affairs आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद निरोधक नीतियों और राज्यों में कानून व्यवस्था से जुड़े निर्णय लेती हैं।

UPSC aspirants द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियाँ

अवधारणात्मक गलतियाँ

बहुत से छात्र यह मान लेते हैं कि Cabinet Committees संविधान के किसी अनुच्छेद में लिखी गई हैं जबकि ऐसा नहीं है। दूसरी आम गलती यह है कि वे समितियों को मंत्रिमंडल से अलग स्वतंत्र इकाई मान लेते हैं।

उत्तर लेखन की गलतियाँ

Mains में उत्तर लिखते समय छात्र केवल परिभाषा और सूची लिखकर रुक जाते हैं। वे विश्लेषणात्मक भाग – लाभ, सीमाएँ, सुझाव – नहीं लिखते।

एक और गलती – वे हालिया पुनर्गठन और नवीनतम समितियों की जानकारी नहीं देते जिससे उत्तर अद्यतन नहीं रहता।

Prelims में गलतियाँ

Prelims के प्रश्नों में अक्सर छद्म विकल्प दिए जाते हैं जैसे Cabinet Committees के सदस्यों का चुनाव होता है या ये विधि द्वारा बनाई जाती हैं। छात्र सही तथ्य को लेकर भ्रमित हो जाते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति नोट्स

एक पृष्ठ में संपूर्ण संशोधन के लिए निम्नलिखित बिंदु पर्याप्त हैं।

Cabinet Committees की परिभाषा: मंत्रिमंडल के छोटे समूह

संवैधानिक आधार: कोई प्रत्यक्ष नहीं, कार्य संचालन नियम (अनुच्छेद 77(3))

गठनकर्ता: प्रधानमंत्री

अध्यक्ष: प्रधानमंत्री (लगभग सभी)

सचिवालय: Cabinet Secretariat

निर्णयों का प्रभाव: पूर्ण मंत्रिमंडल के निर्णय

प्रमुख समितियाँ: CCS, CCEA, CCPA, ACC

CCS सदस्य: PM, गृह, रक्षा, वित्त, विदेश

ACC सदस्य: PM, गृह मंत्री

मुख्य लाभ: त्वरित निर्णय, विशेषज्ञता, गोपनीयता

मुख्य सीमा: पारदर्शिता का अभाव, प्रधानमंत्री का प्रभुत्व

PYQ ट्रेंड: हर दो-तीन साल में प्रश्न

याद रखने की ट्रिक

CCS याद रखने के लिए – C शब्द से कैबिनेट, C से ही कमेटी, S से सिक्योरिटी। सदस्यों के लिए PM, HM, FM, DM, EM यानी प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, वित्त मंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री।

तीन प्रमुख समितियाँ – 3C : CCS, CCEA, CCPA

साक्षात्कार परिप्रेक्ष्य: Cabinet Committees से जुड़े संभावित प्रश्न

UPSC साक्षात्कार में Cabinet Committees पर इस प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

प्रश्न: आपको लगता है कि Cabinet Committees लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए लाभदायक हैं या हानिकारक?

उत्तर की दिशा: सन्तुलित उत्तर अपेक्षित है। लाभ – कार्यकुशलता, गति, विशेषज्ञता। हानि – पारदर्शिता, सामूहिक उत्तरदायित्व का ह्रास। अपना स्पष्ट मत रखें कि आवश्यकता को देखते हुए ये लाभदायक हैं लेकिन सुधार की गुंजाइश है।

प्रश्न: यदि आप प्रधानमंत्री होते तो Cabinet Committees में क्या बदलाव लाते?

उत्तर की दिशा: पारदर्शिता बढ़ाना, समितियों की बैठकों की सारांश रिपोर्ट सार्वजनिक करना, राज्यों के मुख्यमंत्रियों को संघीय विषयों की समितियों में आमंत्रित करना, समितियों के कार्यों की समय-समय पर समीक्षा करना जैसे सुझाव दे सकते हैं।

प्रश्न: Cabinet Committee on Security में केवल पाँच मंत्री। क्या यह पर्याप्त है?

उत्तर की दिशा: यह संतुलित तर्क है। एक ओर छोटी समिति त्वरित निर्णय के लिए आवश्यक है। दूसरी ओर आज के जटिल सुरक्षा परिदृश्य में अधिक विशेषज्ञों की आवश्यकता हो सकती है। वर्तमान संरचना कारगर रही है लेकिन समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है।

विद्वानों और विशेषज्ञों का दृष्टिकोण

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर

संविधान निर्माता का मानना था कि मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली में लचीलापन होना चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि कार्य संचालन के नियम बनाने की शक्ति राष्ट्रपति को दी गई है जिसके तहत Cabinet Committees जैसी व्यवस्था की जा सकती है।

ग्रानविल ऑस्टिन

प्रसिद्ध संविधान विशेषज्ञ ने अपनी पुस्तक Working of a Democratic Constitution में Cabinet Committees को भारतीय शासन व्यवस्था का एक सफल प्रयोग बताया है। उनके अनुसार यह समितियाँ कैबिनेट सरकार की दक्षता बढ़ाने में सहायक हैं।

सुभाष कश्यप

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के अनुसार Cabinet Committees की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इन्होंने मंत्रिमंडल को अतिभार से बचाया है। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि इन समितियों के कामकाज में अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता है।

एम. लक्ष्मीकांत

भारतीय राजव्यवस्था के प्रसिद्ध लेखक लक्ष्मीकांत ने अपनी पुस्तक में Cabinet Committees को विस्तार से समझाया है। उनके अनुसार यह समितियाँ प्रधानमंत्री को अपनी टीम के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद करती हैं।

द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में Cabinet Committees के संबंध में सिफारिश की कि इन समितियों की बैठकों का विवरण कुछ समय बाद सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बढ़े। इसके अलावा समितियों के निर्णयों को मंत्रिमंडल के सामने नियमित रूप से रखा जाना चाहिए।

समीक्षात्मक विश्लेषण: Cabinet Committees के सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष

सकारात्मक पक्ष

Cabinet Committees ने भारतीय शासन व्यवस्था को अधिक कार्यकुशल बनाया है। निर्णय प्रक्रिया में तेजी आई है। मंत्रियों के विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग हुआ है। संवेदनशील विषयों पर गोपनीयता बनी रहती है। प्रधानमंत्री को नीति निर्धारण में सुविधा होती है।

नकारात्मक पक्ष

आलोचकों का कहना है कि Cabinet Committees ने सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत को कमजोर किया है। पारदर्शिता का अभाव है। प्रधानमंत्री के हाथों में अत्यधिक शक्ति केंद्रित हो गई है। संसद का नियंत्रण प्रभावी नहीं रह गया है। कुछ मंत्री निर्णय प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं।

आवश्यक सुधार

Cabinet Committees में निम्नलिखित सुधार किए जा सकते हैं। पहला, समितियों के निर्णयों का सारांश निश्चित अवधि बाद सार्वजनिक किया जाए। दूसरा, संघीय विषयों पर राज्यों के प्रतिनिधियों को सलाहकार के रूप में आमंत्रित किया जाए। तीसरा, संसदीय समितियों को Cabinet Committees की कार्यप्रणाली की समीक्षा का अधिकार दिया जाए। चौथा, समितियों की बैठकों की न्यूनतम संख्या तय की जाए।

भविष्य की चुनौतियाँ

आने वाले समय में Cabinet Committees के सामने ये चुनौतियाँ होंगी। डिजिटल शासन के दौर में पारदर्शिता की बढ़ती माँग। राज्यों के साथ संघीय संबंधों में बदलाव। वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव के कारण CCS पर बढ़ता दबाव। नीति निर्धारण में सिविल सोसाइटी और मीडिया की बढ़ती भूमिका।

निष्कर्ष: Cabinet Committees का भविष्य और संवैधानिक मूल्य

Cabinet Committees आज भारतीय शासन व्यवस्था का एक अपरिहार्य अंग बन चुकी हैं। इनके बिना विशाल मंत्रिपरिषद की कल्पना करना कठिन है। हालाँकि संविधान ने इनका सीधा उल्लेख नहीं किया, लेकिन संविधान की भावना के अनुरूप ये व्यवस्थाएँ कार्य कर रही हैं।

एक लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है – दक्षता और पारदर्शिता के बीच संतुलन। Cabinet Committees इसी संतुलन का प्रतिनिधित्व करती हैं। जहाँ एक ओर त्वरित निर्णयों के लिए गोपनीयता आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर लोकतंत्र में सूचना का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

हर UPSC aspirant को यह समझना चाहिए कि Cabinet Committees केवल परीक्षा का एक विषय नहीं हैं बल्कि यह यह समझने का माध्यम है कि वास्तव में भारत सरकार कैसे चलती है। संविधान की किताबों में लिखी बातों से परे यह व्यावहारिक शासन का सच है।

आपके UPSC सफर में यह अध्याय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आपको बताता है कि कैसे एक बड़ी टीम को प्रबंधित किया जाता है। जब आप किसी दिन प्रशासनिक सेवा में होंगे तो समितियों में बैठकर निर्णय लेना आपके दैनिक जीवन का हिस्सा होगा।

अतः Cabinet Committees को केवल याद करने के बजाय समझने का प्रयास करें। प्रश्न पूछें कि क्यों, कैसे, कब और कहाँ। आपको सफलता अवश्य मिलेगी।

अपनी तैयारी जारी रखें। हर दिन थोड़ा सीखें, हर दिन थोड़ा आगे बढ़ें। आपका UPSC CSE मेंटर हमेशा आपके साथ है।

FAQs

 Cabinet Committees क्या होती हैं और इन्हें क्यों बनाया जाता है?

Cabinet Committees, केंद्रीय मंत्रिमंडल के छोटे समूह होते हैं जो शासन के विशिष्ट क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए बनाए जाते हैं। इन्हें मुख्य रूप से मंत्रिमंडल पर कार्यभार कम करने और निर्णय प्रक्रिया को तीव्र तथा कुशल बनाने के लिए गठित किया जाता है

क्या Cabinet Committees संविधान में उल्लिखित हैं?

नहीं, Cabinet Committees अतिरिक्त-संवैधानिक (extra-constitutional) निकाय हैं। भारतीय संविधान में इनका कोई प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं है

Cabinet Committees का संवैधानिक आधार क्या है?

ये समितियाँ ‘Government of India Transaction of Business Rules, 1961’ के तहत काम करती हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 77(3) के अधीन बनाए गए हैं। अनुच्छेद 77(3) राष्ट्रपति को सरकार के कार्यों के सुविधाजनक संचालन के लिए नियम बनाने का अधिकार देता है

Cabinet Committee और Cabinet में क्या अंतर है?

मंत्रिमंडल (Cabinet) एक बड़ा सामूहिक निकाय है जिसमें सभी कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। वहीं, Cabinet Committees इसी मंत्रिमंडल के भीतर बने छोटे समूह (sub-set) होते हैं जिन्हें विशिष्ट विषयों जैसे सुरक्षा, अर्थव्यवस्था आदि पर निर्णय लेने का काम सौंपा जाता है

Cabinet Committees को ‘extra-constitutional’ क्यों कहा जाता है?

इन्हें extra-constitutional इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये संविधान के किसी अनुच्छेद में सीधे नहीं लिखी गई हैं, बल्कि ये कार्य संचालन नियमों के माध्यम से बनाई जाती हैं। फिर भी, ये पूर्णतः संवैधानिक हैं क्योंकि ये अनुच्छेद 77(3) के तहत बनी हैं

Cabinet Committees का गठन कौन करता है और कैसे?

प्रधानमंत्री (Prime Minister) समय और परिस्थिति की आवश्यकता के अनुसार इन समितियों का गठन करते हैं। प्रधानमंत्री ही यह तय करते हैं कि कौन-सी समिति बनेगी, उसके सदस्य कौन होंगे और उसका कार्यक्षेत्र क्या होगा

Cabinet Committees के सदस्य कौन-कौन हो सकते हैं?

आमतौर पर इन समितियों में केवल कैबिनेट मंत्री (Cabinet Ministers) ही शामिल होते हैं। तथापि, गैर-कैबिनेट मंत्रियों (Ministers of State) को सदस्यता से वंचित नहीं किया गया है और उन्हें विशेष आमंत्रित (special invitees) के रूप में शामिल किया जा सकता है

Cabinet Committees की अध्यक्षता कौन करता है?

लगभग सभी Cabinet Committees की अध्यक्षता प्रधानमंत्री स्वयं करते हैं। यदि प्रधानमंत्री किसी समिति के सदस्य हैं, तो वे उसकी अध्यक्षता अवश्य करते हैं। केवल कभी-कभी गृह मंत्री या वित्त मंत्री कुछ समितियों (जैसे Cabinet Committee on Accommodation और Parliamentary Affairs) की अध्यक्षता करते हैं

क्या सभी Cabinet Committees की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं?

‘लगभग’ सभी की। वर्तमान में, Cabinet Committee on Accommodation और Cabinet Committee on Parliamentary Affairs को छोड़कर शेष सभी समितियों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं

Cabinet Committees के मुख्य प्रकार कौन-कौन से हैं?

दो प्रकार की होती हैं: स्थायी समितियाँ (Standing Committees) जो स्थायी प्रकृति की होती हैं, और तदर्थ समितियाँ (Ad-hoc Committees) जो किसी विशेष समस्या से निपटने के लिए अस्थायी रूप से बनाई जाती हैं और कार्य पूर्ण होने पर समाप्त कर दी जाती हैं

Cabinet Committees को ‘Super-Cabinet’ क्यों कहा जाता है?

Cabinet Committee on Political Affairs (CCPA) को ‘सुपर-कैबिनेट’ (Super-Cabinet) कहा जाता है क्योंकि इसका कार्यक्षेत्र अत्यंत व्यापक है। यह सभी नीति विषयों (आर्थिक, विदेशी, सुरक्षा, आंतरिक) से संबंधित होती है और इसे सबसे शक्तिशाली समिति माना जाता है।

भारत में वर्तमान में कितनी Cabinet Committees हैं?

वर्तमान में आठ (8) Cabinet Committees हैं, हालांकि यह संख्या समय और सरकार की आवश्यकता के अनुसार बदलती रहती है

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